संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन 3: आर्थिक विकास- कृषि उपज का भंडारण, परिवहन और  विपणन तथा इससे समबन्धित विषय और बाधाएँ ; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी।

संदर्भ: राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) का शुभारंभ अप्रैल 2016 में किया गया था। यह एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच है। यह कृषि मंडियों को एक एकीकृत डिजिटल बाजार में संयोजित करता है, जिससे निर्बाध ऑनलाइन व्यापार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और किसानों एवं व्यापारियों के लिए व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित होती है। यह कृषि विपणन में “एक राष्ट्र, एक बाजार” के विजन को प्राप्त करने की दिशा में एक प्रमुख कदम है।

e-NAM की मुख्य उपलब्धियाँ

  • e-NAM कृषि विपणन में एक प्रमुख डिजिटल सुधार के रूप में उभरा है, जिसने अखिल भारतीय स्तर पर बाजार एकीकरण को सुदृढ़ किया है और व्यापार में पारदर्शिता में सुधार किया है।
    • इसकी उपलब्धियां कृषि बाजारों के व्यापक विस्तार और गहन संरचनात्मक परिवर्तन, दोनों को प्रतिबिंबित करती हैं।
  • 23 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 1,656 मंडियों को सफलतापूर्वक इस प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है, जो इसके व्यापक भौगोलिक विस्तार और डिजिटल व्यापार प्रणालियों के बढ़ते अंगीकरण को दर्शाता है।
  • इस प्लेटफॉर्म ने एक सुदृढ़ हितधारक इकोसिस्टम का निर्माण किया है, जिसमें 80 करोड़ से अधिक किसान, 2.73 लाख व्यापारी और 4,724 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) पंजीकृत हैं, जो कृषि बाजारों में प्रमुख हितधारकों की बड़े पैमाने पर भागीदारी को प्रदर्शित करता है।
  • व्यापार प्रदर्शन के संदर्भ में, e-NAM ने लगभग 25 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उपज के संचयी लेनदेन को सक्षम बनाया है, जिसका मूल्य लगभग ₹4.84 लाख करोड़ (2016-2026) है, जो राष्ट्रीय कृषि वाणिज्य में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
  • इस मंच ने व्यापारिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि प्रदर्शित की है, जहाँ व्यापार मूल्य वर्ष 2024 के ₹3.19 लाख करोड़ से उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 2026 में ₹4.84 लाख करोड़ हो गया है। यह हितधारकों के बीच बढ़ते विश्वास और बाजार में गहन जुड़ाव को रेखांकित करता है।
  • परिचालन संबंधी गतिविधियां सुदृढ़ बनी हुई हैं, जिसमें हाल की अवधि में 76 लाख मीट्रिक टन से अधिक उपज का व्यापार हुआ है, जो मंडियों में निरंतर उपयोग और बढ़ती डिजिटल भागीदारी का संकेत देता है।
  • e-NAM मोबाइल एप्लिकेशन 247 कृषि जिंसों के लिए रियल टाइम में मूल्य संबंधी जानकारी प्रदान करता है, जिससे किसान बाजार संकेतों तक पहुंच बनाने और बेहतर मूल्य प्राप्ति में सक्षम होते हैं
  • इसके अतिरिक्त, सरकार ने प्रति मंडी ₹75 लाख तक की वित्तीय सहायता प्रदान करके बुनियादी ढाँचे के विकास का समर्थन किया है, जिससे e-NAM इकोसिस्टम में मंडियों के डिजिटल और भौतिक एकीकरण को मजबूती मिली है।

e-NAM के उद्देश्य:

  • मंडियों के डिजिटल एकीकरण के माध्यम से कृषि जिंसों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाना।
  • प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन बोली के माध्यम से पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना।
  • स्थानीय मंडियों से परे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और व्यापारियों के लिए बाजार पहुंच बढ़ाना।
  • कृषि व्यापार में मध्यस्थों और लेनदेन संबंधी अक्षमताओं को कम करना।
  • कृषि विपणन में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
  • कटाई के उपरांत मूल्य प्राप्ति में सुधार करना और संकटपूर्ण बिक्री को कम करना।

e-NAM की मुख्य विशेषताएँ

  • सिंगल विंडो सर्विस: यह संपूर्ण भारत की APMC मंडियों को जोड़ता है और कृषि जिंसों के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार विकसित करता है; जींसों का आगमन, गुणवत्ता परीक्षण, बोली लगाना और भुगतान, सब कुछ एक ही मंच पर उपलब्ध है।
  • विशिष्ट लॉट आईडी (Unique Lot ID) ट्रैकिंग: मोबाइल के माध्यम से गेट एंट्री से लेकर अंतिम बिक्री तक प्रत्येक लॉट की ट्रैकिंग की जाती है।
  • लाइव मूल्य डैशबोर्ड: वास्तविक समय में जिंसों की कीमतें, मंडी में आवक और व्यापार की मात्रा सार्वजनिक रूप से सुलभ है।
  • अंतर-राज्यीय व्यापार सुविधा: राज्य एकीकृत लाइसेंस व्यापारियों को राज्य की सीमाओं के पार बोली लगाने में सक्षम बनाता है।
  • भुगतान एकीकरण: यह मंच NEFT, RTGS, इंटरनेट बैंकिंग और UPI सहित कई डिजिटल भुगतान मोड को एकीकृत करता है, जिससे इसे विभिन्न राज्यों में अनुकूलित किया जा सकता है।
  • पारदर्शिता: विशिष्ट लॉट आईडी ट्रैकिंग प्रणाली आगमन से लेकर बिक्री तक पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।
  • बहुभाषी मोबाइल एप्लिकेशन: किसानों के लिए व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने हेतु 12-भाषीय इंटरफेस (हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, तेलुगु, बंगाली, तमिल, ओडिया और अन्य)।
  • e-NAM के विकास में एक प्रमुख प्रगति 14 जुलाई 2022 को ‘प्लेटफॉर्म ऑफ प्लेटफॉर्म्स’ (PoP) की शुरुआत थी, जो e-NAM मोबाइल एप्लिकेशन पर एक एकीकृत डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को संयोजित करता है।
    • यह किसानों और हितधारकों को संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला में विभिन्न सेवाओं तक पहुँचने में सक्षम बनाता है, जिसमें रसद (लॉजिस्टिक्स), भंडारण, गुणवत्ता आश्वासन, श्रेणीकरण (ग्रेडिंग) और पैकेजिंग, कृषि-निवेश, वित्तीय और बीमा सेवाएं, तथा मौसम संबंधी जानकारी और फसल पूर्वानुमान जैसी परामर्श सहायता सम्मिलित है।
  • इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रिसीट्स (e-NWR) प्रणाली को e-NAM के साथ एकीकृत किया गया है ताकि अधिक निर्बाध और कुशल कृषि व्यापार को सक्षम बनाया जा सके।

e-NAM के लाभ

चुनौतियाँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों में असमान डिजिटल बुनियादी ढाँचा और इंटरनेट कनेक्टिविटी।
  • लघु और सीमांत किसानों के बीच सीमित डिजिटल साक्षरता।
  • कुछ APMC मंडियों और राज्यों द्वारा एकीकरण और इसे अपनाने की धीमी गति।
  • गुणवत्ता श्रेणीकरण और परीक्षण बुनियादी ढाँचे के मानकीकरण का अभाव।
  • पारंपरिक बाजार मध्यस्थों (आढ़तियों) की ओर से प्रतिरोध।
  • अंतर-राज्यीय कृषि परिवहन में रसद संबंधी बाधाएं।
  • ‘प्लेटफॉर्म ऑफ प्लेटफॉर्म्स’ (PoP) और ई-एनडब्ल्यूआर (e-NWR) लिंकेज जैसी उन्नत विशेषताओं के बारे में सीमित जागरूकता।

आगे की राह

  • इंटरनेट कनेक्टिविटी में सुधार, श्रेणीकरण (ग्रेडिंग) सुविधाओं के मानकीकरण और e-NAM के निर्बाध एकीकरण हेतु विभिन्न राज्यों में बेहतर APMC सुधारों को सुनिश्चित करके ग्रामीण डिजिटल और भौतिक बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना।
  • लक्षित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के बीच डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना, ताकि लघु और सीमांत किसान ऑनलाइन कृषि बाजारों में प्रभावी ढंग से भागीदारी कर सकें।
  • बाजार पहुंच और बैकएंड सहायता प्रणालियों में सुधार के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाकर तथा निजी रसद एवं फिनटेक कंपनियों के साथ सहयोग करके सामूहिक भागीदारी और साझेदारी को बढ़ाना।
  • निर्बाध अंतर-राज्यीय व्यापार के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय।
  • ई-एनडब्ल्यूआर (e-NWR) आधारित व्यापार और संपार्श्विक वित्तपोषण के प्रति व्यापक जागरूकता।
  • एआई (AI) आधारित मूल्य पूर्वानुमान और बाजार आसूचना उपकरणों का एकीकरण।
निष्कर्ष

राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) खंडित मंडी-आधारित व्यापार से डिजिटल रूप से एकीकृत राष्ट्रीय बाजार की ओर संक्रमण करके भारत की कृषि विपणन प्रणाली में एक संरचनात्मक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। यद्यपि इसके अंगीकरण और बुनियादी ढाँचे में चुनौतियाँ बनी हुई हैं, किंतु बाजारों, भंडारण, वित्त और रसद (लॉजिस्टिक्स) को जोड़ने वाला इसका विस्तृत होता इकोसिस्टम इसे भारत में कुशल, पारदर्शी और किसान-केंद्रित कृषि परिवर्तन करने वाले एक प्रमुख उपकरण के रूप में स्थापित करता है।

Source:
PIB
Research Gate

Shares: