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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: हाल ही में शिक्षा मंत्रालय ने UDISE+ 2025–26 रिपोर्ट जारी की है, जो भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली की एक व्यापक छवि प्रस्तुत करती है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस) स्कूली शिक्षा के लिए भारत का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस है। यह 14.67 लाख स्कूलों, 24.72 करोड़ छात्रों और 1.03 करोड़ शिक्षकों को कवर करता है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े शैक्षिक डेटाबेस में से एक बनाता है।
  • 2025–26 से, शैक्षिक संकेतकों को NEP 2020 द्वारा अनुशंसित 5+3+3+4 प्रणाली (फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी) के अनुसार पुनर्गठित किया गया है, जिसने पुरानी 10+2 रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क का स्थान ले लिया है।
  • यह रिपोर्ट 2022–23 में शुरू की गई ‘स्टूडेंट रजिस्ट्री सिस्टम’ पर आधारित चौथा संस्करण है।

UDISE+ 2025–26 के प्रमुख निष्कर्ष

NEP 2020-अनुरूप शैक्षिक ढांचा

  • यह पहली UDISE+ रिपोर्ट है जो NEP 2020 के 5+3+3+4 ढांचे के तहत शैक्षिक संकेतकों को प्रस्तुत करती है।
  • विभिन्न चरणों में छात्रों का वितरण इस प्रकार है: 22% फाउण्डेशनल (बुनियादी), 25% प्रिपरेटरी (प्रारंभिक), 26% मिडिल (मध्य) और 27% सेकेंडरी (माध्यमिक)।

बेहतर पहुँच और छात्र प्रगति

  • सभी चरणों में सकल नामांकन अनुपात (GER) मजबूत बना हुआ है, जिसमें सेकेंडरी GER 71.7% तक पहुँच गया है, जो सार्वभौमिक स्कूली भागीदारी की दिशा में निरंतर प्रगति का संकेत है।
  • रिपोर्ट में शैक्षणिक चरणों में बेहतर ट्रांजिशन (एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जाने) और भागीदारी दर्ज की गई है, जो स्कूली शिक्षा प्रणाली में छात्रों की बेहतर प्रगति को दर्शाती है।

बेहतर प्रतिधारण और कम ड्रॉपआउट दरें

  • राष्ट्रीय ड्रॉपआउट दरें अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं: 1.8% (प्रिपरेटरी), 3.6% (मिडिल) और 7.0% (सेकेंडरी)।
  • प्रतिधारण दरें फाउण्डेशनल स्तर पर 98.5%, प्रिपरेटरी पर 91.1%, मिडिल पर 83.7% और सेकेंडरी पर 51.9% हैं। ये आँकड़े बेहतर छात्र प्रतिधारण को दर्शाते हैं, लेकिन उच्च कक्षाओं में चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

शिक्षक उपलब्धता को बढ़ावा देना

  • शिक्षकों की संख्या बढ़कर 1.03 करोड़ हो गई है, जो शिक्षण कार्यबल के निरंतर विस्तार को दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) 24 है। चरण-वार PTR फाउण्डेशनल के लिए 10, प्रिपरेटरी के लिए 12, मिडिल के लिए 17 और सेकेंडरी के लिए 21 है, जो NEP द्वारा अनुशंसित स्तरों के भीतर है।

शासन और बुनियादी ढाँचे में सुधार

  • बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच उच्च बनी हुई है: 99.5% स्कूलों में पेयजल, 98.5% में बालिकाओं के शौचालय, 97.2% में बालकों के शौचालय और 95% में बिजली की सुविधा उपलब्ध है।
  • डिजिटल बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता में निरंतर सुधार हो रहा है; 69.9% स्कूलों में कंप्यूटर और 67.4% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है।

शिक्षा में समावेशी भागीदारी

  • कुल नामांकन में लड़कियों की हिस्सेदारी 48.4% है, जो स्कूली शिक्षा में लैंगिक समानता के लगभग करीब है।
  • लैंगिक समानता सूचकांक (GPI) सभी शैक्षिक चरणों में 1 से अधिक है, जो लड़कों की तुलना में लड़कियों की आनुपातिक रूप से उच्च भागीदारी को दर्शाता है।

रिपोर्ट से उभरती मुख्य चिंताएँ

  • सरकारी विद्यालयों में नामांकन में गिरावट: सरकारी विद्यालयों में पिछले कुछ वर्षों में नामांकन में निरंतर गिरावट देखी गई है, जो कई क्षेत्रों में निजी शिक्षा के प्रति बढ़ती प्राथमिकता का संकेत है।
  • माध्यमिक शिक्षा का अंतर: सुधारों के बावजूद, माध्यमिक सकल नामांकन अनुपात (GER) (71.7%), उच्च ड्रॉपआउट दर और निम्न प्रतिधारण स्तर यह इंगित करते हैं कि माध्यमिक स्तर पर सार्वभौमिक भागीदारी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
  • विद्यालयी अवसंरचना में क्षेत्रीय असंतुलन: कई राज्यों में विद्यालयों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के वितरण में असमानताएँ बनी हुई हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुछ क्षेत्रों में संसाधनों का अल्प-उपयोग हो रहा है, जबकि अन्य क्षेत्रों में विद्यार्थियों का घनत्व अधिक है।
  • डिजिटल और समावेशी अवसंरचना की कमी: यद्यपि डिजिटल अवसंरचना में सुधार हुआ है, फिर भी अनेक विद्यालयों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, कंप्यूटर तक पहुँच, दिव्यांग बच्चों (CWSN) के अनुकूल शौचालय और सुगम्यता सुविधाएँ अपर्याप्त बनी हुई हैं।

आगे की राह

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप माध्यमिक स्तर पर प्रतिधारण (retention) और संक्रमण में सुधार के लिए हस्तक्षेपों को सुदृढ़ करना।
  • विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना, सहायक सुविधाओं और समावेशी शिक्षा उपायों का विस्तार करना।
  • संसाधन उपयोग में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए शिक्षक तैनाती और विद्यालय युक्तिकरण को बढ़ाना।
  • लक्षित नीतिगत हस्तक्षेप, साक्ष्य-आधारित योजना और शैक्षिक योजनाओं के कुशल कार्यान्वयन के लिए UDISE+ डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाना।
  • NEP 2020 के तहत परिकल्पित वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक विद्यालयी भागीदारी और माध्यमिक स्तर तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों में तेजी लाना।

Sources :
PIB
DSEL

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