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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; समावेशी विकास और इससे संबंधित विषय।
संदर्भ: भारत का सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन, निर्यात और समावेशी विकास के सबसे सुदृढ़ स्तंभों में से एक के रूप में उभरा है, जिसमें सरकार औपचारिकीकरण, ऋण सहायता और डिजिटल एकीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
MSMEs के बारे में

- MSMEs को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम, 2006 के तहत शासित किया जाता है।
- MSME का वर्गीकरण संयंत्र, मशीनरी या उपकरणों में निवेश (भूमि और भवन को छोड़कर) की लागत और वार्षिक टर्नओवर पर आधारित है।
- संशोधित वर्गीकरण ढांचे को उद्यम पंजीकरण प्रणाली के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

MSMEsकी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
- व्यापक औपचारिकीकरण अभियान: उद्यम पोर्टल के तहत लगभग 4.72 करोड़ उद्यम पंजीकृत हुए हैं।
- उद्यम सहायक प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 3.21 करोड़ अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को शामिल किया गया है।
- जुलाई 2021 से MSME दिशानिर्देशों के तहत खुदरा और थोक व्यापारियों को शामिल करने से औपचारिक कवरेज का विस्तार हुआ है।
- बेहतर ऋण सहायता: केंद्रीय बजट 2025-26 के तहत क्रेडिट गारंटी योजना की सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी गई है।
- ट्रांसजेंडर उद्यमियों के लिए 85% तक की बढ़ी हुई गारंटी कवरेज के साथ विशेष प्रावधान पेश किए गए हैं।
- ECLGS (आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना) ने ₹3.61 लाख करोड़ मूल्य की गारंटी जारी की है, जिससे 1.19 करोड़ ऋणकर्ता लाभान्वित हुए हैं।
- इक्विटी और उद्यमिता को बढ़ावा देना: आत्मनिर्भर भारत (SRI) कोष ने ₹15,442 करोड़ के निवेश के साथ 682 MSMEs को सहायता प्रदान की है।
- PMEGP (प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम) ने 5.8 लाख से अधिक परियोजनाओं का समर्थन किया और लगभग 36.3 लाख रोजगार के अवसरों का सृजन किया।
- पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 30 लाख से अधिक शिल्पकारों ने पंजीकरण कराया और लगभग ₹5,050 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए गए।
- डिजिटलीकरण और त्वरित भुगतान: GeM, TReDS, समाधान, MSME चैंपियंस पोर्टल और पीएम विश्वकर्मा पोर्टल जैसे प्लेटफार्मों ने बाजार पहुंच और पारदर्शिता में सुधार किया है।
- विलंबित भुगतान निगरानी तंत्र के माध्यम से MSMEs को ₹1.65 लाख करोड़ की बकाया राशि का भुगतान किया गया।
- विलंबित भुगतान के मामलों के डिजिटल समाधान के लिए जून 2025 में ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल लॉन्च किया गया।

MSMEsका महत्व
- रोजगार सृजन: MSME क्षेत्र कृषि के बाद रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है और यह लगभग 32.8 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान करता है, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में।
- संतुलित क्षेत्रीय विकास: शहरी केंद्रों में केंद्रित बड़े उद्योगों के विपरीत, MSME विकेंद्रीकृत औद्योगीकरण को बढ़ावा देते हैं और गांवों तथा छोटे शहरों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करके क्षेत्रीय असमानताओं को कम करते हैं।
- निर्यात प्रोत्साहन और विनिर्माण विकास: भारत के कुल निर्यात में MSMEs का योगदान लगभग आधा है और विनिर्माण उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 35.4% है, जो घरेलू उत्पादन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करती है।
- उद्यमिता और समावेशी विकास: MSME क्षेत्र स्वरोजगार, पारंपरिक शिल्पकारों, पहली पीढ़ी के उद्यमियों और स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को सहायता प्रदान करता है, जिससे समावेशी और जमीनी स्तर के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
चुनौतियाँ
- वहनीय ऋण तक सीमित पहुँच: कई MSMEs, विशेष रूप से अनौपचारिक और ग्रामीण उद्यमों को अभी भी समय पर संस्थागत वित्त और कार्यशील पूंजी सहायता प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
- विलंबित भुगतान: MSMED अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी सुरक्षा उपायों के बावजूद, खरीदारों और संस्थानों से होने वाले विलंबित भुगतान MSMEs के नकदी प्रवाह और परिचालन स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं।
- उच्च अनौपचारिकता: बड़ी संख्या में सूक्ष्म उद्यम उचित पंजीकरण, दस्तावेज़ीकरण और वित्तीय रिकॉर्ड के बिना औपचारिक अर्थव्यवस्था से बाहर काम करते हैं।
- तकनीकी और बाजार संबंधी बाधाएँ: कई MSMEs को कम डिजिटल अंगीकरण, कमजोर बाजार संबंधों, अपर्याप्त तकनीकी उन्नयन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सीमित एकीकरण जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
आगे की राह
- ऋण और इक्विटी सहायता को सुदृढ़ करना: संपार्श्विक-मुक्त ऋण का विस्तार करना, जोखिम पूंजी की उपलब्धता में सुधार करना और ग्रामीण तथा पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए वित्तीय समावेशन को गहरा करना।
- औपचारिकीकरण और डिजिटल एकीकरण में तेजी लाना: अनौपचारिक उद्यमों को औपचारिक आपूर्ति श्रृंखलाओं और डिजिटल बाजारों में एकीकृत करने के लिए उद्यम (Udyam), UAP, GeM और TReDS प्लेटफार्मों को और अधिक बढ़ावा देना।
- समय पर भुगतान और कानूनी प्रवर्तन सुनिश्चित करना: भुगतान में देरी को कम करने और MSME की तरलता को मजबूत करने के लिए ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों’ (MSE Facilitation Councils) और ‘ऑनलाइन विवाद समाधान’ (ODR) तंत्र की दक्षता में सुधार करना।
- कौशल विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना: MSMEs को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और लचीला बनाने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने, कौशल उन्नयन, निर्यात प्रोत्साहन और नवाचार सहायता को प्रोत्साहित करना।
