शहीद भगत सिंह की जयंती
संदर्भ: शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती 28 सितंबर 2026 को मनाई गई। इस अवसर पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान तथा उनकी स्थायी क्रांतिकारी और बौद्धिक विरासत का स्मरण किया गया।
शहीद भगत सिंह के बारे में

- जन्म: 28 सितंबर 1907, बंगा गाँव, लायलपुर जिला (अब फैसलाबाद, पाकिस्तान), एक ऐसे परिवार में हुआ जो स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल था।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919) ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध संघर्ष के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को गहराई से प्रभावित किया।
- उन्होंने 1926 में नौजवान भारत सभा की स्थापना की, जिसका उद्देश्य युवाओं को संगठित करना तथा देशभक्ति, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना था।
- वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) से जुड़े थे, जो बाद में हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) बन गया।
- 1928 के साइमन कमीशन विरोध प्रदर्शन के बाद लाला लाजपत राय की मृत्यु के पश्चात, भगत सिंह और उनके सहयोगियों ने जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या कर दी।
- 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दमनकारी कानूनों के विरोध में केंद्रीय विधान सभा में बम फेंके और आत्मसमर्पण कर दिया।
- कारावास के दौरान उन्होंने राजनीतिक कैदियों के साथ बेहतर व्यवहार की मांग को लेकर भूख हड़ताल में भाग लिया।
- लाहौर षड्यंत्र मामले में 23 मार्च 1931 को उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फाँसी दे दी गई।
भगत सिंह की विरासत
- भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि बहुत अधिक पढ़ने वाले, लेखक और विचारक भी थे। समाजवादी और मार्क्सवादी विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने समाजवादी गणराज्य, धर्मनिरपेक्षता, समानता तथा श्रमिकों और किसानों के संगठन की वकालत की।
- उनकी रचनाओं, जिनमें “मैं नास्तिक क्यों हूँ” भी शामिल है, में तर्कवाद, आलोचनात्मक चिंतन और सामाजिक असमानताओं पर प्रश्न उठाने पर उनके जोर को देखा जा सकता है।
- उनका नारा “इंकलाब जिंदाबाद” (क्रांति अमर रहे) स्वतंत्रता संग्राम के साथ गहराई से जुड़ गया।
- इस प्रकार, उनकी विरासत बलिदान, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद, बौद्धिक जिज्ञासा और सामाजिक न्याय की खोज का प्रतिनिधित्व करती है।
इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (SISC)
संदर्भ: इस्पात मंत्रालय ने भारत के इस्पात उद्योग में सुरक्षा मानकों, दुर्घटना रोकथाम और सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शीर्ष-स्तरीय इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (SISC) स्थापित करने का निर्णय लिया है।
इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (SISC) के बारे में
- प्रशासनिक नियंत्रण: इस्पात मंत्रालय।
- अध्यक्ष: इस्पात मंत्रालय के सचिव।
- संरचना: मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, एकीकृत इस्पात उत्पादकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा प्रमुख तकनीकी और वैधानिक संगठनों के प्रतिनिधि।
- प्रमुख भाग लेने वाले संगठनों में खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS), पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) तथा मान्यता प्राप्त इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थान शामिल हैं।
- प्रमुख कार्य:
- इस्पात उद्योग में समग्र सुरक्षा स्थिति का आकलन करना।
- सुरक्षा प्रथाओं में सुधार के लिए अध्ययनों को सुगम बनाना।
- उद्योग सुरक्षा मानकों और अनुशंसित प्रथाओं को अनुमोदित करना।
- गंभीर दुर्घटनाओं, अन्य दुर्घटनाओं और निकट-दुर्घटना (Near-miss) घटनाओं की समीक्षा करना।
- सुरक्षा जागरूकता, श्रमिक प्रशिक्षण और निवारक उपायों को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देश देना।
- इस्पात संयंत्रों में सुरक्षा प्रथाओं में अधिक एकरूपता को बढ़ावा देना।
इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय (SISD) के बारे में
- SISD, SISC को विशेषीकृत तकनीकी और पेशेवर सहायता प्रदान करेगा।
- विशेषज्ञता के क्षेत्र: प्रक्रिया सुरक्षा, ब्लास्ट फर्नेस, इस्पात पिघलाना, रोलिंग मिल, कोक ओवन, रिफ्रैक्टरी प्रणालियाँ, विद्युत एवं यांत्रिक सुरक्षा, व्यावसायिक स्वास्थ्य, अग्नि इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन।
- प्रमुख कार्य:
- SISC के निर्णयों को लागू करना।
- समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट और समीक्षाएँ आयोजित करना।
- दुर्घटनाओं और निकट-दुर्घटना घटनाओं से संबंधित जानकारी का रखरखाव और प्रसार करना।
- गंभीर सुरक्षा घटनाओं की जाँच करना।
- आपातकालीन तैयारी और सुरक्षा प्रशिक्षण की समीक्षा करना।
- भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप इस्पात उद्योग सुरक्षा मानक, अनुशंसित प्रथाएँ और दिशानिर्देश विकसित एवं जारी करना।
भारत का पहला कक्षीय कंप्यूटिंग उपग्रह — MOI-1A
संदर्भ: भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप टेकमी2स्पेस ने MOI-1A को 1 अक्टूबर 2026 को SpaceX के Transporter-18 राइडशेयर मिशन के माध्यम से प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है। कंपनी के अनुसार, यह भारत का पहला कक्षीय कंप्यूटिंग उपग्रह है।
MOI-1A के बारे में

- ग्राहक कंटेनरीकृत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल अपलोड कर सकते हैं, ताकि उपग्रह के कक्षा में रहते हुए उपग्रह डेटा का प्रसंस्करण किया जा सके और संपूर्ण कच्चे डेटा सेट के बजाय विश्लेषित परिणाम भेजे जा सकें।
- टेकमी2स्पेस ने 23 ग्राहक प्राप्त किए हैं, जिनमें भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) कंपनियाँ और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इनके अनुप्रयोगों में कृषि, खनन, आपूर्ति शृंखला और बीमा शामिल हैं।
- 2024 के एक पूर्व प्रौद्योगिकी-प्रदर्शन मिशन ने कक्षा में अनुप्रयोगों को अपलोड करने और AI आधारित निष्कर्षण की क्षमता को प्रमाणित किया था; इसके बाद का MOI-1 उपग्रह प्रक्षेपण यान के तीसरे चरण की विफलता के कारण नष्ट हो गया था।
- कंपनी के अनुसार, वह अधिकांश उपग्रह उप-प्रणालियों का डिजाइन और विनिर्माण भारत में करती है, जबकि चिप, सौर सेल और प्रणोदन प्रणालियाँ बाहरी स्रोतों से प्राप्त करती है।
महत्व
- डेटा-डाउनलिंक की आवश्यकता और पृथ्वी पर उससे संबंधित प्रसंस्करण भार को कम करता है।
- पृथ्वी-अवलोकन डेटा के तेज और अधिक कुशल विश्लेषण को सक्षम बनाता है।
- वाणिज्यिक AI-सक्षम अंतरिक्ष सेवाओं के लिए नए अवसर खोलता है।
- भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र और स्वदेशी उपग्रह क्षमताओं के विकास को समर्थन देता है।
- TakeMe2Space की योजना 2027 से बड़े, नेटवर्क से जुड़े उपग्रहों को विकसित करने की है और वह महत्वपूर्ण डेटा के लिए कक्षीय कोल्ड स्टोरेज की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रही है, जिसमें वित्तीय सेवाओं और रक्षा में संभावित अनुप्रयोग शामिल हैं।
भारत–कज़ाखस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास कज़िंद-2026
संदर्भ: भारतीय सशस्त्र बलों की 60 सदस्यीय टुकड़ी कज़ाखस्तान के ओस्केमेन के लिए रवाना हुई है, जहाँ वह भारत–कज़ाखस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास कज़िंद के नौवें संस्करण में भाग लेगी। यह अभ्यास 28 सितंबर से 11 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है
भारत–कज़ाखस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास कज़िंद के बारे में

- भारतीय टुकड़ी: इसमें मुख्य रूप से गढ़वाल राइफल्स की एक बटालियन के जवानों के साथ अन्य सैन्य शाखाओं एवं सेवाओं तथा भारतीय वायु सेना के कर्मी शामिल हैं। कज़ाख्स्तान की टुकड़ी मुख्य रूप से उसकी थल सेना से ली गई है।उद्देश्य: संयुक्त राष्ट्र के अधिदेश के तहत उप-पारंपरिक वातावरण में आतंकवाद-रोधी अभियानों को संचालित करने के लिए अंतर-संचालनीयता और संयुक्त क्षमता को बढ़ाना।
- परिचालन संबंधी फोकस: अर्ध-शहरी और पर्वतीय भू-भाग, संयुक्त योजना एवं क्रियान्वयन, हवाई गतिशीलता, तथा मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) और काउंटर-UAS क्षमताओं का एकीकृत उपयोग।
- प्रशिक्षण में छापेमारी, खोज एवं विनाश अभियान, घेराबंदी एवं तलाशी अभियान, हेलीपैड एवं लैंडिंग साइटों को सुरक्षित करना तथा विशेष हेलिबोर्न ऑपरेशन शामिल हैं।
- समन्वित योजना एवं क्रियान्वयन के लिए संयुक्त कमान पोस्ट और खुफिया एवं निगरानी केंद्र सहायता प्रदान करेंगे। इसके बाद एक काल्पनिक आतंकवादी खतरे के विरुद्ध व्यापक सत्यापन अभ्यास किया जाएगा।
- यह अभ्यास 2016 में प्रबल दोस्तिक (Prabal Dostyk) के रूप में शुरू हुआ था और बाद में 2018 में इसे उन्नत करके कज़िंद (KAZIND) नाम दिया गया।
महत्व
- भारत–कज़ाख्स्तान सैन्य-से-सैन्य सहयोग को मजबूत करता है।
- विशेष रूप से जटिल भू-भाग में संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए अंतर-संचालनीयता में सुधार करता है।
- परिचालन अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाता है।
- संयुक्त अभियानों में हवाई गतिशीलता, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के उपयोग के लिए तैयारी को बढ़ाता है।
- दोनों देशों के क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के साझा उद्देश्य में योगदान देता है।
