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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: भारत वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु अपने प्रयासों को तेज कर रहा है। इस दिशा में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) के अंतर्गत रोकथाम, समय पर पहचान (शीघ्र निदान) और सभी जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क उपचार सेवाएँ उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP)

- इसे 2018 में शुरू किया गया था ताकि संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप व्यापक रोकथाम, निदान और उपचार सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
- यह कार्यक्रम हेपेटाइटिस A, B, C, D और E को कवर करता है।
- यह कार्यक्रम निवारक, संवर्धनात्मक और उपचारात्मक हस्तक्षेपों को अपनाता है, जिसमें जागरूकता प्रसार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच में सुधार, आवश्यकता वाले सभी लोगों के लिए निदान और उपचार सुनिश्चित करना शामिल है।
- पूरे देश में हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C के मरीजों को निःशुल्क जांच, निःशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाती हैं।
- हेपेटाइटिस A और E की निगरानी एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के माध्यम से की जाती है, जबकि मरीजों का प्रबंधन और निगरानी पेपरलेस NVHCP-MIS पोर्टल के माध्यम से की जाती है।
- इस कार्यक्रम को कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों के साथ एकीकृत किया गया है:
- प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य एवं पोषण (RMNCAH+N) कार्यक्रम→ गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस B के लिए सार्वभौमिक जांच।
- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP)→ सभी नवजात शिशुओं के लिए हेपेटाइटिस B की जन्म खुराक तथा संक्रमित माताओं से जन्म लेने वाले बच्चों के लिए हेपेटाइटिस B इम्युनोग्लोबुलिन (HBIG)।
- राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP)→ उच्च जोखिम वाले समूहों में हेपेटाइटिस B और C की जांच तथा रोकथाम हेतु टीकाकरण।
- राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)→ हेपेटाइटिस निदान के लिए मौजूदा मॉलिक्यूलर परीक्षण सुविधाओं का उपयोग।
- रक्त आधान सेवाएँ (Blood Transfusion Services)→ हेपेटाइटिस B और C से संक्रमित पाए गए रक्तदाताओं को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना।
- यह पहल भारत की उस प्रतिबद्धता का समर्थन करती है जिसके तहत भारत ने संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य के अनुसार वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
हेपेटाइटिस के बारे में
- हेपेटाइटिस यकृत में होने वाली सूजन है, जो हेपेटाइटिस वायरस, अन्य संक्रमणों, विषैले पदार्थों (जैसे शराब और दवाइयाँ) या ऑटोइम्यून रोगों के कारण हो सकती है।
- हेपेटाइटिस के पाँच प्रमुख वायरस होते हैं—हेपेटाइटिस A, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, हेपेटाइटिस D ,हेपेटाइटिस E
- हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C जीर्ण यकृत रोगों, जिनमें सिरोसिस और लिवर कैंसर शामिल हैं, के प्रमुख कारण हैं।
- हेपेटाइटिस A और E:
- मुख्य रूप से खराब स्वच्छता व्यवस्था के कारण दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलते हैं।
- रोकथाम के उपायों में सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता, बेहतर साफ-सफाई व्यवस्था शामिल हैं।
- यह सामान्यतः स्वयं सीमित (Self-limiting) रोग होते हैं और इनका प्रबंधन: पर्याप्त जल सेवन, उचित पोषण जैसी सहायक देखभाल के माध्यम से किया जाता है।
- हेपेटाइटिस B:
- यह मुख्य रूप से संक्रमित माँ से बच्चे में जन्म के समय, संक्रमित रक्त, रक्त उत्पादों, शरीर के तरल पदार्थों के माध्यम से फैलता है।
- इसे सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के माध्यम से रोका जा सकता है, जिसमें जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस B की जन्म खुराक (Birth Dose), इसके बाद 6, 10 और 14 सप्ताह पर अन्य खुराकें दी जाती हैं।
- दीर्घकालिक संक्रमण का प्रबंधन राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार एंटीवायरल दवाओं द्वारा किया जाता है।
- हेपेटाइटिस C:
- यह मुख्य रूप से असुरक्षित इंजेक्शन, चिकित्सा प्रक्रियाओं, सुइयों के साझा उपयोग, संक्रमित रक्त के माध्यम से फैलता है।
- वर्तमान में इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
- डायरेक्ट-एक्टिंग एंटीवायरल (DAA) दवाओं के उपयोग से लगभग सभी मरीजों को 12–24 सप्ताह के भीतर ठीक किया जा सकता है।
- हेपेटाइटिस D:
- यह केवल उन लोगों में होता है जो पहले से हेपेटाइटिस B से संक्रमित होते हैं।
- हेपेटाइटिस B की रोकथाम के लिए किया गया टीकाकरण हेपेटाइटिस D से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
- भारत में संक्रमण की उपस्थिति का स्तर:
- भारत के 2021 एचआईवी सेंटिनल सर्विलांस के अनुसार, जाँचे गए नमूनों में 0.85% हेपेटाइटिस B के लिए पॉजिटिव पाए गए। 0.29% हेपेटाइटिस C के लिए पॉजिटिव पाए गए। यह प्रत्येक 118 व्यक्तियों में 1 व्यक्ति (हेपेटाइटिस B), प्रत्येक 345 व्यक्तियों में 1 व्यक्ति (हेपेटाइटिस C) के बराबर है।
- वैश्विक स्तर पर वर्ष 2024 में लगभग 287 मिलियन लोग चिरकालिक हेपेटाइटिस B या C से पीड़ित थे। इससे लगभग 13 लाख मौतें हुईं। प्रतिवर्ष लगभग 2 मिलियन नए संक्रमण सामने आते हैं।
