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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत के लिए ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा’ (NHA) अनुमान 2022-23 जारी किए, जो भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय, जेब से होने वाले खर्च की प्रवृत्तियों और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) की दिशा में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हैं।
अन्य संबंधित जानकारी:
• राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विकसित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत ‘स्वास्थ्य लेखा प्रणाली (SHA) 2011’ फ्रेमवर्क का उपयोग करके भारत में स्वास्थ्य पर होने वाले व्यय का एक व्यवस्थित आकलन प्रदान करते हैं।
- भारत के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC) द्वारा तैयार किया जाता है।
• 2022-23 की रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान का 10वाँ संस्करण है और इसमें स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सरकारों, परिवारों, निजी बीमाकर्ताओं, कंपनियों और बाह्य एजेंसियों द्वारा किए गए व्यय को शामिल किया जाता है।
• यह रिपोर्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय में दीर्घकालिक वृद्धि और जेब से होने वाले खर्च (OOPE) में निरंतर गिरावट को प्रदर्शित करती है और स्वास्थ्य सेवा में बेहतर वित्तीय सुरक्षा का संकेत देती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा अनुमान 2022–23 के मुख्य बिंदु
• सरकारी स्वास्थ्य खर्च (GHE) में वृद्धि
- सरकारी स्वास्थ्य खर्च (GHE) वर्ष 2013-14 के ₹1.30 लाख करोड़ से लगभग तीन गुना बढ़कर वर्ष 2022-23 में ₹3.85 लाख करोड़ हो गया है।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के हिस्से के रूप में सरकारी स्वास्थ्य खर्च (GHE) वर्ष 2013-14 के 1.15% से बढ़कर वर्ष 2022-23 में 1.43% हो गया है। संशोधित जीडीपी आधार वर्ष (2022-23 श्रृंखला) के तहत, यह हिस्सा 1.48% है।
- कुल सरकारी खर्च (GGE) के हिस्से के रूप में सरकारी स्वास्थ्य व्यय (GHE) इसी अवधि के दौरान 3.78% से बढ़कर 4.89% हो गया है, जो दर्शाता है कि सार्वजनिक खर्च में स्वास्थ्य को अधिक प्राथमिकता दी गई है।
- स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च (THE) में सरकारी स्वास्थ्य खर्च (GHE) का हिस्सा इसी अवधि के दौरान लगभग 15 प्रतिशत बढ़कर 28.6% से 43.7% हो गया है।
- प्रति व्यक्ति संदर्भ में, सरकारी स्वास्थ्य खर्च (GHE) वर्ष 2013-14 के ₹1,042 से लगभग 2.7 गुना बढ़कर वर्ष 2022-23 में लगभग ₹2,786 हो गया है।
• जेब से होने वाले खर्च (OOPE) में गिरावट
- स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च (THE) के हिस्से के रूप में जेब से किए जाने वाले खर्च (OOPE) में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है और इसमें वर्ष 2013-14 के 64.2% से लगभग 21 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है तथा यह वर्ष 2022-23 में 43.4% हो गया है।
- यह गिरावट स्वास्थ्य सेवाओं के सार्वजनिक प्रावधान (पब्लिक प्रोविजनिंग) के विस्तार, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) जैसी सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत व्यापक कवरेज और सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च में हुई वृद्धि को दर्शाती है।
• सामाजिक सुरक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल व्यय में वृद्धि
- स्वास्थ्य सेवा पर सामाजिक सुरक्षा खर्च (SSE) वर्ष 2013-14 और 2022-23 के बीच कुल स्वास्थ्य खर्च (THE) के 6% से बढ़कर 9.9% हो गया है।
- कुल स्वास्थ्य खर्च (THE) में निजी स्वास्थ्य बीमा का हिस्सा भी 3.4% से बढ़कर 9.2% हो गया है, जो जागरूकता और जनसंख्या की क्रय शक्ति के कारण बेहतर स्वास्थ्य-अनुकूल व्यवहार को दर्शाता है।
- प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर सरकारी खर्च वर्ष 2013-14 के लगभग ₹0.5 लाख करोड़ के दोगुने से भी अधिक होकर वर्ष 2022-23 में लगभग ₹1.4 लाख करोड़ हो गया है।
- रिपोर्ट में कोविड-19 महामारी की अवधि के दौरान और उसके बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च में तीव्र वृद्धि को भी रेखांकित किया गया है।
निष्कर्षों का महत्व
• सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति: बढ़ता सार्वजनिक खर्च और घटता जेब से किया जाने वाला खर्च (OOPE), स्वास्थ्य देखभाल लागतों के विरुद्ध वित्तीय सुरक्षा में सुधार करके ‘सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज’ की दिशा में क्रमिक प्रगति का संकेत देते हैं।
• परिवारों पर घटता वित्तीय बोझ: घटता हुआ जेब से किया जाने वाला व्यय (OOPE) कमजोर परिवारों में स्वास्थ्य खर्च और चिकित्सा-प्रेरित निर्धनता के जोखिम को कम करता है।
• सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों का सुदृढ़ीकरण: प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च में वृद्धि निवारक, संवर्धक और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों पर नीतिगत स्तर पर अधिक बल दिए जाने को दर्शाता है।
• बेहतर स्वास्थ्य वित्तपोषण संरचना: सामाजिक सुरक्षा खर्च में पूल हेल्थकेयर फाइनेंसिंग मैकेनिज्म और सरकार समर्थित बीमा कवरेज के क्रमिक विस्तार को प्रदर्शित करती है।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
• कम सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च: हाल के सुधारों के बावजूद, भारत का सरकारी स्वास्थ्य खर्च अभी भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) 2017 के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.5% के लक्ष्य से नीचे बना हुआ है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की समग्र क्षमता को सीमित करता है।
• जेब से किए जाने वाले खर्च (OOPE) का स्थायी बोझ: जेब से किया जाने वाला व्यय, हालांकि घट रहा है, फिर भी दवाओं, नैदानिक सेवाओं और बाह्य रोगी देखभाल पर खर्च लगातार उच्च बना हुआ है, जो विशेष रूप से ग्रामीण और निम्न-आय वाले परिवारों को प्रभावित करता है।
• स्वास्थ्य सेवा में क्षेत्रीय असमानताएँ: स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक व्यय, चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता और स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय भिन्नताएँ बनी हुई हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुँच की स्थिति उत्पन्न होती है।
• ‘मिसिंग मिडिल’ (वंचित मध्यम वर्ग) की समस्या: जहाँ आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) जैसी योजनाएँ जनसंख्या के निचले 40-50% हिस्से को कवर करती हैं, और कॉर्पोरेट/सरकारी बीमा शीर्ष स्तर को कवर करता है, वहीं लगभग 300 से 400 मिलियन कामकाजी वर्ग के भारतीय (जैसे- स्व-नियोजित व्यक्ति, गिग वर्कर्स, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे दुकानदार) एक ‘मिसिंग मिडिल’ (वंचित मध्यम वर्ग) का निर्माण करते हैं।
