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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

संदर्भ: एंथ्रोपिक  ने अपनी साइबर सुरक्षा पहल, ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ (Project Glasswing) का विस्तार भारत तक कर दिया है, जिसके तहत चुनिंदा सरकारी एजेंसियों और संगठनों को अपनी साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए उसके उन्नत AI मॉडल, ‘क्लाउड मायथोस प्रीव्यू’ (Claude Mythos Preview) तक पहुँच प्रदान की जा रही है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें एंथ्रोपिक के ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ की वैश्विक विस्तार योजना में शामिल किया गया है। इसमें 15 से अधिक देशों के संगठनों को कवर किया गया है।
  • अप्रैल 2026 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें शुरुआती लगभग 50 भागीदारों से बढ़कर अब विश्व स्तर पर लगभग 150 संगठन शामिल होंगे।
  • विस्तारित नेटवर्क में बिजली, जल, स्वास्थ्य सेवा, संचार और हार्डवेयर जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के संचालक शामिल हैं।
  • हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सरकारी एजेंसियां और साइबर सुरक्षा पर केंद्रित संगठन उन संस्थाओं में शामिल हैं जिन्हें इस कार्यक्रम तक पहुँच प्राप्त होने की उम्मीद है।
  • एंथ्रोपिक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनी है जिसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को, कैलिफ़ोर्निया में है।
    • 2021 में पूर्व ओपन एआई के शोधकर्ताओं द्वारा स्थापित यह कंपनी क्लाउड एआई परिवार के लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLMs) की डेवलपर है।

प्रोजेक्ट ग्लासविंग के बारे में

  • प्रोजेक्ट ग्लासविंग एंथ्रोपिक की एक वैश्विक साइबर सुरक्षा पहल है, जिसका उद्देश्य उन्नत AI का उपयोग करके महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करना है।
  • यह सरकारों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संचालकों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाता है।
  • सहभागी संगठनों को सॉफ्टवेयर में कमियों की पहचान करने और उन्हें ठीक करने के लिए ‘क्लाउड मायथोस प्रीव्यू’ तक नियंत्रित पहुँच प्रदान की जाती है।
  • यह पहल तेजी से परिष्कृत होते एआई-सक्षम साइबर खतरों के खिलाफ साइबर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का प्रयास करती है।
  • एंथ्रोपिक ने इस कार्यक्रम के तहत उपयोग क्रेडिट के लिए $100 मिलियन और ओपन-सोर्स सुरक्षा प्रयासों के लिए $4 मिलियन तक की प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
  • इसकी पहुँच केवल जांचे-परखे संगठनों तक सीमित है क्योंकि इस बात की चिंता रहती है कि यदि मॉडल की क्षमताओं को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया, तो उनका दुरुपयोग हो सकता है।

क्लाउड मायथोस प्रीव्यू (मायथोस) के बारे में

  • क्लाउड मायथोस प्रीव्यू एंथ्रोपिक द्वारा विकसित एक उन्नत फ्रंटियर AI मॉडल है, जिसमें कोडिंग, तर्क और साइबर सुरक्षा की प्रभावी क्षमताएं हैं।
  • यह मॉडल ऑपरेटिंग सिस्टम, वेब ब्राउज़र और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम में सॉफ्टवेयर की कमियों की पहचान कर सकता है।
  • यह संगठनों को कमियों का पता लगाने, साइबर सुरक्षा प्रणालियों का परीक्षण करने और सुरक्षा खामियों को ठीक करने की प्रक्रिया में तेजी लाने में सहायता करता है।
  • एंथ्रोपिक और उसके भागीदारों ने ‘मायथोस प्रीव्यू’ का उपयोग करके 10,000 से अधिक उच्च या गंभीर कमियों की पहचान होने की सूचना दी है।
  • कथित तौर पर कुछ कमियां ऐसी थीं जो इस मॉडल द्वारा खोजे जाने से पहले के वर्षों से ज्ञात नहीं थीं।
  • अपनी प्रभावशाली क्षमताओं के कारण, एंथ्रोपिक ‘मायथोस’ को एक अत्यधिक संवेदनशील तकनीक मानता है और उसने इसकी सार्वजनिक रिलीज को प्रतिबंधित कर दिया है।

लाभान्वित होने वाली भारतीय एजेंसियाँ

  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C): ‘प्रोजेक्ट ग्लासविंग’ एआई-सहायता प्राप्त कमी मूल्यांकन और खतरे की पहचान के माध्यम से साइबर अपराध जाँच को और बेहतर बना सकता है।
  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In): यह डिजिटल बुनियादी ढांचे में कमजोरियों की पहचान करने के साथ-साथ घटना प्रतिक्रिया और साइबर लचीलेपन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
  • राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC): यह बैंकिंग, बिजली, दूरसंचार और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा को बेहतर कर सकता है, ताकि दुरुपयोग से पहले ही कमियों का पता लगाया जा सके।
  • दूरसंचार विभाग का डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP): यह भारत के डिजिटल संचार इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और धोखाधड़ी का पता लगाने की क्षमता को बढ़ा सकता है।
  • भारतीय आईटी सेवा और अनुसंधान संगठन: इस कार्यक्रम तक संभावित पहुँच साइबर सुरक्षा अनुसंधान, खतरा ख़ुफ़िया जानकारी, सॉफ्टवेयर सुरक्षा ऑडिटिंग और एआई-संचालित कमी प्रबंधन को बढ़ावा दे सकती है।

भारत के लिए महत्व

  • महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को सुदृढ़ करना: बैंकिंग, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को साइबर खतरों और कमजोरियों से सुरक्षित करने में मदद करता है।
  • राष्ट्रीय साइबर रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना: सरकारी एजेंसियों का दुरूपयोग किए जाने से पहले सॉफ्टवेयर कमियों का सक्रिय रूप से पता लगाने, आकलन करने और उन्हें ठीक करने में सक्षम बनाता है।
  • भारत को AI-संचालित साइबर खतरों के लिए तैयार करना: तेजी से परिष्कृत होते AI-सक्षम साइबर हमलों का सामना करने के लिए उन्नत उपकरण प्रदान करता है और डिजिटल युग में साइबर लचीलेपन को मजबूत करता है।
  • भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय सुरक्षा का समर्थन करना: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग प्रणाली और ऑनलाइन सेवाओं की सुरक्षा में सुधार करता है, जिससे भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम में विश्वास बढ़ता है।
  • क्षमता निर्माण और सहयोग को बढ़ावा देना: सरकारी एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों और निजी फर्मों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करता है, साथ ही भारतीय साइबर सुरक्षा पेशेवरों को अग्रणी एआई प्रौद्योगिकियों और वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यासों से परिचित कराता है।
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