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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए उद्यम और विकास पूंजी जुटाने के उद्देश्य से ₹10,000 करोड़ की कुल निधि के साथ ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ (FoF 2.0) को मंजूरी दी।
स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0के बारे में

- यह योजना 2016 में स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना के तहत शुरू किए गए ‘फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स’ (FFS 1.0) की सफलता पर आधारित है। FFS 1.0 ने वित्तपोषण अंतराल को दूर करने और घरेलू उद्यम पूंजी को उत्प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0 एक सरकार समर्थित वित्तपोषण तंत्र है, जिसका उद्देश्य सेबी (SEBI) के साथ पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) में व्यवस्थित निवेश के माध्यम से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है।
- मुख्य विशेषताएँ
- कुल कोष: ₹10,000 करोड़
- अवधि : 16वें और 17वें वित्त आयोग के चक्रों में विस्तृत।
- निवेश मार्ग: वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) में योगदान, जो बदले में स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI), साथ ही एक अतिरिक्त घरेलू एजेंसी।
- नोडल विभाग: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT)।
- निवेश संरचना: यह योजना चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को लक्षित करते हुए एक खंडित दृष्टिकोण अपनाती है:
- डीप टेक स्टार्टअप: उच्च अनुसंधान और विकास (R&D) तथा लंबी समयावधि वाले नवाचार।
- प्रारंभिक विकास चरण के स्टार्टअप: छोटे वैकल्पिक निवेश कोषों के माध्यम से सहायता प्राप्त।
- तकनीक-संचालित विनिर्माण स्टार्टअप: ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अनुरूप।
- क्षेत्र/चरण निरपेक्ष स्टार्टअप: व्यापक नवाचार सहायता (जो किसी विशिष्ट क्षेत्र या चरण तक सीमित न हो)।
- परिचालन तंत्र:
- निवेश सीधे स्टार्टअप में नहीं, बल्कि वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
- AIFs अतिरिक्त पूंजी जुटाते हैं और किश्तों में स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
- निवेश के पश्चात, AIFs स्टार्टअप्स को मेंटरशिप और आवश्यक सहायता प्रदान करते हैं।
- शासन और निगरानी:
- उद्यम पूंजी निवेश समिति (VCIC): यहसमिति AIFs की जांच करती है और उनके चयन की सिफारिश करती है।
- अधिकार प्राप्त समिति (EC): यह योजना के कार्यान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी करती है।
- DPIIT: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग पात्रता, रिपोर्टिंग और संवितरण तंत्र सहित परिचालन दिशा-निर्देश जारी करेगा।
- अतिरिक्त विशेषताएँ
- संस्थागत निवेशकों के साथ सह-निवेश ढांचा
- लंबी अवधि वाले और अत्यधिक पूंजी गहन क्षेत्रों के लिए संचालन में लचीलापन।
- प्रतिफल का 5% तक हिस्सा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विकास (क्षमता निर्माण, मेंटरशिप आदि) के लिए निर्धारित किया गया है।
- निवेश से प्राप्त होने वाला प्रतिफल वापस भारतीय संचित निधि में जमा किया जाता है
- स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड 1.0 (FFS 1.0) पर आधारित: FoF 2.0, वर्ष 2016 में शुरू किए गए FFS 1.0 के उत्कृष्ट प्रदर्शन का अगला चरण है, जिसे फंडिंग के अंतराल को पाटने और घरेलू उद्यम पूंजी को प्रोत्साहित करने के लिए पेश किया गया था।
- ₹10,000 करोड़ की राशि 145 वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) को आवंटित किया गया।
- 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया।
- क्षेत्रवार कवरेज: कृषि, एआई (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमोटिव, क्लीन-टेक, ई-कॉमर्स, फिनटेक, हेल्थकेयर, विनिर्माण, स्पेस-टेक, बायोटेक्नोलॉजी आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार।
- FFS 1.0 ने पहली बार स्टार्टअप शुरू करने वाले संस्थापकों को प्रोत्साहित करने, निजी पूंजी को आकर्षित करने और भारत के उद्यम पूंजी इकोसिस्टम के लिए एक मजबूत नींव तैयार करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
स्टार्टअप इंडियाFoF 2.0का महत्व
- घरेलू पूंजी आधार को सुदृढ़ करना: यह विदेशी उद्यम पूंजी पर निर्भरता को कम करता है और दीर्घकालिक घरेलू निवेश इकोसिस्टम को बढ़ावा देता है।
- डीप टेक और विनिर्माण को बढ़ावा: लंबी समयावधि वाले उच्च-तकनीकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना और आर्थिक एवं तकनीकी संप्रभुता के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों का समर्थन करना।
- प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स को सहायता: यह शुरुआती स्तर की फंडिंग की कमी को दूर करता है और स्टार्टअप्स की विफलता को कम करने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
- समावेशी स्टार्टअप विकास: यह बड़े महानगरों से परे निवेश को प्रोत्साहित करता है और छोटे फंडों तथा क्षेत्रीय नवाचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देता है।
- नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा: विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रौद्योगिकियों और उत्पादों के विकास को बढ़ावा देता है और ‘विकसित भारत @ 2047’ जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है।
- आर्थिक प्रभाव: यह उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजन, विनिर्माण क्षमताओं और आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा देता है।
- इकोसिस्टम का विकास: परामर्श, क्षमता निर्माण और नियामक सहायता को बढ़ावा देता है तथा समग्र स्टार्टअप बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करता है।
