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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के मोबाइल फोन विनिर्माण पारितंत्र को सुदृढ़ करने तथा इसकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए ₹62,500 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) को मंजूरी दी है।

मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) के बारे में

• यह ₹62,500 करोड़ के बजटीय परिव्यय वाली एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। 

• यह योजना वित्तीय वर्ष 2026–27 से वित्तीय वर्ष 2030–31 तक पाँच वर्षों के लिए लागू की जाएगी। 

• इसका उद्देश्य है:

  • मोबाइल फोन उत्पादन का विस्तार करना। 
  • घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ाना। 
  • आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ाना। 
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना। 
  • वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड विकसित करना। 
  • स्वदेशी अभिकल्प, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा पेटेंट सृजन के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना। 

• योजना के अंतर्गत प्रावधान:

  • भारत में निर्मित मोबाइल फोन की पात्र बिक्री पर 2.25% से 5% तक का प्रोत्साहन। 
  • प्रमुख अवयवों तथा उप-संयोजनों की घरेलू सोर्सिंग पर 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन। 
  • उत्पाद अभिकल्प (डिज़ाइन) एवं अनुसंधान एवं विकास (R&D) करने वाले भारतीय ब्रांडों को पात्र बिक्री पर 3% अतिरिक्त प्रोत्साहन। 

• योजना की अवधि के दौरान अपेक्षित परिणाम:

  • लगभग ₹39 लाख करोड़ का संचयी मोबाइल फोन उत्पादन। 
  • मोबाइल फोन निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि। 
  • लगभग 60,000 प्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन।  

• यह योजना बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI-LSEM) का स्थान लेती है, जिसका कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया। 

  • इसका उद्देश्य घरेलू मूल्य संवर्धन को और अधिक बढ़ावा देना तथा अवयव (Component) पारितंत्र को सुदृढ़ बनाकर इस योजना की उपलब्धियों को आगे बढ़ाना है। 

मोबाइल विनिर्माण में भारत की स्थिति

• उत्पादन की दृष्टि से भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। 

• भारत में उपयोग किए जाने वाले 99.2% मोबाइल फोन देश में ही निर्मित होते हैं। 

• मोबाइल फोन विनिर्माण, भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारितंत्र का प्रमुख आधार बन चुका है। 

• मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत:

  • वित्तीय वर्ष 2014–15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में सात गुना वृद्धि हुई है। 
  • इसी अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ग्यारह गुना बढ़ा है। 

• वर्ष 2025 में स्मार्टफोन, डीज़ल ईंधन तथा कटे एवं पॉलिश किए गए हीरों जैसे पारंपरिक निर्यात उत्पादों को पीछे छोड़ते हुए, भारत की सबसे बड़ी निर्यात उत्पाद श्रेणी बन गए। 

• इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार:

  • मोबाइल फोन उत्पादन वित्तीय वर्ष 2014–15 में ₹18,900 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया। 
  • इसी अवधि में मोबाइल फोन निर्यात ₹1,566 करोड़ से बढ़कर ₹2.60 लाख करोड़ हो गया। 
  • मोबाइल फोन वित्तीय वर्ष 2014–15 में भारत का 153वाँ सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद था, जो वित्तीय वर्ष 2025–26 में भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन गया। 

महत्व

• विनिर्माण पारिस्थितिक तंत्र को बढ़ावा देती है: यह योजना स्थानीय विनिर्माण पारितंत्र को मजबूत बनाकर मोबाइल फोन असेम्बली से आगे बढ़ते हुए अधिक घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देती है। 

• आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ाती है: यह प्रमुख अवयवों एवं उप-संयोजनों की घरेलू सोर्सिंग को प्रोत्साहित करती है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होती है तथा अधिक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण होता है। 

• निवेश एवं नवाचार का संवर्धन: यह योजना नए निवेश आकर्षित करने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता प्रदान करती है तथा स्वदेशी अभिकल्प, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा पेटेंट सृजन को प्रोत्साहित करती है। 

• भारतीय ब्रांडों का समर्थन करती है: यह भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों तथा मूल डिज़ाइन निर्माता (ODMs) को केवल अनुबंध आधारित विनिर्माण तक सीमित न रहकर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकसित करने में सक्षम बनाती है। 

• वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देती है: यह उन्नत विनिर्माण क्षमताओं, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता तथा आपूर्तिकर्ता नेटवर्क के विकास के माध्यम से भारत का वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण को बढ़ावा देती है। 

• अर्थव्यवस्था एवं रोजगार को गति देती है: इस योजना से निर्यात में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को गति मिलने की अपेक्षा है।

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