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सामान्य अध्ययन-3: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कृषि सब्सिडी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित मुद्दे; सार्वजनिक वितरण प्रणाली—उद्देश्य, कार्यप्रणाली, सीमाएँ, पुनर्गठन; बफर स्टॉक और खाद्य सुरक्षा से संबंधित विषय।
संदर्भ: भारत सरकार 14 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत खाद्य सब्सिडी के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC)-आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) शुरू करेगी।
अन्य संबंधित जानकारी
- चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली प्रोग्रामेबल केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा टोकन के माध्यम से खाद्य सब्सिडी वितरण को पूरी तरह से डिजिटल बनाने वाले पहले केंद्र शासित प्रदेश बन जाएंगे।
- यह शुरुआत पुडुचेरी और गुजरात में पहले किए गए पायलट कार्यान्वयनों पर आधारित है।
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC)-आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के बारे में
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा -आधारित DBT मॉडल के तहत, पात्र प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना लाभार्थियों को पारंपरिक बैंक खातों में धनराशि हस्तांतरित करने के बजाय सीधे उनके केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा वॉलेट में खाद्य सब्सिडी प्राप्त होगी।
- इसके बाद सब्सिडी का उपयोग सूचीबद्ध व्यापारियों और उचित दर की दुकानों से खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जा सकेगा।
- पायलट परियोजना के तहत, चिन्हित लाभार्थियों को प्रोग्रामेबल केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा टोकन के रूप में खाद्य सब्सिडी सीधे उनके केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा वॉलेट में जमा की जाएगी।
- इन टोकनों को केवल अधिकृत व्यापारियों और उचित मूल्य की दुकानों (FPS) से पात्र खाद्यान्न खरीदने के लिए ही उपयोगकिया जा सकेगा, जिससे सब्सिडी का उद्देश्य-आधारित उपयोग और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
- टोकनों की उद्देश्य-आधारित प्रकृति यह सुनिश्चित करती है कि सब्सिडी का उपयोग केवल खाद्यान्न खरीदने के लिए किया जाए, जिससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- पायलट परियोजना को पुडुचेरी सरकार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और नामित बैंकिंग भागीदार केनरा बैंक के समन्वय से लागू किया जा रहा है।
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के बारे में
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा का एक रूप है, जिसका विनिमय समान मूल्यवर्ग की नकदी और पारंपरिक बैंक जमा के साथ समान मूल्य पर किया जा सकता है।
- यह फिएट मुद्रा का एक अन्य रूप है, जिसे केंद्रीय बैंक पारंपरिक रूप से जारी करते हैं।
- डिजिटल रुपया या ई-रुपया, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के रूप में जारी भारतीय रुपये का टोकनीकृत डिजिटल रूप है।
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा को व्यापक रूप से दो रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- थोक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (Wholesale CBDC): अंतर-बैंक भुगतानों के लिए उपयोग किया जाता है और वित्तीय संस्थानों के पास रखा जाता है।
- खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (Retail CBDC): आम जनता के लिए अभिप्रेत है।
- खुदरा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा एक ऐसा टोकन है, जो भौतिक नकदी और वाणिज्यिक बैंक मुद्रा के साथ-साथ अस्तित्व में रह सकता है।
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा एक सुरक्षित, त्वरित, ट्रेस करने योग्य और प्रोग्रामेबल डिजिटल नकदी तंत्र प्रदान करके प्रत्यक्ष लाभ अंतरण इकोसिस्टमको बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के बारे में
- प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की घोषणा 26 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी के दौरान देश के गरीब और कमजोर वर्गों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
- 1 जनवरी 2023 से, पहले अत्यधिक रियायती दरों पर दिए जाने वाले खाद्यान्न अब निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 जनवरी 2024 से योजना को 31 दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है, जिसके लिए कुल ₹11.80 लाख करोड़ का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।
- योजना के तहत लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है, जिसमें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार और प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) शामिल हैं।
- अंत्योदय अन्न योजना परिवारों को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलोग्राम खाद्यान्न, जबकि प्राथमिकता वाले परिवार लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम खाद्यान्न दिया जाता है।
- योजना का कार्यान्वयन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों द्वारा लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) के माध्यम से किया जाता है।
इस पहल का महत्व
- पारदर्शिता और जवाबदेही: यह सार्वजनिक धन के पारदर्शी और शुरू से अंत तक ट्रेस किए जा सकने वाले वितरण को सुनिश्चित करती है, साथ ही रिसाव और दुरुपयोग को कम करती है।
- तेज और सुरक्षित वितरण: यह लाभार्थियों को लाभों का तत्काल और सुरक्षित हस्तांतरणसुनिश्चित करेगी तथा सरल वॉलेट-आधारित लेनदेन के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगी।
- रियल-टाइम निगरानी: यह पहल सब्सिडी के उपयोग की जवाबदेही और रियल-टाइम निगरानी को मजबूत करेगी तथा भविष्य की भुगतान प्रणालियों के लिए डिजिटल रुपये की क्षमता को प्रदर्शित करेगी।
- विस्तार की क्षमता: इस पहल को पूरे देश के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC) और एक विस्तार योग्य मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाया जा सकता है।
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना: यह केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा को कल्याणकारी योजनाओं के साथ एकीकृत करने में सहायता करती है तथा प्रौद्योगिकी-आधारित कल्याणकारी सेवा वितरण के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को सुदृढ़ करती है।
