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सामान्य अध्ययन-1: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएं।; महत्वपर्ण भ-भौतिकीय घटनाएं।सामान्य अध्ययन –3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन ।
संदर्भ: नेचर कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) के संभावित पतन से समुद्र में संचित कार्बन की भारी मात्रा मुक्त हो सकती है, विशेष रूप से दक्षिणी महासागर से। इसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापन में वृद्धि हो सकती है, जिससे जलवायु तंत्र में उल्लेखनीय बदलाव आ सकता है।
अटलांटिक मेरिडियनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन (AMOC) के बारे में
- यह महासागरीय धाराओं की एक प्रमुख प्रणाली है और थर्मोहेलाइन परिसंचरण की अटलांटिक शाखा का निर्माण करती है, जिसे ‘वैश्विक महासागरीय कन्वेयर बेल्ट’ के रूप में भी जाना जाता है।
- यह सतह के गर्म पानी को आर्कटिक की ओर ले जाती है, जिससे उत्तरी उत्तरी अमेरिका और यूरोप की जलवायु प्रभावित होती है, और ठंडे गहरे पानी को वापस उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लाती है।

- यह विश्व के महासागरीय बेसिन ऊष्मा, कार्बन और पोषक तत्वों के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- परिसंचरण की प्रक्रिया:
- उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से सतह का गर्म जल उत्तर की ओर उत्तरी अटलांटिक में प्रवाहित होता है।
- ठंडे उत्तरी क्षेत्रों में, यह जल अपनी ऊष्मा खो देता है, जिससे इसका घनत्व बढ़ जाता है और यह गहरे महासागर नीचे बैठ जाता है।
- इसके पश्चात, ये गहरी धाराएँ दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हैं और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों तथा दक्षिणी अटलांटिक की ओर बढ़ती हैं।
- वहाँ से, ये धाराएँ अंटार्कटिक ध्रुवीय धारा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर पुनर्वितरित होती हैं, जिससे यह ‘कन्वेयर-बेल्ट’ परिसंचरण पूर्ण होता है।
मुख्य बिंदु:
- जलवायु प्रणाली में AMOC की भूमिका
- ऊष्मा वितरण तंत्र: AMOC एक वैश्विक महासागरीय कन्वेयर बेल्ट के रूप में कार्य करता है, जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से सतह के गर्म जल को उत्तरी अटलांटिक तक पहुँचाता है और ठंडे गहरे जल को दक्षिण की ओर वापस लाता है। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर संतुलित ऊष्मा वितरण सुनिश्चित करती है।
- जलवायु विनियमन कार्य: यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में तापमान को नियंत्रित करता है और वैश्विक जलवायु स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- कार्बन चक्र में योगदान: AMOC महासागरों के भीतर कार्बन के भंडारण और पुनर्वितरण में सहायता करता है, जिससे यह वायुमंडलीय CO2 केस्तरों को विनियमित करने के लिए आवश्यक बन जाता है।
- जलवायु परिवर्तनकारी तत्व के रूप में AMOC
- देहलीज व्यवहार: AMOC उन 16 जलवायु ‘परिवर्तनकारी तत्वों’ में से एक है, जिनमें एकाएक और अपरिवर्तनीय परिवर्तन हो सकते हैं, जिसके व्यापक और श्रृंखलाबद्ध प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
- अपरिवर्तनीयता का जोखिम: इस तरह के पतन को पूर्ववत करना कठिन हो सकता है, विशेष रूप से निरंतर जारी वैश्विक तापन की स्थितियों के कारण।
- श्रृंखलाबद्ध प्रभाव: इसके बाधित होने से महासागरीय, वायुमंडलीय और पारिस्थितिक प्रणालियों में व्यापक बदलाव आ सकते हैं।
- निरंतर कमजोर होने के साक्ष्य:
- ह्रास का अवलोकन: अध्ययनों से संकेत मिलता है कि पिछले दो दशकों में AMOC लगातार कमजोर हुआ है।
- पश्चिमी सीमा में परिवर्तन: पश्चिमी अटलांटिक सीमा धाराओं में महत्वपूर्ण कमी देखी गई है, जो इस परिसंचरण की शक्ति का एक बड़ा हिस्सा बनाती हैं।
- महासागर निगरानी डेटा: महासागर के तल के दबाव की माप गहरे जल के परिवहन में गिरावट की पुष्टि करते हैं, जिससे इस प्रणाली की अस्थिरता के बारे में चिंताएं और बढ़ गई हैं।
- AMOC के कमजोर होने कारण
- ग्रीनलैंड से मीठे जल का प्रवाह: ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के पिघलने से उत्तरी अटलांटिक में मीठा जल मिल रहा है, जिससे पानी की लवणता कम हो जाती है और घनत्व-आधारित जल के नीचे बैठने की प्रक्रिया कमजोर हो जाती है।
- वैश्विक तापन का प्रभाव: बढ़ता तापमान महासागरीय स्तरीकरण को बदल देता है और ऊर्ध्वाधर मिश्रण को कम करता है, जिससे यह परिसंचरण और भी कमजोर हो जाता है।
- प्रेक्षणों से पता चलता है कि AMOC पहले से ही कमजोर हो रहा है, और नेचर कम्युनिकेशंस में 2023 के एक अध्ययन का अनुमान है कि 2037 और 2109 के बीच इसका संभावित पतन हो सकता है।
- AMOC पतन के जलवायु प्रभाव
- वैश्विक तापमान में परिवर्तन: AMOC के पतन से वैश्विक तापमान में लगभग 0.17–0.27°C की वृद्धि हो सकती है, जिसका मुख्य कारण अतिरिक्त CO2 का मुक्त होना है।
- अध्ययन का अनुमान है कि AMOC के पतन से वायुमंडल में अतिरिक्त 47-83 गीगाटन CO2 मुक्त हो सकती है।
- क्षेत्रीय जलवायु विषमता: इसके प्रभाव असमान होंगे; ऊष्मा परिवहन में कमी के कारण आर्कटिक में 7°C तक की गिरावट (शीतलन) देखी जा सकती है, जबकि अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में 6°C या उससे अधिक की वृद्धि (तापन) हो सकती है, जहाँ कुछ क्षेत्रों में इससे भी अधिक गर्मी का अनुभव होगा। यह एक तीव्र ध्रुवीय विषमता उत्पन्न करता है।
- वैश्विक तापमान में परिवर्तन: AMOC के पतन से वैश्विक तापमान में लगभग 0.17–0.27°C की वृद्धि हो सकती है, जिसका मुख्य कारण अतिरिक्त CO2 का मुक्त होना है।
- महासागर–कार्बन फीडबैक तंत्र
- यह पतन समुद्री बर्फ एल्बीडो फीडबैक जैसे फीडबैक तंत्रों को और तीव्र कर देगा, जहाँ बर्फ के आवरण में वृद्धि अधिक सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करती है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में शीतलन और अधिक बढ़ जाता है।
- साथ ही, दक्षिणी में कार्बन-समृद्ध गहरे जल के ऊपर आने से वायुमंडलीय CO2 के स्तर में और अधिक वृद्धि होगी।
- यह पतन समुद्री बर्फ एल्बीडो फीडबैक जैसे फीडबैक तंत्रों को और तीव्र कर देगा, जहाँ बर्फ के आवरण में वृद्धि अधिक सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करती है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में शीतलन और अधिक बढ़ जाता है।
- व्यापक निहितार्थ
- जलवायु तंत्र में व्यवधान: वर्षा के पैटर्न में बदलाव, जिसमें मानसून पर पड़ने वाले प्रभाव भी शामिल हैं, कृषि और जल की उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं।
- पारिस्थितिक परिणाम: समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से बाधित हो सकता है, जिससे जैव विविधता और मत्स्य पालन प्रभावित होंगे।
- सामाजिक-आर्थिक जोखिम: खाद्य असुरक्षा, तटीय सुभेद्यता और जलवायु-प्रेरित प्रवासन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
निष्कर्ष
AMOC पृथ्वी की जलवायु प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, और इसका देखा जा रहा ह्रास बदलाव की ओर संभावित पहुँच का संकेत देता है। हाल के शोध के निष्कर्ष जलवायु कार्रवाई को गति देने, महासागरों की निगरानी बढ़ाने और अपरिवर्तनीय जलवायु परिणामों को रोकने के लिए वैश्विक नीतिगत ढांचों में टिपिंग पॉइंट के जोखिमों को शामिल करने की तात्कालिकता पर बल देते हैं।
Source:
Downtoearth
oceanservice
