वैज्ञानिकों ने मलेशिया के बोर्नियो जंगल में अति-परजीवी (हाइपरपैरासाइट) की खोज की

संदर्भ:

मलेशियाई वैज्ञानिकों ने बोर्नियो के जंगलों में परजीवी कवक की एक नई प्रजाति, प्ल्यूरोरोकोर्डिसेप्स कोर्नुसिनेमाटा (Pleurocordyceps cornusynnemata) की खोज की है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह खोज यूनिवर्सिटी ऑफ मलेशिया सबाह के ‘इंस्टीट्यूट फॉर ट्रॉपिकल बायोलॉजी एंड कंजर्वेशन’ के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है।
  • यह कवक प्ल्यूरोकोर्डिसेप्स  वंश से संबंधित है और एक विशिष्ट अति-परजीवी (hyperparasite) के रूप में कार्य करता है।
  • प्ल्यूरोकोर्डिसेप्स  कोर्नुसिनेमाटा उन चींटियों को लक्षित करता है जो पहले से ही ओफियोकोर्डिसेप्स, या “ज़ोंबी फंगस” से संक्रमित होती हैं।
  • ओफियोकोर्डिसेप्स संक्रमित कीट के तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है, जिससे उसका व्यवहार अनियमित हो जाता है, यह उसे मार देता है और फिर उसके मृत शरीर से बाहर निकलता है।
  • स्वयं कीट को नियंत्रित करने के बजाय, प्ल्यूरोकोर्डिसेप्स सीधे मेजबान (host) के भीतर पनप रहे ओफियोकोर्डिसेप्स ऊतकों में प्रवेश करता है और उन पर भोजन के रूप में जीवित रहता है, इस प्रकार यह एक विशेष अति-परजीवी की भूमिका निभाता है।

महत्व

  • यह कवक प्ल्यूरोकोर्डिसेप्स  वंश का विश्व का पहला ज्ञात सदस्य है, जो अत्यंत विशिष्ट सींग जैसी संरचना प्रदर्शित करता है और अगली पीढ़ी की रोगाणुरोधी दवाओं एवं कृषि कीट जैविक नियंत्रण की क्षमता प्रदर्शित करता है।

पौधों के कीटों का शिकार करने वाली एफिड ततैयाकी नई प्रजाति की खोज

संदर्भ:

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने स्पिलोमेना मालाबारिका (Spilomena malabarica) नामक एफिड ततैया (aphid wasp) की एक नई प्रजाति की खोज की है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह भारत में दर्ज स्पिलोमेना (Spilomena) वंश की 11वीं प्रजाति है और दुनिया भर में ज्ञात 98वीं प्रजाति है।
  • इस नई प्रजाति की खोज केरल के कोझिकोड जिले में की गई।
  • यह नमूना ऐतिहासिक मालाबार क्षेत्र से एकत्र किया गया था, जिसके नाम पर ही इसका नामकरण (मालाबारिका) किया गया है।

स्पिलोमेना मालाबारिका की मुख्य विशेषताएँ

  • यह लगभग 3.5 मिमी लंबाई वाला एक छोटा कीट है।
  • यह काले और भूरे रंग की एफिड ततैया है।
  • इसके अग्रपंख में एक एकल उप-मार्जिनल कोशिका होती है, जो पंखों की शिराओं की एक दुर्लभ विशेषता है।
  • इसे अपने निकटतम संबंधी, स्पिलोमेना उनस (Spilomena unus) से निम्नलिखित आधारों पर अलग पहचाना जाता है:
    • अदीर्घित (non-elongated) सिर; आँखों और सिर के ऊपरी हिस्से के बीच उचित अनुपातिक दूरी; और अपेक्षाकृत चपटा क्लिपियस (clypeus)।

वैज्ञानिक महत्व

  • स्पिलोमेना मालाबारिका की अनूठी विशेषताएं स्पिलोमेना और अरपैक्टोफिलस (Arpactophilus) वंश के बीच के पारंपरिक वर्गिकी अंतर को कम करता हैं।

कंबल्टिका पात्रा

संदर्भ:

शोधकर्ताओं ने गुजरात के कच्छ बेसिन में एम्बर में संरक्षित जीवाश्म लीफ बीटल (leaf beetle) की एक नई सूक्ष्म प्रजाति की खोज की है, जिसका नाम कंबल्टिका पात्रा रखा गया है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह जीवाश्म मध्य इओसीन कल्प का है, जो लगभग 47.8 से 38 मिलियन वर्ष पुराना है।
  • यह अध्ययन डीएसटी बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज, राजा रमन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और जर्मनी के क्रिश्चियन-अल्ब्रेक्ट्स यूनिवर्सिटी ऑफ कील के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है।

कंबल्टिका पात्रा के बारे में

  • यह भृंग (बीटल) लीफ बीटल परिवार (क्राइसोमेलिडे) से संबंधित है।
  • यह गहरे काले रंग का भृंग मात्र 1.1 मिमी लंबा है।
  • यह इस वंश से पहचानी गई अब तक की केवल दूसरी प्रजाति है।
  • यह नई प्रजाति कंबल्टिका पैलियोइंडिका से भिन्न है, क्योंकि इसमें मेटाटार्सोमियर (metatarsomere) अधिक लंबा और संकरा है, तथा पिछली पिण्डली (hind tibia) पर असामान्य रूप से लंबे कांटों की एक पंक्ति मौजूद है।
  • इसमें आगे के कोनों पर मोटे और पूरी तरह से चिकने पुरोवक्ष (pronotum) होते हैं, साथ ही सरल और सीधे पंजे होते हैं जो आधार पर चौड़े नहीं होते हैं।

आरबसकुलर माइकोराइज़ा (AM) कवक का पहला वैश्विक मानचित्र

संदर्भ:

साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में आरबसकुलर माइकोराइज़ा (AM) कवक का पहला वैश्विक मानचित्र तैयार किया गया है, जो पृथ्वी के भूमिगत कवक नेटवर्क के पैमाने और वितरण को दर्शाता है।

कैसे किया गया?

  • मशीन लर्निंग और 16,000 से अधिक मृदा नमूनों से प्राप्त डेटा का उपयोग किया गया।

प्रमुख निष्कर्ष

  • विश्वभर की ऊपरी मृदा (topsoils) में लगभग 110 क्वाड्रिलियन (110,000 खरब) किलोमीटर के कवक हाइफ़े मौजूद हैं।
  • यह पृथ्वी से सूर्य तक की लगभग 1 अरब यात्राओं के बराबर है।
  • आरबसकुलर माइकोराइज़ा कवक नेटवर्क लगभग 300 मिलियन टन कार्बन का भंडारण करते हैं।
  • यह पूरी मानव जनसंख्या के वजन का 4-6 गुना है।
  • आरबसकुलर माइकोराइज़ा कवक 70% पादप प्रजातियों के साथ सहजीवी संबंध बनाते हैं।
  • ये प्रतिवर्ष अनुमानित 4 बिलियन टन CO₂-समतुल्य कार्बन को पृथक करते हैं, जो मानव-जनित कार्बन उत्सर्जन का लगभग 11% है।

प्रमुख हॉटस्पॉट कहाँ हैं?

  • विश्व के आरबसकुलर माइकोराइज़ा कवक नेटवर्क का लगभग 40% घास के मैदानों में पाया जाता है, जिनमें दक्षिण सूडान, तिब्बती पठार और भारत के बन्नी घास के मैदान शामिल हैं।

खतरे

  • घास के मैदानों को वनों की तुलना में चार गुना तेजी से खेतों में बदला जा रहा है, जिससे ये कवक नेटवर्क खतरे में हैं।

नई प्रजाति वेस्टर्न ट्रिकल फ्रॉग की खोज

संदर्भ:

ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मेंढक की एक नई प्रजाति, ‘वेस्टर्न ट्रिकल फ्रॉग’ (इंगेराना ऑकिडेन्स) की खोज की है।

प्रजाति की खोज कहाँ हुई?

  • यह नई प्रजाति मेघालय की गारो और खासी पहाड़ियों की छतरीनुमा धाराओं में पाई गई।
  • इसका आवास इंगेराना (Ingerana) वंश की किसी भी प्रजाति के लिए ज्ञात सबसे पश्चिमी विस्तार को दर्शाता है।

इसकी पहचान कैसे की गई?

  • ब्रह्मपुत्र नदी के विपरीत किनारों पर पाई जाने वाली मेंढक आबादी के भौतिक लक्षणों और डीएनए की तुलना की गई।
  • विश्लेषण से पता चला कि नदी के उत्तर में पाई जाने वाली इंगेराना बोरेलिस (Ingerana borealis) आबादी और दक्षिणी मेंढकों के डीएनए में 18% का अंतर है।

इंगेराना ऑकिडेन्स के बारे में

  • वयस्क मादाएं लंबाई में लगभग 26 मिलीमीटर तक पहुंचती हैं।
  • इनकी त्वचा अधिकांशतः चिकनी होती है, जिस पर केवल हल्की झुर्रियां होती हैं।
  • इनके शरीर के किनारे पर एक स्पष्ट विपरीत रंग की पट्टी होती है।
  • इनमें कान का पर्दा स्पष्ट रूप से उभरा हुआ होता है, जिसे ‘टिम्पैनम’ कहा जाता है, जिसके ऊपर त्वचा की एक मजबूत परत होती है।
  • यह अपने उत्तरी संबंधी प्रजाति से भिन्न है, जो अधिक झुर्रीदार होती है और जिसके कान के पर्दे लगभग अदृश्य होते हैं।
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