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सामान्य अध्ययन-2: सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष; ई-गवर्नेंस—अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ एवं संभावनाएँ; नागरिक चार्टर; पारदर्शिता एवं जवाबदेही तथा संस्थागत एवं अन्य उपाय।

संदर्भ: विश्व न्याय परियोजना (WJP) विधि का शासन सूचकांक 2026 में भारत 143 देशों एवं क्षेत्राधिकारों में 88वें स्थान पर रहा और इसका स्कोर 0.48 था। वर्ष 2025 की तुलना में भारत की रैंकिंग में दो स्थान की गिरावट आई है।

विधि का शासन सूचकांक के बारे में

  • विश्व न्याय परियोजना (WJP) प्रतिवर्ष विधि का शासन सूचकांक जारी करती है।
  • यह सूचकांक विभिन्न देशों एवं क्षेत्राधिकारों में दैनिक जीवन में विधि के शासन के अनुभव और उसके प्रति लोगों की धारणा का आकलन करता है।
  • वर्ष 2026 के इस सूचकांक में 143 देश एवं क्षेत्राधिकार शामिल हैं, जो विश्व की लगभग 95% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें घरेलू सर्वेक्षणों तथा विधि व्यवसायियों और विशेषज्ञों के सर्वेक्षणों का उपयोग किया जाता है।

विश्व न्याय परियोजना (WJP) के बारे में

  • विश्व न्याय परियोजना (WJP) एक स्वतंत्र, बहुविषयक संगठन है, जो ज्ञान का सृजन करने, जागरूकता बढ़ाने और कार्रवाई को प्रोत्साहित करने के माध्यम से विश्वभर में विधि के शासन को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  • इसकी स्थापना 2006 में विलियम एच. न्यूकॉम द्वारा अमेरिकन बार एसोसिएशन (ABA) की एक अध्यक्षीय पहल के रूप में की गई थी। वर्ष 2009 में यह एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी संगठन बन गया।

सूचकांक के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत का प्रदर्शन:
    • भारत 143 देशों में 88वें स्थान पर रहा, जिसका अंक 0.48 था। वर्ष 2025 में 86वें स्थान की तुलना में इसकी रैंकिंग में दो स्थान की गिरावट आई।
    • दक्षिण एशिया में भारत तीसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र में नेपाल (सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाला देश) और श्रीलंका भारत से आगे हैं।
  • वैश्विक रैंकिंग:
    • शीर्ष स्थान प्राप्त देश: डेनमार्क (प्रथम), नॉर्वे (द्वितीय) और फिनलैंड (तृतीय)।
    • निम्नतम स्थान प्राप्त देश: वेनेजुएला (143वाँ), अफगानिस्तान (142वाँ), हैती (141वाँ), कंबोडिया (140वाँ) और निकारागुआ (139वाँ)।
    • अन्य प्रमुख देश: संयुक्त राज्य अमेरिका 30वें, चीन 92वें और रूस 121वें स्थान पर रहे।
  • वैश्विक स्तर पर विधि के शासन में गिरावट:
    • विधि के शासन में वैश्विक गिरावट लगातार नौवें वर्ष जारी रही। 62% देशों में इसके अंकों में गिरावट दर्ज की गई।
    • 86% से अधिक देशों में सत्तावादी शासन पर नियंत्रण रखने वाले कम-से-कम एक सुरक्षा उपाय में लगातार पाँच वर्षों तक गिरावट देखी गई। इन सुरक्षा उपायों में सरकारी शक्तियों पर नियंत्रण, खुली सरकार और मौलिक अधिकार शामिल हैं।
  • नागरिक स्वतंत्रता में गिरावट:
    • 64% देशों में विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में गिरावट दर्ज की गई।
    • 67% देशों में सभा करने एवं संगठन बनाने की स्वतंत्रता में गिरावट दर्ज की गई।
    • नागरिक सहभागिता में गिरावट: 65% देशों में नागरिक सहभागिता में गिरावट दर्ज की गई।
  • न्याय प्रणालियों का कमजोर होना:
    • 64% देशों में दीवानी न्याय व्यवस्था, जबकि 58% देशों में आपराधिक न्याय व्यवस्था की स्थिति में गिरावट दर्ज की गई।
    • 63% देशों में सरकारी शक्तियों पर न्यायपालिका के नियंत्रण में गिरावट आई।
    • रिपोर्ट में कार्यपालिका के अनुचित दबाव और सरकार के अनुचित हस्तक्षेप को न्याय प्रणालियों के कमजोर होने के प्रमुख कारणों के रूप में पहचाना गया।
  • न्याय तक पहुँच:
    • 54% देशों में दीवानी न्याय तक पहुँच और उसकी वहनीयता में सुधार हुआ।
    • 52% देशों में दीवानी न्याय व्यवस्था में भेदभाव से मुक्ति की स्थिति में सुधार हुआ।
  • आर्थिकस्थिरताऔरविधिकाशासन:
    • जिन देशों की प्रति व्यक्ति जीडीपी का स्तर 14,406 अमेरिकी डॉलर के वैश्विक औसत से अधिक था, उन्होंने सूचकांक में 0.68 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए।
    • जिन देशों में मुद्रास्फीति की दर 3.23% की मध्यिका से कम थी, उन्होंने 0.60 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए।
    • निवेश-श्रेणी की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग (AAA से BBB) वाले देशों ने सूचकांक में 0.66 या उससे अधिक अंक प्राप्त किए।
  • देश-स्तरीय परिवर्तन:
    • सबसे अधिक गिरावट: हैती (−5.6%), तंजानिया (−3.5%) और सूडान (−2.8%)।
    • सबसे अधिक सुधार: लातविया (+1.6%), त्रिनिदाद और टोबैगो (+1.2%) तथा ग्वाटेमाला (+1.1%)।
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