संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन से संबंधित विषय; स्वास्थ्य और मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/ सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: नीति आयोग ने “भारत में स्कूली शिक्षा प्रणाली: गुणवत्ता संवर्धन के लिए कालिक विश्लेषण और नीतिगत रूपरेखा” शीर्षक से एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की।

अन्य संबंधित जानकारी

• यह रिपोर्ट एक दशक के दौरान भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली का दीर्घकालिक मूल्यांकन करती है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप एक नीतिगत रोडमैप प्रस्तावित करती है।

• यह रिपोर्ट पहुँच और नामांकन, बुनियादी ढांचा, समता और समावेशन, तथा अधिगम परिणामों (learning outcomes) जैसे प्रमुख मापदंडों के आधार पर स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन का परीक्षण करती है।

• यह रिपोर्ट UDISE+ 2024-25, परख (PARAKH) राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, NAS 2017 और 2021, तथा ASER 2024 के द्वितीयक आंकड़ों पर आधारित है।

• यह रिपोर्ट वर्तमान शिक्षा प्रणाली की स्थिति की समीक्षा करती है, उन चुनौतियों की पहचान करती है जिनका समाधान किया जाना आवश्यक है, और स्कूली शिक्षा के सभी चरणों में सार्वभौमिक पहुँच, सीखने के मानकों को ऊपर उठाने और समता सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप एवं एक कार्यान्वयन रूपरेखा की सिफारिश करती है।

भारत में स्कूली शिक्षा की वर्तमान स्थिति 

पैमाना और पहुँच

• आज भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली का विस्तार 14.71 लाख स्कूलों तक है, जो 24.69 करोड़ से अधिक छात्रों को अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही है। इस प्रकार यह विश्व की सबसे बड़ी शिक्षा प्रणाली है।

• प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) उच्च (90.9%) बना हुआ है, लेकिन माध्यमिक  स्तर पर 78.7% और उच्च माध्यमिक स्तर पर भागीदारी घटकर 58.4% रह जाती है।

अवसंरचना में सुधार

• बुनियादी ढांचे में सुधार: स्कूलों के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किए गए हैं:

  • 97% से अधिक स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध है।
  • 96% से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था है।
  • सरकारी स्कूलों में बिजली की पहुंच में व्यापक सुधार हुआ है।

• पिछले एक दशक में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) बुनियादी ढांचे, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में भी सुधार हुआ है, हालांकि क्षेत्रीय असमानताएं अभी भी बनी हुई हैं।

समता और समावेशन

• लिंग समानता सूचकांक (GPI): शिक्षा के अधिकांश चरणों में ‘लिंग समानता सूचकांक’ में सुधार हुआ है, जो स्कूली शिक्षा में लड़कियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

• समावेशी नामांकन: अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नामांकन में निरंतर वृद्धि हुई है, विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर।

सरकारी बनाम निजी स्कूलिंग प्रवृत्ति 

• रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों में नामांकन में क्रमिक गिरावट और कई राज्यों में निजी संस्थानों के प्रति बढ़ती प्राथमिकता को रेखांकित किया गया है।

• सरकारी स्कूलों में नामांकन वर्ष 2005 के लगभग 71% से घटकर 2024-25 में तकरीबन 49% रह गया है।

अधिगम परिणामों में कमी 

• पहुंच और बुनियादी ढांचे में प्रगति के बावजूद, अधिगम परिणाम  एक बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं:

  • ASER 2024 के अनुसार, कक्षा 3 के केवल 27% छात्र ही कक्षा 2 के स्तर का पाठ (text) पढ़ सकते थे।
  • कक्षा 5 के केवल 31% छात्र ही ‘भाग’ के बुनियादी सवाल हल कर सके।
  • कई राज्यों में गणित और उच्च-स्तरीय तर्क क्षमता में बच्चों का प्रदर्शन विशेष रूप से कम हुआ है।

रिपोर्ट की मुख्य सिफारिशें 

A. प्रणालीगत सिफारिशें 

1. स्कूली प्रणाली में सुधार और संरचनात्मक निरंतरता सुनिश्चित करना: एकीकृत/संयुक्त स्कूलों का विस्तार और विभिन्न चरणों के बीच निर्बाध संक्रमण सुनिश्चित करना।

2. स्कूली बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करना: कक्षाओं, बिजली, आईसीटी (ICT), प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और समावेशी सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना।

3. शासन में सुधार और प्रशासनिक क्षमता में वृद्धि: डेटा-संचालित शासन, संस्थागत नेतृत्व और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देना।

4. स्कूली गुणवत्ता पर राज्य और जिला टास्क फोर्स के माध्यम से “संपूर्ण-समाज” दृष्टिकोण को संस्थागत बनाना: बहु-हितधारक समन्वय और विकेंद्रीकृत सुधार निगरानी सुनिश्चित करना।

5. स्कूल प्रबंधन समितियों (SMCs/SDMCs) को सशक्त बनाना और ‘बॉटम-अप’ योजना को संस्थागत बनाना: सामुदायिक भागीदारी, विकेंद्रीकृत योजना और स्थानीय जवाबदेही को बढ़ावा देना।

6. शिक्षक तैनाती, व्यावसायिक क्षमता और करियर प्रगति को उन्नत करना: शिक्षकों की तर्कसंगत तैनाती, निरंतर प्रशिक्षण और योग्यता-आधारित पदोन्नति सुनिश्चित करना।

7. समावेशी शिक्षा के लिए डिजिटल और ब्रॉडकास्ट-आधारित शिक्षण का सुदृढ़ीकरण और विस्तार: डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, कनेक्टिविटी और प्रसारण शिक्षा का विस्तार करना।

8. समानता और समावेश को बढ़ावा देना: वंचित समूहों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करना और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना।

A. शैक्षणिक सिफारिशें

1. शिक्षणशास्त्र, मूल्यांकन और आधारभूत शिक्षा में सुधार: प्रतिस्पर्धा-आधारित शिक्षण), आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) को सुदृढ़ करना तथा मूल्यांकन सुधार।

2. समग्र शिक्षा और छात्र कल्याण को बढ़ावा देना: मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक-भावात्मक शिक्षण, कला, खेल और जीवन कौशल पर ध्यान केंद्रित करना।

3. स्कूली शिक्षा में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल एकीकरण को सुदृढ़ करना: व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा में लाना और उद्योग-संबद्ध कौशल विकास सुनिश्चित करना।

4. प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) को सुदृढ़ करना: आंगनवाड़ी-स्कूल एकीकरण और बेहतर ‘स्कूल रेडीनेस’ कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।

5. शिक्षण नवाचार और प्रणालीगत तैयारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का एकीकरण: AI-सक्षम व्यक्तिगत शिक्षण और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों का विकास।

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