संदर्भ: बिहार एग्री-PV समिट 2026 का आयोजन 18 अगस्त 2026 को पटना में किया गया है। इस शिखर सम्मेलन में सरकारी अधिकारी, नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञ, कृषि क्षेत्र से जुड़े हितधारक, निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि तथा वित्तीय संस्थान शामिल हुए। इसका उद्देश्य बिहार में किसान-केंद्रित स्वच्छ ऊर्जा मॉडल के रूप में कृषि-सौर ऊर्जा खेती की संभावनाओं का अध्ययन करना था।
एग्री-PV क्या है?
● कृषि-सौर ऊर्जा, जिसे एग्री-फोटोवोल्टिक्स (Agri-PV) भी कहा जाता है, में एक ही भूमि पर सौर पैनलों की स्थापना और कृषि गतिविधियों को एक साथ संचालित किया जाता है।
● सौर मॉड्यूल को उचित ऊँचाई एवं दूरी पर स्थापित किया जाता है।
● सौर पैनलों के नीचे, आसपास या उनके बीच फसलों की खेती की जा सकती है।
● इसकी डिजाइन में फसलों के लिए उपलब्ध सूर्यप्रकाश, कृषि कार्यों की सुविधा, सिंचाई तक पहुँच तथा विद्युत उत्पादन के बीच संतुलन आवश्यक है।
● इसके अंतर्गत छाया-सहिष्णु सब्जियाँ, चारा, मसाले, फूल तथा कुछ बागवानी फसलों की खेती की जा सकती है। हालांकि, फसल की उपयुक्तता स्थान एवं परियोजना की डिजाइन पर निर्भर करती है।
● बिहार मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन विशेष रूप से केवल सौर पार्कों के लिए उपलब्ध भूमि सीमित है। इसलिए एग्री-PV खाद्य उत्पादन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के बीच भूमि उपयोग संबंधी संघर्ष को कम कर सकता है।
● बिहार नवीकरणीय ऊर्जा नीति, 2025 में एग्री-PV को नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के दायरे में शामिल किया गया है। इसमें वित्तीय वर्ष 2029–30 तक 23,968 मेगावाट की संचयी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तथा 6,100 मेगावाट-घंटा ऊर्जा भंडारण का लक्ष्य रखा गया है।
संभावित लाभ
● किसानों की आय: भूमि किराया, विद्युत बिक्री या राजस्व साझेदारी के माध्यम से आय बढ़ सकती है, जबकि कृषि उत्पादन भी जारी रहता है।
● भूमि दक्षता: एक ही भूमि क्षेत्र से खाद्य एवं विद्युत दोनों का उत्पादन किया जा सकता है।
● जलवायु सहनशीलता: उपयुक्त फसलों में आंशिक छाया गर्मी का तनाव तथा वाष्पोत्सर्जन को कम कर सकती है।
● सिंचाई: सौर ऊर्जा का उपयोग कृषि पंपों के संचालन तथा अधिक दक्ष सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
● ऊर्जा संक्रमण: विकेंद्रीकृत एवं स्थानीय स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय विद्युत को बढ़ावा मिलता है।
नीतिगत संबद्धता — पीएम-कुसुम
● पीएम-कुसुम योजना कृषि क्षेत्र में एग्री-पीवी एवं सौर ऊर्जीकरण को अपनाने में सहायता कर सकती है।
● इस योजना का लक्ष्य 34,800 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना है।
● इसके अंतर्गत शामिल हैं—
- विकेंद्रीकृत ग्रिड-संबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र।
- स्वतंत्र सौर कृषि पंप।
- ग्रिड-संबद्ध कृषि पंपों का सौर ऊर्जीकरण।

बिहार ने 14 चीनी मिल परियोजनाओं को मंजूरी दी
संदर्भ: बिहार सरकार ने राज्यभर में 14 नई चीनी उद्योग परियोजनाओं की स्थापना के लिए ₹3,605.92 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

प्रमुख बिंदु
● स्वीकृत परियोजनाओं से लगभग 16,447.92 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
● इन परियोजनाओं को राज्य मंत्रिमंडल अथवा राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) से मंजूरी प्राप्त हुई है।
● प्रस्तावित निवेश मधुबनी, पूर्वी चंपारण, मुज़फ्फरपुर, सारण, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण, सुपौल एवं रोहतास सहित विभिन्न जिलों में किया जाएगा।
● इन परियोजनाओं में सामान्यतः निम्नलिखित घटक शामिल हैं—
- चीनी मिल, जिसकी पेराई क्षमता TCD (प्रति दिन गन्ने की टन) में मापी जाती है।
- एथेनॉल डिस्टिलरी, जिसकी क्षमता KLPD (प्रति दिन किलोलीटर) में मापी जाती है।
- सह-उत्पादन संयंत्र, जिसमें गन्ने के अवशेष से विद्युत का उत्पादन किया जाता है।
- कुछ परियोजनाओं में चीनी उद्योग के अपशिष्ट से संपीड़ित बायोगैस (CBG) संयंत्र भी शामिल हैं।
नीतिगत संदर्भ
● ये निवेश बिहार चीनी उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति, 2026 के अनुरूप हैं। यह नीति एकीकृत चीनी परिसरों के लिए प्रोत्साहन प्रदान करती है तथा आसवनियों, एथेनॉल इकाइयों, सह-उत्पादन परियोजनाओं एवं CBG संयंत्रों को समर्थन देती है। इस नीति का उद्देश्य बंद चीनी मिलों को पुनर्जीवित करना तथा सात निश्चय-3 के अंतर्गत 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना भी है।
● प्रमुख प्रोत्साहनों में 30 वर्षों के लिए ₹1 के सांकेतिक वार्षिक लीज मूल्य पर अधिकतम 40 एकड़ सरकारी भूमि, भूमि खरीद पर पंजीकरण शुल्क एवं स्टांप शुल्क की प्रतिपूर्ति, पाँच वर्षों तक चीनी उत्पादन पर राज्य जीएसटी की प्रतिपूर्ति तथा नई मिलों एवं क्षमता विस्तार के लिए वित्तीय सहायता शामिल हैं।
H1N1 के मामलों में वृद्धि
संदर्भ: कई राज्यों में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी, वायरल बुखार और सांस के संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी के बीच H1N1, या स्वाइन-फ्लू के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
H1N1 क्या है?
● H1N1 इन्फ्लूएंजा A वायरस का एक प्रकार है। यह मुख्य रूप से सांस के ज़रिए निकलने वाली बूंदों और निकट संपर्क से फैलता है, और इसके कारण निम्न लक्षण हो सकते हैं:
- अचानक बुखार या ठंड लगना।
- खाँसी एवं गले में खराश।
- नाक बहना या नाक बंद होना।
- सिरदर्द, शरीर में दर्द एवं थकान।
- कभी-कभी उल्टी या दस्त।
● बुखार और खांसी वाले हर व्यक्ति के लिए H1N1 की नियमित जांच ज़रूरी नहीं है। भारत की क्लिनिकल गाइडेंस के तहत, लक्षणों की गंभीरता और जोखिम कारकों के आधार पर इलाज और जांच को प्राथमिकता दी जाती है।
● गंभीर बीमारी या जटिलताओं का अधिक जोखिम निम्नलिखित लोगों में होता है—
- 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे, विशेष रूप से 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे।
- 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्क।
- गर्भवती महिलाएँ तथा प्रसव के बाद 2 सप्ताह तक की महिलाएँ।
- अस्थमा या हृदय, फेफड़े, गुर्दे, यकृत अथवा तंत्रिका संबंधी दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित व्यक्ति।
- मधुमेह, रक्त संबंधी रोग या गंभीर मोटापे से पीड़ित व्यक्ति।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति, जिनमें लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले तथा अंग प्रत्यारोपण के बाद उपचार प्राप्त करने वाले लोग शामिल हैं।
● उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों तथा गंभीर लक्षण वाले लोगों को शीघ्र चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। ओसेल्टामिविर जैसी विषाणुरोधी दवाएँ चिकित्सक की सलाह से दी जानी चाहिए। NCDC के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह श्रेणी B एवं C के मामलों में अनुशंसित है और जहाँ आवश्यक हो, उपचार जल्दी शुरू करने पर अधिक प्रभावी होता है।

भारत की छठी रक्षा स्वदेशीकरण सूची
संदर्भ: 18 अगस्त 2026 को रक्षा उत्पादन विभाग (DDP), रक्षा मंत्रालय ने छठी ‘पॉज़िटिव इंडिजनाइज़ेशन लिस्ट’ (PIL) अधिसूचित की, जिसमें 405 रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण रक्षा वस्तुएँ शामिल हैं। इनकी अनुमानित व्यावसायिक क्षमता ₹3,070 करोड़ है।

सूची में क्या शामिल है?
● इस सूची में शामिल हैं:
- 389 वस्तुएँ रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) से संबंधित।
- 16 वस्तुएँ भारतीय तटरक्षक बल से संबंधित।
- लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (LRUs), उप-प्रणालियाँ, उप-संयोजन, स्पेयर पार्ट्स, घटक तथा कच्चे माल।
● यह सूची विभिन्न प्रकार के प्लेटफॉर्म एवं प्रणालियों को कवर करती है—
- वायु प्लेटफॉर्म: उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर (ALH), हल्का उपयोगिता हेलीकॉप्टर (LUH), Su-30MKI, हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तथा AL-31FP इंजन।
- थल प्लेटफॉर्म: T-72, T-90 तथा BMP-II बख्तरबंद प्लेटफॉर्म।
- नौसैनिक प्रणालियाँ: युद्धपोत एवं उनसे संबंधित घटक।
- मिसाइलें: कॉनकुर्स-एम, इनवर तथा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM) प्रणालियाँ।
- रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स: रडार, सोनार, अग्नि-नियंत्रण प्रणालियाँ तथा उपग्रह संचार प्रणालियाँ।
- गोला-बारूद: उच्च-विस्फोटक टैंक-रोधी (HEAT) गोला-बारूद तथा अन्य महत्त्वपूर्ण उपकरण।
● विस्तृत सूची सृजन रक्षा पोर्टल पर उपलब्ध है तथा प्रत्येक वस्तु के लिए स्वदेशीकरण की निर्धारित समय-सीमा दी गई है।
सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची क्या है?
● सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (PIL) में ऐसे रक्षा उपकरणों, प्रणालियों, घटकों या सामग्रियों की पहचान की जाती है, जिन्हें क्रमिक रूप से भारत में विकसित एवं निर्मित किया जाना है।
● निर्धारित समय-सीमा के बाद संबंधित वस्तु की खरीद आयात के बजाय घरेलू उद्योग से की जानी होती है।
● रक्षा मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत 2021 में सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ शुरू की थीं। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, भारतीय कंपनियों के लिए सुनिश्चित मांग पैदा करना तथा घरेलू रक्षा आपूर्ति शृंखला को विकसित करना है।
● मई 2026 तक 5 DPSU सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों में 5,012 वस्तुएँ अधिसूचित की जा चुकी थीं।
● इससे पहले के 5 वर्षों में सृजन पोर्टल के माध्यम से 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं, जिनमें 3,204 सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची की वस्तुएँ शामिल हैं, का स्वदेशीकरण किया गया। इस दौरान रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने ₹9,782 करोड़ के घरेलू ऑर्डर दिए।
