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सामान्य अध्ययन-3:  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और एवं नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और अंतरिक्ष के क्षेत्र में जागरूकता।

संदर्भ: जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित एक नए अध्ययन में पाया गया है कि बुध ग्रह पहले लगाए गए अनुमानों की तुलना में 30% तक अधिक सिकुड़ सकता है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • शोधकर्ताओं का अनुमान है कि लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले अपने गठन के बाद से बुध ग्रह के व्यास में 14.5 मील (23 किमी) तक की कमी आई है—जो पहले लगाए गए अनुमानों की तुलना में काफी अधिक है।
  • यह खोज बुध ग्रह के निर्माण, शीतलन और आंतरिक संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करती है। साथ ही, इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा और मंगल जैसे अन्य चट्टानी खगोलीय पिंडों को समझने में भी मदद मिल सकती है।

बुध : एक सिकुड़ता ग्रह

  • सबसे छोटा ग्रह: बुध ग्रह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है, जिसका व्यास लगभग 3,023 मील है। यह चार स्थलीय (चट्टानी) ग्रहों में से एक है, जिनमें शुक्र, पृथ्वी और मंगल शामिल हैं।
  • निर्माण: बुध ग्रह का निर्माण लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले सूर्य के निर्माण के बाद बची धूल, गैस, चट्टानों और क्षुद्रग्रहों के एकत्रित होने से हुआ। इस प्रक्रिया के दौरान नवगठित ग्रह के आंतरिक भाग में अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न हुई।
  • न कोई चंद्रमा, न कोई वलय: बुध ग्रह का कोई प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) नहीं है और न ही इसकी कोई ग्रहीय वलय प्रणाली है।
  • अत्यधिक तापमान: सूर्य के सबसे निकट होने के बावजूद बुध ग्रह के पास ऊष्मा को रोककर रखने वाला घना वायुमंडल नहीं है। इसके परिणामस्वरूप, दिन के समय इसका तापमान लगभग 430°C (800°F) तक पहुँच सकता है, जबकि रात में यह गिरकर लगभग −180°C (−290°F) तक हो जाता है।
  • विशाल लौह क्रोड: पृथ्वी के विपरीत, बुध ग्रह के आंतरिक भाग में इसका विशाल लौह क्रोड प्रमुख है। इसका लौह क्रोड ग्रह की कुल त्रिज्या का लगभग 85% है।
  • गतिशील विवर्तनिक प्लेटों का अभाव: पृथ्वी की तरह बुध ग्रह पर गतिशील विवर्तनिक प्लेटें नहीं हैं। इसके विशाल क्रोड के चारों ओर एक एकल, सतत चट्टानी भूपर्पटी मौजूद है।
  • अंतरिक्ष मिशन: नासा का मैसेंजर (MESSENGER) बुध ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला अंतरिक्ष यान था। बेपीकोलंबो (BepiColombo), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का संयुक्त मिशन है, जो बुध ग्रह का अध्ययन कर रहा है और 2026 में इसकी कक्षा में प्रवेश करने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों ने बुध ग्रह के सिकुड़ने को कैसे मापा?

  • मैसेंजर डेटा: वैज्ञानिकों ने नासा के मरकरी मैसेंजर (Mercury MESSENGER) अंतरिक्ष यान से प्राप्त आँकड़ों का उपयोग किया। इसे अगस्त 2004 में प्रक्षेपित किया गया था। यह मार्च 2011 में बुध की कक्षा में पहुँचा, 4,105 परिक्रमाएँ पूरी कीं और 30 अप्रैल 2015 को बुध की सतह से टकराने के साथ इसका मिशन समाप्त हुआ।
    • इसमें सात वैज्ञानिक उपकरण लगाए गए थे, जिनमें बुध लेजर अल्टीमीटर और दोहरी इमेजिंग प्रणाली शामिल थे।
  • सतही विशेषताओं का मानचित्रण: मैसेंजर के उपकरणों का उपयोग संपीड़न संरचनाओं की पहचान करने के लिए किया गया। इनमें सतह पर दिखाई देने वाली झुर्रियाँ, कटक और पालि-आकृति की भ्रंश कगारें (लोबेट स्कार्प) जैसी संरचनाएँ शामिल हैं।
    • ये संरचनाएँ तब बनती हैं जब किसी ग्रह का आकार सिकुड़ता है। इसलिए इनकी संख्या और विस्तार ग्रह के सिकुड़ने के प्रमाण प्रदान करते हैं।
  • सतह की खुरदरी प्रकृति की चुनौती: बुध की प्राचीन संपीड़न संरचनाएँ क्षुद्रग्रहों के प्रभाव, क्रेटरों और बिखरे हुए मलबे के कारण आंशिक रूप से ढक गई हैं।
    • मैसेंजर का लेजर अल्टीमीटर विस्तृत त्रि-आयामी आँकड़े तभी उपलब्ध करा सकता था, जब अंतरिक्ष यान बुध के अपेक्षाकृत निकट हो। इससे पूरे ग्रह की त्रि-आयामी मैपिंग सीमित हो गई।
  • स्टीरियोफोटोग्रामेट्री: जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस रिसर्च के गाकु निशियामा के नेतृत्व वाली टीम ने अलग-अलग कोणों से मैसेंजर द्वारा ली गई द्वि-आयामी तस्वीरों को स्टीरियोफोटोग्रामेट्री तकनीक का उपयोग करके संयोजित किया।
    • इससे बुध की सतह के विस्तृत त्रि-आयामी भू-भाग मानचित्र तैयार किए गए।

बुध ग्रह का सिकुड़ना हमें क्या सिखा सकता है?

बेपीकोलंबो: बुध ग्रह का और करीब से अध्ययन

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