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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत खंड पर भारत के पहले स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल-आधारित ट्रेनसेट के संचालन को मंजूरी दे दी है, जो हरित और संधारणीय रेल परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • रेलवे बोर्ड ने उत्तर रेलवे के समर्पित जींद-सोनीपत खंड पर 10-कोच वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल-आधारित डेमू (DEMU) ट्रेनसेट के संचालन को मंजूरी दी है।
  • इस ट्रेन ने अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) द्वारा आयोजित अपने दोलन परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे इसके वाणिज्यिक संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
  • प्रारंभ में, यह स्वीकृति केवल जींद-सोनीपत मार्ग तक ही दी गई है, जबकि इसका निर्धारित रखरखाव शकूरबस्ती में किया जाएगा।
  • इस ट्रेन के शुभारंभ के साथ ही भारत जर्मनी, जापान, चीन, स्वीडन और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन-संचालित रेल प्रणालियों की खोज या उनका संचालन कर रहे हैं।
  • यह पहल नवाचार, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ गतिशीलता के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

हाइड्रोजन-चालित ट्रेन के बारे में

  • इस हाइड्रोजन ट्रेन को भारत में ही डिज़ाइन और विकसित किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न और स्वदेशी तकनीकी विकास के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • वर्तमान में, यह ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर दुनिया का सबसे लंबा हाइड्रोजन ट्रेनसेट है, जिसमें 10 कोच हैं।
  • यह 2400 kW की कुल स्थापित क्षमता के साथ ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर दुनिया का सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट भी है।
  • इस ट्रेनसेट में आठ यात्री कोचों के साथ-साथ प्रत्येक 1200 kW की क्षमता वाले दो ड्राइविंग पावर कार (DPCs) शामिल हैं।
  • यह हरियाणा में 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत मार्ग पर चलेगी।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रौद्योगिकी कैसे काम करती है?

  • हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच एक विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से विद्युत उत्पन्न करती है।
  • उत्पादित विद्युत, ट्रेन के विद्युत मोटरों को शक्ति प्रदान करती है, जिससे डीजल-आधारित कर्षण प्रणालियों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
  • ईंधन सेल के भीतर, हाइड्रोजन अणु प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन में विभाजित हो जाते हैं।
  • इलेक्ट्रॉन एक बाहरी परिपथ के माध्यम से गमन करते हैं, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है, जबकि प्रोटॉन एक झिल्ली से होकर गुजरते हैं।
  • कैथोड पर, प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और ऑक्सीजन मिलकर जल का निर्माण करते हैं, जो जलवाष्प के रूप में उत्सर्जित होता है।
  • इसके परिणामस्वरूप, जलवाष्प ही एकमात्र उत्सर्जन है, जो हाइड्रोजन ईंधन सेल को वर्तमान में उपलब्ध सबसे स्वच्छ परिवहन प्रौद्योगिकियों में से एक बनाता है।

हाइड्रोजन उत्पादन और रीफ्यूलिंग अवसंरचना

  • ट्रेन के संचालन में सहायता के लिए, जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रीफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की गई है।
  • इस सुविधा को संपीड़ित हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त हो गई है।
  • यह परियोजना रीफ्यूलिंग संचालन के लिए एक हाइड्रोजन संपीडन प्रणाली के साथ-साथ विश्वसनीय और त्रुटि-रहित कामकाज सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण अतिरिक्त पुर्जों तथा तकनीकी सहायता प्रणालियों द्वारा समर्थित है।
  • निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक अतिरिक्त संपीडक इकाई भी प्रदान की गई है।
  • इस परियोजना के लिए आवश्यक हाइड्रोजन का उत्पादन विद्युत अपघटन के माध्यम से किया जाता है। विद्युत अपघटन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विद्युत का उपयोग करके जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है।
  • राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के व्यापक विज़न के तहत, हरित हाइड्रोजन के उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा-आधारित विद्युत अपघटकों द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाए जाने की उम्मीद है।

सुरक्षा और परिचालन व्यवस्थाएँ

  • इस मंजूरी के तहत हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग प्रणाली की चौबीस घंटे निगरानी, महत्वपूर्ण परिचालनों के लिए प्रशिक्षित एवं प्रमाणित कर्मियों की तैनाती, और आवधिक निरीक्षण तथा निर्धारित रखरखाव को अनिवार्य किया गया है।
  • हाइड्रोजन ट्रेनसेट और हाइड्रोजन संयंत्र दोनों के लिए परिचालन और रखरखाव नियमावलियों को RDSO द्वारा मंजूरी दे दी गई है।
  • इसके अतिरिक्त, शकूरबस्ती में प्रस्तावित रखरखाव सुविधा व्यापक सुरक्षा प्रावधानों, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और नियमित ऑडिट के तहत कार्य करेगी।

महत्व

  • हरित और टिकाऊ परिवहन: यह ट्रेन शून्य CO उत्सर्जन करती है, जिसमें केवल जलवाष्प ही निकास के रूप में बाहर निकलती है, जिससे रेलवे संचालन के पर्यावरणीय फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलती है।
  • स्वच्छ ऊर्जा का विकास: यह भारत के ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ (2023) के उद्देश्यों का समर्थन करता है और अगली पीढ़ी के स्वच्छ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देता है।
  • तकनीकी आत्मनिर्भरता: यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत हाइड्रोजन प्रणोदन, भंडारण, रीफ्यूलिंग और रेलवे इंजीनियरिंग में स्वदेशी क्षमताओं को प्रदर्शित करता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी: यह वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है और परिवहन के लिए आयातित जीवाश्म ईंधन पर दीर्घकालिक निर्भरता को कम करता है।
  • नेट-ज़ीरो लक्ष्यों की ओर प्रगति: यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में योगदान देता है और परिवहन क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन के माध्यम से वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने की देश की प्रतिबद्धता का समर्थन करता है।
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