संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसधानों क जुटाना, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: लिबटेक इंडिया (LibTech India) द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में वर्ष 2025-26 के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत रोजगार सृजन और आय में तीव्र गिरावट को रेखांकित किया गया है। यह VB-GRAM G अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने से पूर्व इस योजना के संचालन का अंतिम वर्ष था।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
• MGNREGS के तहत पंजीकृत परिवारों की संख्या 2024-25 के 14.98 करोड़ से 3.2% बढ़कर 2025-26 में 15.46 करोड़ हो गई, जो ग्रामीण रोजगार हेतु बढ़ती मांग का संकेत है।
• उच्च पंजीकरण के बावजूद, रोजगार में भारी गिरावट दर्ज की गई:
- कार्य प्राप्त करने वाले परिवारों की संख्या में 44 लाख की कमी आई।
- कार्यरत श्रमिकों की संख्या में 67 लाख की कमी आई, जो 9.1% की गिरावट दर्शाती है।
• सृजित कुल व्यक्ति-दिवसों की संख्या 21.5% गिरकर 268.44 करोड़ से 210.73 करोड़ रह गई।
• प्रति परिवार औसत मानव-दिवस 50.18 से घटकर 42.92 रह गए।
• गारंटीकृत 100 दिनों का कार्य पूर्ण करने वाले परिवारों की संख्या में 40.5% की गिरावट आई, जो 0.37 करोड़ से घटकर 0.22 करोड़ हो गई।
• औसत दैनिक मजदूरी ₹252.7 से बढ़कर ₹267 होने के बावजूद, मजदूरी पर होने वाला कुल व्यय वर्ष 2024–25 के ₹67,835 करोड़ से गिरकर 2025–26 में ₹56,265 करोड़ रह गया।
• लिबटेक (LibTech) के अनुमान के अनुसार, रोजगार के अवसरों में कमी के कारण प्रति मनरेगा परिवार को औसतन ₹1,221 की आय का नुकसान हुआ।
• यदि रोजगार का स्तर 2024-25 के समान बना रहता, तो श्रमिक अतिरिक्त ₹15,409 करोड़ अर्जित कर सकते थे।
• व्यक्ति-दिवसों में सबसे तीव्र गिरावट तमिलनाडु (42.8%) में दर्ज की गई, इसके बाद हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना का स्थान रहा।
• झारखंड में मानव-दिवसों में सर्वाधिक 12.9% की वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद जम्मू-कश्मीर और ओडिशा रहे।
• रिपोर्ट में इस गिरावट का आंशिक कारण स्थिर बजट आवंटन और निम्नलिखित तकनीकी हस्तक्षेपों को बताया गया है:
- आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS)
- नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) उपस्थिति ऐप
- अनिवार्य ई-केवाईसी (eKYC) सत्यापन
• मई 2026 तक लगभग 45.4% कुल श्रमिकों और 9.5% सक्रिय श्रमिकों ने ई-केवाईसी (eKYC) की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी, जिससे रोजगार तक उनकी पहुंच और मजदूरी के भुगतान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
• कार्यकर्ताओं ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 की ओर किए जा रहे इस बदलाव की भी आलोचना की है। उनका तर्क है कि इसे पर्याप्त सार्वजनिक विमर्श के बिना ही लागू कर दिया गया है।
मनरेगा के बारे में
• महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वर्ष 2005 में तत्कालीन यूपीए (UPA) सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के माध्यम से शुरू की गई थी।
• यह एक अधिकार-आधारित ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम है, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 100 दिनों तक के वैतनिक रोजगार की गारंटी देता है।
• इस योजना का उद्देश्य आजीविका सुरक्षा बढ़ाना, ग्रामीण संकट को कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संपत्तियों का निर्माण करना है।
• इस योजना का कार्यान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाता है।
VB-G RAM G अधिनियम, 2025 के बारे में
• वर्ष 2025 में, सरकार ने मनरेगा (MGNREGA) के स्थान पर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, जिसे सामान्यतः VB-GRAM G अधिनियम, 2025 के रूप में जाना जाता है, को लागू किया।
• यह अधिनियम एक अवसंरचना-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-संचालित ढांचे के माध्यम से ग्रामीण रोजगार सृजन को ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप बनाने का प्रयास करता है।
वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की मुख्य विशेषताएँ
• प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिनों के सवेतन रोजगार की गारंटी देता है।
• रोजगार सृजन को ग्रामीण अवसंरचना विकास के साथ एकीकृत करता है।
• चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है:

- जल सुरक्षा कार्य
- मुख्य ग्रामीण अवसंरचना
- आजीविका संबंधी अवसंरचना
- जलवायु अनुकूलन और चरम मौसम शमन कार्य
• यह पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत विकेंद्रीकृत ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं’ की पेशकश करता है।
• यह बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस-आधारित निगरानी, एआई (AI) संचालित निरीक्षण और सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस पर बल देता है।
• यह इस कार्यक्रम को पूर्णतः केंद्रीय योजना से बदलकर केंद्र और राज्य के बीच लागत साझाकरण वाले केंद्र प्रायोजित मॉडल में परिवर्तित करता है।
