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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय; समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।
संदर्भ: हाल ही में, नीति आयोग ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अगले चरण के मार्गदर्शन के लिए DPI@2047 रोडमैप लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य समावेशी, गैर-रैखिक और उत्पादकता-आधारित विकास सुनिश्चित करना है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- नीति आयोग के अंतर्गत ‘नीति फ्रंटियर टेक हब’ द्वारा ‘DPI@2047: द रोडमैप टू प्रॉस्पेरिटी’ नामक रिपोर्ट जारी की गई।
- यह रोडमैप DPI के तीन चरणीय विकास (1.0, 2.0, 3.0) को प्रस्तुत करता है, जो आधारभूत डिजिटल समावेशन से शुरू होकर उत्पादकता-प्रेरित और नवाचार-आधारित विकास की ओर अग्रसर है।
- यह दस्तावेज़ आर्थिक अवसरों के विस्तार हेतु आधार और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) की सफलताओं पर आधारित है।
- रोडमैप का लक्ष्य सामूहिक आजीविका सशक्तिकरण, मानव क्षमता विकास और प्रणालीगत डिजिटल परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रति व्यक्ति $18,000 आय को लक्षित करना है।
- इस रोडमैप को एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉयट के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है, जो एक सहयोगात्मक और इकोसिस्टम-संचालित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) 2.0 के बारे में
- DPI 2.0 (2025–2035) को भारत को आधारभूत समावेशन से आगे ले जाकर आजीविका-केंद्रित और उत्पादकता-प्रेरित विकास की ओर अग्रसर करने के लिए तैयार किया गया है। यह DPI 3.0 (2035–2047) के लिए आधार तैयार करेगा, जिसका लक्ष्य व्यापक समृद्धि और उच्च-मूल्य वाले आर्थिक विस्तार को प्राप्त करना है।
- यह पहचान और भुगतान जैसे शुरुआती क्षेत्रों से हटकर, सामूहिक आजीविका सशक्तिकरण, नवाचार के प्रसार और बड़े पैमाने पर आर्थिक भागीदारी की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।
- यह रोडमैप 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और $18,000 की प्रति व्यक्ति आय प्राप्त करने की परिकल्पना करता है, जो DPI-आधारित परिवर्तन द्वारा समर्थित होगा।
- DPI 2.0 समाज के सभी वर्गों के लिए ज्ञान, बाजार और अवसरों के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), विश्वसनीय डेटा प्रणाली और अंतर-संचालनीय डिजिटल बुनियादी ढांचे को एकीकृत करता है।
कार्यान्वयन रोडमैप (DPI 2.0 & 3.0)

- DPI@2047 रोडमैप दो-चरणीय रणनीति का प्रस्ताव करता है:
- DPI 2.0 (2025–2035): आजीविका-केंद्रित और उत्पादकता-प्रेरित विकास पर ध्यान केंद्रित करना।
- DPI 3.0 (2035–2047): व्यापक समृद्धि और उच्च-आय वाले समाज के लक्ष्य को प्राप्त करना।
- DPI 2.0 के लिए, यह रोडमैप आठ क्षेत्रीय परिवर्तनों की पहचान करता है और कार्यान्वयन के लिए चार निष्पादन स्तंभों को रेखांकित करता है:
- जिला-स्तरीय मांग एकत्रीकरण: इसके अंतर्गत DPI पहलों को जिला-स्तरीय विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि अति-स्थानीय स्तर पर इसे अपनाना सुनिश्चित किया जा सके और डिजिटल समाधानों के लिए मांग उत्पन्न की जा सके।
- प्रौद्योगिकी उद्यमिता का विस्तार: इनक्यूबेटरों, एक्सलेटरों, मिशन-आधारित अनुसंधान एवं विकास (R&D) और सहायक नीतिगत ढांचों के माध्यम से भारत के नवाचार आधार का विस्तार करना, ताकि एक वितरित नवाचार इकोसिस्टम का निर्माण किया जा सके।
- एआई (AI) की गतिशीलता का लाभ उठाना: संरचनात्मक चुनौतियों के समाधान के लिए एआई को एक प्रमुख उत्पादकता इंजन के रूप में उपयोग करना और नागरिकों एवं उद्यमों, दोनों के लिए इसकी सुलभता सुनिश्चित करना।
- पार-क्षेत्रीय रणनीतिक समाधान: इसमें अंतर्दृष्टि और विश्वास-आधारित प्रणालियों के लिए डेटा का उपयोग करना, डिजिटल और भाषाई बाधाओं को दूर करने के लिए एआई का लोकतंत्रीकरण करना, मानव क्षमता एवं ज्ञान तक पहुंच बढ़ाना और मुक्त नेटवर्क के माध्यम से डिजिटल लेनदेन का विस्तार करना शामिल है।
DPI 2.0 के अंतर्गत प्रमुख क्षेत्रीय परिवर्तन
- व्यापक स्तर पर समावेशन (आजीविका विस्तार):
- MSME बाज़ार विस्तार: छोटे उद्यमों के विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए बाज़ार संबंधी जानकारी तक पहुँच सुनिश्चित करना, बाज़ार संपर्कों में सुधार करना और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
- स्थानीय रोजगार मिलान: MSMEs को डिजिटल रूप से दृश्यमान बनाना ताकि उन्हें स्थानीय प्रतिभाओं से जोड़ा जा सके, जिससे रोजगार प्राप्ति को कम लागत और उच्च-विश्वास वाले लेनदेन में बदला जा सके।
- लघु सीमांत किसान सशक्तिकरण: किसानों की आय और लचीलेपन में सुधार के लिए उन्हें परामर्श सेवाएँ, ऋण सुविधा और बेहतर बाज़ार संपर्क प्रदान करना।
- मानव क्षमता के आधार:
- शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षा इकोसिस्टम: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप सुरक्षित, समावेशी और डिजिटल शिक्षण स्थान बनाना, जिससे स्थानीय भाषाओं में सामग्री की न्यायसंगत पहुँच और निरंतर सीखने के मार्ग सुनिश्चित हों।
- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC): ऐसी प्रणालियों का निर्माण करना जहाँ स्वास्थ्य संकट परिवारों को गरीबी में न धकेले, और वित्तीय स्थिति की परवाह किए बिना स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच सुनिश्चित हो।
- प्रणालीगत सक्षमकर्ता:
- एक अरब भारतीयों के लिए ऋण की पहुँच: बड़े पैमाने पर माइक्रो क्रेडिट की पहुँच का विस्तार करने के लिए मुद्रीकरण योग्य संपत्तियों और डिजिटल प्रणालियों का लाभ उठाना।
- विकेंद्रीकृत ऊर्जा बाज़ार: बढ़ती और अधूरी माँग को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के कुशल उपयोग को सक्षम बनाना।
- लाभ वितरण प्रणाली: यह सुनिश्चित करना कि कल्याणकारी लाभ सभी पात्र नागरिकों तक समयबद्ध, पारदर्शी और समावेशी तरीके से पहुँचें।
DPI 1.0 की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
- भारत के DPI 1.0 ने बड़े पैमाने पर समावेशन और डिजिटल शासन की नींव रखी, जिससे सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों के तीव्र विस्तार को गति मिली:
- आधार: 1.3 बिलियन से अधिक लोग इसके दायरे में हैं, जिससे प्रतिदिन 80-90 मिलियन प्रमाणीकरण संभव हो रहे हैं।
- UPI: यह प्रतिदिन करोड़ों लेनदेन का प्रबंधन करता है और विश्व का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान प्लेटफॉर्म बन गया है।
- इसने मुक्त और अंतर संचालनीय डिजिटल प्रणालियों की शक्ति का प्रदर्शन किया है। वर्तमान में यह GDP में लगभग 1% का योगदान दे रहा है, जिसके 2030 तक 4% तक पहुँचने का अनुमान है।
- महत्व:
- जनसंख्या के स्तर पर डिजिटल पहचान, भुगतान और वित्तीय समावेशन की शुरुआत की।
- उत्पादक क्षेत्रों में DPI 2.0 के विस्तार के लिए आधार तैयार किया।
आगे की राह / कार्रवाई का आह्वान
- प्रासंगिक और विस्तार योग्य समाधान सुनिश्चित करने के लिए राज्य-आधारित, विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन मॉडल।
- पुनरावृत्ति-आधारित 2-वर्षीय परिवर्तन चक्र, जो प्रयोग करने, सीखने और सफल मॉडलों के विस्तार की अनुमति देते हैं।
- 2026-27 में प्रारंभिक ध्यान MSMEs और कृषि पर होगा, जिसमें चुनिंदा राज्यों में ‘लाइटहाउस पायलट’ प्रोजेक्ट्स के बाद व्यापक कार्यान्वयन किया जाएगा।
- DPI की मांग के अनुरूप एक सुदृढ़ उद्यमी इकोसिस्टम का निर्माण करना।
- सार्वजनिक भलाई के लिए DPI और AI के क्षेत्र में भारत को एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने हेतु एक वैश्विक DPI सहयोग मंच की स्थापना करना।
