संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन 3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे, इत्यादि.; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।

संदर्भ: हाल ही में, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने लघु जलविद्युत (Small Hydro Power – SHP) विकास योजना के लिए परिचालन दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य देश भर में नई लघु जलविद्युत क्षमता के परिनियोजन में तेजी लाना और स्वच्छ, विकेंद्रीकृत तथा विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • SHP विकास योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2026 में अनुमोदित किया गया था। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 की अवधि के लिए ₹2,584.60 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है।
  • इस योजना का उद्देश्य भारत की पर्याप्त अप्रयुक्त लघु जलविद्युत क्षमता का दोहन करना है, विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरस्थ इलाकों में, जहाँ विश्वसनीय बिजली तक पहुँच एक चुनौती बनी हुई है।
  • हाल ही में जारी दिशानिर्देश योजना के कार्यान्वयन के लिए एक ढांचा तैयार करते हैं। इसमें वित्तीय सहायता, पात्रता की शर्तें, परियोजना विकास सहायता और निगरानी तंत्र शामिल हैं।
  • इस पहल से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो के सुदृढ़ होने की उम्मीद है, साथ ही यह ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास और जलवायु लक्ष्यों में भी योगदान देगा।

लघु जलविद्युत (SHP) विकास योजना

  • यह योजना लक्षित वित्तीय प्रोत्साहनों और नीतिगत सहायता के माध्यम से लघु जलविद्युत परियोजनाओं (1-25 मेगावाट क्षमता) के विकास का समर्थन करती है।
  • इसका उद्देश्य विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करना, दूरस्थ क्षेत्रों में बिजली की पहुँच में सुधार करना और SHP क्षेत्र में निजी व सार्वजनिक क्षेत्र की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • यह योजना भविष्य की परियोजनाओं की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करने और SHP निवेशों की व्यवहार्यता में सुधार करने पर भी केंद्रित है।

दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएँ

  • क्षमता वर्धन लक्ष्य
    • इस योजना का लक्ष्य कार्यान्वयन अवधि के दौरान लगभग 1,500 मेगावाट की नई लघु जलविद्युत क्षमता को जोड़ना है।
  • केन्द्रीय वित्तीय सहायता (CFA)
    • पूर्वोत्तर राज्यों और अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती जिलों में अवस्थित परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) ₹3.6 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 30% (जो भी कम हो) उपलब्ध होगी, जो प्रति परियोजना अधिकतम ₹30 करोड़ तक सीमित है।
    • देश के अन्य हिस्सों में स्थित परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) ₹2.4 करोड़ प्रति मेगावाट या परियोजना लागत का 20% (जो भी कम हो) उपलब्ध होगी, जो प्रति परियोजना अधिकतम ₹20 करोड़ तक सीमित है।
  • भविष्य की परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सहायता:
    • भविष्य की परियोजनाओं की एक दीर्घकालिक पाइपलाइन तैयार करने के लिए, यह योजना कम से कम 200 लघु जलविद्युत परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने हेतु ₹30 करोड़ के समर्पित आवंटन के साथ सहायता प्रदान करती है।
  • पात्र लाभार्थी:
    • केंद्र सरकार के निकाय, राज्य सरकारें, राज्य एजेंसियां, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) और निजी क्षेत्र के डेवलपर्स इस योजना के तहत भाग लेने के लिए पात्र हैं।
  • स्वदेशी विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करना
    •  यह योजना स्वदेशी संयंत्रों और मशीनरी के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षमताओं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को समर्थन मिलता है।
  • निगरानी और कार्यान्वयन ढांचा
    • समयबद्ध कार्यान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए परियोजना अनुमोदन, निधि संवितरण, प्रगति की निगरानी और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए विस्तृत प्रावधान किए गए हैं।

योजना का महत्व

  • अन्वेषित जलविद्युत क्षमता को उपयोग में लाना: यह योजना भारत के विशाल और अप्रयुक्त लघु जलविद्युत संसाधनों के उपयोग में तेजी लाने और देश की नवीकरणीय ऊर्जा बास्केट को सुदृढ़ करने का प्रयास करती है।
  • दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों को बढ़ावा: पूर्वोत्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करके, यह योजना भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में ऊर्जा पहुँच, बुनियादी ढाँचे के विकास और आर्थिक अवसरों में सुधार कर सकती है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों का समर्थन: लघु जलविद्युत स्वच्छ, कम कार्बन उत्सर्जन वाली और चौबीसों घंटे उपलब्ध रहने वाली बिजली प्रदान करती है। यह सौर और पवन ऊर्जा की पूरक है और भारत के गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देती है।
  • निवेश और रोजगार को बढ़ावा: इस योजना से लघु जलविद्युत (SHP) क्षेत्र में लगभग ₹15,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने और निर्माण चरण के दौरान लगभग 51 लाख व्यक्ति-दिवस रोजगारों का सृजन होने की उम्मीद है।
  • ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देना: नवीकरणीय ऊर्जा के एक विश्वसनीय और विकेंद्रीकृत स्रोत के रूप में, SHP ग्रिड लचीलेपन में सुधार कर सकती है, पारेषण घाटे को कम कर सकती है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकती है।

SOURCES
PIB
Times Of India
Static PIB
PIB

Shares: