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सामान्य अद्ययन-1: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।
संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में संशोधन के एक प्रस्ताव को स्वीकृति दी, ताकि ‘वंदे मातरम’ का अपमान करने या इसके गायन में बाधा उत्पन्न करने को एक दंडनीय अपराध बनाया जा सके।
अन्य संबंधित जानकारी
- मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ की धारा 3 में संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें बाधा डालने के लिए दंड का प्रावधान करती है।
- प्रस्तावित संशोधन भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान ही कानूनी आधार प्रदान करने का प्रयास करता है।
- संसद द्वारा अधिनियमित होने के पश्चात, वंदे मातरम के गायन के दौरान जानबूझकर बाधा डालना, अशांति उत्पन्न करना या राष्ट्रगीत का अनादर करने के लिए तीन वर्ष तक का कारावास, अर्थदंड या दोनों का प्रावधान किया जा सकता है।
- यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों और अन्य सरकारी निकायों को जारी हालिया निर्देशों के अनुरूप है, जिसमें आधिकारिक और औपचारिक अवसरों पर वंदे मातरम के सभी छह छंदों के गायन को प्रोत्साहित किया गया है। ऐसा विशेष रूप से इस गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया है।
- एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि जब किसी आयोजन में दोनों बजाए जाएं, तो राष्ट्रगान से पूर्व वंदे मातरम का गायन किया जाना चाहिए।
वंदे मातरम के बारे में
- वंदे मातरम की रचना 1870 के दशक में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा की गई थी और बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में सम्मिलित किया गया था।
- यह गीत मुख्य रूप से अत्यधिक संस्कृतनिष्ठ बंगाली भाषा में लिखा गया है और इसमें मातृभूमि का आह्वान एक दैवीय मातृ शक्ति के रूप में किया गया है।
- इस गीत को पहली बार 1896 में कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गाया गया था, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के साथ इसके शुरुआती जुड़ाव को दर्शाता है।
- बंगाल विभाजन के विरुद्ध स्वदेशी आंदोलन (1905) के दौरान, वंदे मातरम उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवाद के एक शक्तिशाली नारे के रूप में उभरा और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के साथ जुड़ गया।
- 1937 में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं ने अपनी सभाओं में वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों का उपयोग करने का निर्णय लिया, क्योंकि बाद के छंदों में हिंदू देवी-देवताओं के स्पष्ट भक्ति संदर्भ हैं, जिन्हें स्वतंत्रता आंदोलन के समावेशी-जन-चरण के दौरान कुछ समुदायों ने आपत्तिजनक और अपवर्जक पाया था।
- 1950 में, संविधान सभा ने वंदे मातरम को ‘राष्ट्रीय गीत’ का दर्जा प्रदान किया, जबकि ‘जन गण मन’ को ‘राष्ट्रगान’ के रूप में अपनाया गया।
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971
- इस अधिनियम को भारत के प्रमुख राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनादर को रोकने के लिए अधिनियमित किया गया था, जिनमें शामिल हैं:
- राष्ट्रीय ध्वज
- भारत का संविधान
- राष्ट्रगान
- अधिनियम की धारा 3 वर्तमान में राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने या ऐसे गायन में संलग्न सभा में व्यवधान उत्पन्न करने के लिए दंड निर्धारित करती है।
- अधिनियम के तहत दंड की अवधि तीन वर्ष तक का कारावास, या अर्थदंड, या दोनों हो सकती है।
- प्रस्तावित संशोधन वंदे मातरम को भी इसी तरह का वैधानिक संरक्षण प्रदान करने का प्रयास करता है।
