क्षेत्रीय AIM संवाद नॉर्थ
संदर्भ: हाल ही में अटल नवाचार मिशन (AIM) ने मोहाली में क्षेत्रीय ‘AIM संवाद’ – उत्तर भारत संस्करण का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नवाचार इकोसिस्टम में इन्क्यूबेटर नेटवर्कों को सुदृढ़ करना, समावेशी उद्यमिता को बढ़ावा देना और राज्य-केंद्र सहयोग को बढ़ाना है।
क्षेत्रीय AIM संवाद के बारे में
• क्षेत्रीय AIM संवाद (Regional AIM SUMVAAD) – उत्तर भारत संस्करण का आयोजन अटल नवाचार मिशन, नीति आयोग द्वारा मोहाली में किया गया।
• इस सम्मेलन में सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, इन्क्यूबेटरों, उद्योग जगत के नेताओं, CSR भागीदारों और नवाचार इकोसिस्टम के हितधारकों ने भाग लिया।
• इस आयोजन का मुख्य ध्यान इन्क्यूबेशन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने, राज्य-स्तरीय नवाचार पहलों को व्यापक बनाने और सरकारों, शिक्षाविदों, इन्क्यूबेटरों एवं उद्योग जगत के बीच सहयोग में सुधार करने पर केंद्रित था।

• चर्चाओं के दौरान नवाचार-संचालित आर्थिक विकास, उभरते क्षेत्रों में स्टार्टअप के अवसरों और समावेशी उद्यमिता पर विशेष बल दिया गया।
• “अस्पतालों में इन्क्यूबेटर” विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें MedTech नवाचार और स्वास्थ्य देखभाल उद्यमिता को बढ़ावा देने में अस्पताल-आधारित इन्क्यूबेशन पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका को रेखांकित किया गया।
• इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण पंजाब और जम्मू-कश्मीर इन्क्यूबेशन कंसोर्टियम (PI-RAHI) का शुभारंभ था, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय नवाचार साझेदारी को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स एवं युवाओं के लिए अवसर सृजित करना है।
• इस सम्मेलन ने भारत के उद्यमिता इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान, नीतिगत संवाद और रणनीतिक सहयोग हेतु एक साझा मंच के रूप में भी कार्य किया।
इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन 2026
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 1-3 जून, 2026 तक नई दिल्ली में होने वाले पहले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन 2026 के लिए आधिकारिक वेबसाइट, लोगो और एक प्रचार फिल्म लॉन्च की।
इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बारे में
• यह एक अंतर-सरकारी वैश्विक गठबंधन है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में मैसूरु में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की 50वीं वर्षगांठ के समारोह के दौरान लॉन्च किया गया था।

• इस गठबंधन का उद्देश्य सात प्रमुख बड़ी बिल्ली प्रजातियों बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना है।
• अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA), पर्यावास क्षरण, अवैध शिकार, वन्यजीवों के अवैध व्यापार और वित्तीय एवं तकनीकी संसाधनों की कमी जैसे खतरों के समाधान हेतु ‘बिग कैट रेंज’ देशों, पर्यवेक्षक देशों, वैज्ञानिक संगठनों, संरक्षण भागीदारों और कॉर्पोरेट घरानों को एक साथ लाता है।
• भारत की सफल संरक्षण पहलें जैसे कि ‘प्रोजेक्ट टाइगर’, ‘एशियाई शेर संरक्षण’ और ‘प्रोजेक्ट चीता’ इस गठबंधन के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की आधारशिला हैं।
• आगामी शिखर सम्मेलन में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण पर प्रथम वैश्विक घोषणापत्र को अपनाने की उम्मीद है, जिसे “दिल्ली घोषणा” शीर्षक दिया गया है, जो परिदृश्य-आधारित और सहकारी संरक्षण ढांचे को बढ़ावा देगा।
स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) दिशानिर्देश 2026
संदर्भ: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप सामुदायिक भागीदारी, स्कूल शासन और बच्चों के समग्र विकास को सुदृढ़ करने के लिए स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) दिशानिर्देश 2026 लॉन्च किए हैं।
स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) दिशानिर्देश 2026 के बारे में:
• ये दिशानिर्देश शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA) और समग्र शिक्षा अभियान के तहत जारी पिछले SMC/SMDC ढाँचों का स्थान लेंगे।
• इनका उद्देश्य बुनियादी साक्षरता, समावेशी एवं न्यायसंगत शिक्षा और परिणाम-आधारित स्थानीय शासन को बढ़ावा देकर स्कूल प्रशासन को NEP 2020 के अनुरूप बनाना है।
• अब बालवाटिका से लेकर कक्षा 12 तक के सभी स्तरों के लिए एक ही SMC कार्य करेगी।
• SMCs को “स्कूल सामुदायिक शासी संस्थानों” के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसमें माता-पिता, शिक्षक, स्थानीय अधिकारी, पूर्व छात्र, शिक्षाविद, आशा (ASHA)/एएनएम (ANM) कार्यकर्ता और स्कूल प्रमुख शामिल होंगे।
• समिति के सदस्यों की संख्या छात्र नामांकन के आधार पर निर्धारित होगी:
- 100 छात्रों तक: 12-15 सदस्य
- 100-500 छात्र: 15-20 सदस्य
- 500 से अधिक छात्र: 20-25 सदस्य
• मुख्य कार्य क्षेत्रों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN), बाल सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, डिजिटल पारदर्शिता, समावेशिता और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के समर्थन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
• SMC की बैठकें महीने में कम से कम एक बार आयोजित की जानी चाहिए, जिसमें न्यूनतम 50% कोरम (गणपूर्ति) अनिवार्य है।
• दिशानिर्देशों में शैक्षणिक और स्कूल भवन उप-समितियों के गठन, तीन वर्षीय स्कूल विकास योजना (SDP) की तैयारी, सामाजिक अंकेक्षण और सामुदायिक संसाधनों की लामबंदी का प्रावधान है।
• SMCs ‘समग्र शिक्षा’, ‘पीएम पोषण’, ‘उल्लास’ (ULLAS) जैसी योजनाओं और ‘विद्यांजलि’ जैसी पहलों की निगरानी भी करेंगी।
स्वदेशी TARA ग्लाइड हथियार प्रणाली का पहला सफल उड़ान परीक्षण
संदर्भ: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने ओडिशा के तट पर टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) हथियार प्रणाली का पहला सफल उड़ान परीक्षण संपन्न किया।
टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) हथियार प्रणाली के बारे में:
• TARA भारत की पहली स्वदेशी ‘ग्लाइड हथियार प्रणाली’ (Glide Weapon System) है। इसे पारंपरिक गैर-निर्देशित वारहेड्स को जमीन पर स्थित लक्ष्यों को भेदने वाले सटीक-निर्देशित हथियारों में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

• यह एक मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है, जिसे अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI) और DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है।
• यह प्रणाली कम लागत वाले हवाई हथियारों की रेंज, सटीकता और मारक क्षमता में वृद्धि करती है।
• यह प्रणाली विमानों को स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता प्रदान करती है, जिससे विमान दुश्मन की हवाई रक्षा प्रणाली के दायरे से बाहर रहकर हथियार छोड़ सकते हैं।
• इस हथियार प्रणाली को ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर्स’ (DcPPs) और भारतीय रक्षा उद्योगों के सहयोग से विकसित किया गया है।
SO2 उत्सर्जन से होने वाली मौतों पर IIT दिल्ली का अध्ययन
संदर्भ: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT-D) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन का अनुमान है कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों (CFPP) से होने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) का प्रभावी शमन भारत में प्रतिवर्ष 1.24 लाख से अधिक असामयिक मौतों को रोक सकता है।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
• अध्ययन में पाया गया कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से होने वाला SO₂ उत्सर्जन द्वितीयक PM2.5 कणों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जो श्वसन और हृदय संबंधी रोगों से जुड़े होते हैं।
• शोधकर्ताओं ने पाया कि इन उत्सर्जनों में कमी से विभिन्न राज्यों में वार्षिक PM2.5 एक्सपोजर में 0.3-12 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और परिवेशी SO₂ स्तरों में 0.1-13.6 पार्ट्स प्रति बिलियन (ppb) तक की कमी आ सकती है।
• शोधकर्ताओं के अनुसार, कोयला आधारित बिजली संयंत्रों (CFPPs) से SO₂ उत्सर्जन के पूर्ण शमन से निम्नलिखित को रोका जा सकता है:
- भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,24,564 सभी कारणों से होने वाली मृत्यु,
- लगभग 14,777 हृदय संबंधी मृत्यु, और
- प्रतिवर्ष लगभग 8,476 श्वसन संबंधी) मृत्यु।
• अध्ययन का अनुमान है कि मौजूदा उत्सर्जन मानकों के सख्ती से कार्यान्वयन से 2030 तक कोयला बिजली संयंत्रों से जुड़े SO₂ और PM2.5 उत्सर्जन में 80% से अधिक की कमी लाई जा सकती है।
• शोधकर्ताओं ने सल्फर उत्सर्जन पर अंकुश लगाने के लिए ताप विद्युत संयंत्रों में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) प्रणालियों को बड़े पैमाने पर अपनाने की सिफारिश की है।
सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) के बारे में
• सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) एक विषाक्त वायु प्रदूषक है, जो मुख्य रूप से कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों, पेट्रोलियम शोधन, धातु प्रगलन और परिवहन उत्सर्जन से मुक्त होता है।
• वायुमंडल में, SO₂ प्रतिक्रिया करके द्वितीयक अकार्बनिक एरोसोल जैसे सल्फेट और नाइट्रेट बनाता है, जो PM2.5 प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
• SO₂ और PM2.5 के संपर्क में आना श्वसन और हृदय संबंधी रोगों से जुड़ा है, जिनमें अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और असामयिक मृत्यु शामिल हैं।
• SO₂ उन प्रदूषकों में से एक है जिनकी निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) के तहत की जाती है।
• भारत दुनिया के प्रमुख SO₂ उत्सर्जकों में से एक है, जिसमें कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र सबसे बड़े स्रोत हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जननी (JANANI) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया
संदर्भ: देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘जननी’ (JANANI – Journey of Antenatal, Natal and Neonatal Integrated Care) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
जननी (JANANI) प्लेटफॉर्म के बारे में
• जननी एक सेवा-उन्मुख डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक रूप से निगरानी करने और उन्हें बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
• मौजूदा आरसीएच (RCH) पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित यह प्लेटफॉर्म, देखभाल के निरंतर क्रम में प्रमुख सेवा वितरण घटनाओं को दर्ज करके एक अनुदैर्ध्य स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करता है।
• इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध ट्रैकिंग सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रसव पूर्व देखभाल, प्रसव की तैयारी, प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, नवजात शिशु की देखभाल, नवजात और छोटे बच्चों की घरेलू देखभाल और परिवार नियोजन शामिल हैं।
• इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:
- क्यूआर (QR) सक्षम डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) कार्ड
- बायोमेट्रिक सत्यापन
- उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के लिए स्वचालित अलर्ट
- निकटतम स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रसव के संभावित स्थान की जानकारी तक पहुँच
• यह नागरिकों को प्रसव पूर्व देखभाल दौरों और टीकाकरण के समय पर निर्धारण और निगरानी में सहायता प्रदान करता है। साथ ही, यह अलर्ट और रिमाइंडर भी भेजता है ताकि स्वास्थ्य से संबंधित कोई भी महत्वपूर्ण पड़ाव छूट न जाए।
• इस प्लेटफॉर्म को सशक्त अंतरसंचालनीयता विशेषताओं के साथ डिज़ाइन किया गया है, जो U-WIN और POSHAN जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण को सक्षम बनाता है। इससे निर्बाध डेटा विनिमय, विभिन्न कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय और विभिन्न क्षेत्रों के लाभार्थियों की व्यापक निगरानी सुनिश्चित होती है।
