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सामान्य अध्ययन-2: ई-शासन- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और क्षमता।

सामान्य अध्ययन -3: बुनियादी ढाँचा: रेलवे।

संदर्भ: भारतीय रेलवे ने 1,409 मार्ग किलोमीटर (RKM) को कवर करने वाली ₹341 करोड़ की दो ‘कवच’ परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे रेलवे सुरक्षा को बढ़ाने और पूरे नेटवर्क में सिग्नलिंग अवसंरचना के आधुनिकीकरण के प्रयासों में तीव्रता आएगी।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इन परियोजनाओं में अंबाला मंडल में 811 मार्ग किलोमीटर (RKM) के लिए 201 करोड़ रुपये और अहमदाबाद मंडल में 598 मार्ग किलोमीटर (RKM) के लिए 140 करोड़ रुपये की लागत से ‘कवच 4.0’ का कार्यान्वयन शामिल है।
  • ये परियोजनाएं भारतीय रेलवे के शेष मार्गों पर एलटीई-आधारित (LTE-based) संचार बैकबोन के साथ ‘कवच’ उपलब्ध कराने के व्यापक कार्यक्रम के तहत कार्यान्वित की जा रही हैं।
  • ‘कवच’ के विस्तार में ‘हाई-डेंसिटी नेटवर्क’ (HDN) और ‘हाइली यूटिलाइज्ड नेटवर्क’ (HUN) मार्गों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो सामूहिक रूप से रेलवे के अधिकांश यातायात को वहन करते हैं।
  • मार्च 2026 तक की प्रगति:
    • 3,103 मार्ग किलोमीटर (RKM) को ‘कवच’ प्रणाली से लैस किया गया है।
    • 767 स्टेशनों और 4,277 इंजनों में यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है।
    • 8,570 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाई गई है और 1,100 टेलीकॉम टॉवर स्थापित किए गए हैं।

कवच प्रणाली के बारे में

  • कवच क्या है?
    • ‘कवच’ एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (Automatic Train Protection – ATP) प्रणाली है। इसे अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) द्वारा भारतीय उद्योग के सहयोग से विकसित किया गया है।
    • इसे शुरू में ‘ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम’ (TCAS) के रूप में विकसित किया गया था और 2020 में इसे भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय एटीपी (ATP) प्रणाली के रूप में अपनाया गया।
    • ‘कवच 4.0’ को ‘सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4’ (SIL-4) के लिए प्रमाणित किया गया है, जो रेलवे सुरक्षा आश्वासन का उच्चतम स्तर है। यह प्रणाली 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से ट्रेन संचालन में सहायता करती है।
    • मुख्य विशेषताएँ और घटक:
    • खतरे के सिग्नल को पार करने से रोकना (SPAD)
    • टक्कर और गति सीमा का उल्लंघन रोकने के लिए यह स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है।
    • यह गति नियंत्रण करती है और कोहरे या कम दृश्यता की स्थिति में ट्रेन संचालन में लोको पायलट की सहायता करती है।
    • लोको पायलट को उनके कैब के अंदर ही सिग्नल संबंधी जानकारी प्रदान करती है।
      • ट्रैक के साथ आरएफआईडी (RFID) टैग
      • लोकोमोटिव पर लगा उपकरण
      • स्टेशन-आधारित कवच प्रणाली
      • टेलीकॉम टावर और रेडियो संचार
      • ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) नेटवर्क

कवच परिनियोजन का महत्व

  • रेलवे सुरक्षा को बढ़ाना: असुरक्षित स्थितियों में स्वचालित हस्तक्षेप प्रदान करके यह टक्कर, निर्धारित गति सीमा से अधिक गति और सिग्नल के उल्लंघन के जोखिम को कम करता है।
  • मानवीय त्रुटि को कम करना: यह लोको पायलटों की सहायता करके और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर एक ‘फेल-सेफ’ (fail-safe) प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
  • नेटवर्क क्षमता में सुधार: यह कम अंतराल पर सुरक्षित ट्रेन संचालन को सक्षम बनाता है, जिससे लाइन क्षमता बढ़ती है और परिचालन दक्षता  में सुधार होता है।
  • आत्मनिर्भर रेलवे तकनीक को आगे बढ़ाना: स्वदेशी रूप से विकसित एटीपी (ATP) प्रणाली के रूप में, ‘कवच’ रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण का समर्थन करते हुए भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
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