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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: सड़कें।

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोरायासी टोल प्लाजा पर भारत की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बाधा-रहित टोलिंग प्रणाली लॉन्च की।

MLFF (मल्टी-लेन फ्री फ्लो)के बारे में

  • MLFF एक अगली पीढ़ी की डिजिटल टोलिंग प्रणाली है जो बाधा-रहित आवाजाही, तीव्र यातायात प्रवाह और कुशल राजमार्ग संचालन को सक्षम बनाती है।
  • यह 2014 में शुरू किए गए FASTag-आधारित ‘इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह’ (ETC) का एक उन्नत संस्करण है।
  • इस प्रणाली में वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ती है; जब वाहन गति में होते हैं, तभी टोल वसूल लिया जाता है।
  • यह स्वचालित टोल कटौती के लिए FASTag (RFID-आधारित प्रणाली) और ANPR (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान) तकनीक का उपयोग करता है।
  • सत्यापन और प्रवर्तन के लिए इस प्रणाली को ‘वाहन’ (VAHAN – राष्ट्रीय वाहन रजिस्ट्री) डेटाबेस के साथ एकीकृत किया गया है।
  • यह इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन रिकॉर्ड और नोटिफिकेशन जनरेट करता है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
  • इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा ‘इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड’ (IHMCL) के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है।

MLFF की मुख्य विशेषताएँ

  • बाधा-रहित और निरंतर आवाजाही: यह प्रणाली टोल बूथों और अधिक बाधाओं की आवश्यकता को समाप्त करती है, जिससे बिना रुके वाहनों का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित होता है।
  • दोहरी पहचान और सत्यापन: सटीक और विश्वसनीय वाहन पहचान के लिए यह FASTag (RFID) और ANPR-आधारित नंबर प्लेट पहचान तकनीक का समन्वय करती है।
  • रियल टाइम में स्वचालित टोल संग्रह: यह तत्काल लेनदेन रिकॉर्डिंग और उपयोगकर्ता अधिसूचना के साथ निर्बाध टोल कटौती को सक्षम बनाता है।
  • एकीकृत तकनीकी ढांचा: यह वाहन सत्यापन और नियमों के प्रवर्तन के लिए टोल संग्रह प्रणाली को ‘वाहन’ (VAHAN) डेटाबेस के साथ जोड़ता है।
  • स्वचालित उल्लंघन और प्रवर्तन:
  • यह प्रणाली अमान्य FASTag, वाहन पंजीकरण संख्या (VRN) के मिलान न होने, या भुगतान न किए जाने वाले मामलों की पहचान करती है।
  • उल्लंघन का विवरण देते हुए संबंधित वाहन स्वामी को डिजिटल माध्यम से ई-नोटिस भेजे जाते हैं।
  • भुगतान के लिए 72 घंटे की समय-सीमा प्रदान की जाती है, जिसके दौरान केवल मूल टोल शुल्क ही लागू होता है।
  • यदि भुगतान 72 घंटे के बाद किया जाता है, तो मूल शुल्क पर दोगुना टोल जुर्माना लगाया जाता है।
  • इसमें शिकायतों के समाधान के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र शामिल है, जो समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करता है।
  • नियमाकीय समर्थक उपाय:
  • स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) के सटीक संचालन के लिए वाहनों पर ‘हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट’ (HSRP) का होना अनिवार्य है।
  • दुरुपयोग रोकने के लिए “एक वाहन, एक फास्टैग” नीति
  • न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप: यह प्रणाली मानवीय भागीदारी को कम करती है, जिससे त्रुटियों की संभावना न्यूनतम हो जाती है और परिचालन दक्षता में सुधार होता है।

MLFF का महत्व

  • बेहतर यातायात प्रवाह और कम जाम: टोल प्लाजा पर ठहराव को समाप्त करके, MLFF बाधाओं को काफी कम करता है और राजमार्ग पर यातायात की आवाजाही में सुधार करता है।
  • समय और ईंधन की बचत एवं पर्यावरणीय लाभ: वाहनों की निरंतर आवाजाही से यात्रा के समय में कमी आती है, ईंधन की खपत कम होती है और टोल की कतारों के कारण होने वाले विलंब में कमी आती है।टोल प्लाजा पर वाहनों की ‘आइडलिंग’ (इंजन चालू रखकर खड़े रहना) में कमी से उत्सर्जन कम होता है, जो पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान देता है।
  • उपयोगकर्ता सुविधा और ईज ऑफ लिविंग‘: MLFF प्रतीक्षा समय को कम करके और तनाव मुक्त यात्रा का वातावरण बनाकर यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाता है।
  • लॉजिस्टिक्स और ईज ऑफ डूइंग बिजनेसको बढ़ावा: माल की तीव्र और अनुमानित आवाजाही से रसद दक्षता बढ़ती है, जिससे ट्रांसपोर्टरों, बेड़ा संचालकों और व्यवसायों को लाभ होता है।
  • टोल राजस्व दक्षता में सुधार: यह प्रणाली राजस्व रिसाव को कम करती है, नियमों के अनुपालन को बढ़ाती है और डिजिटल निगरानी के माध्यम से सटीक टोल संग्रह सुनिश्चित करती है।
  • डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य के लिए तैयार बुनियादी ढांचा: यह वैश्विक सर्वोत्तम अभ्यासों के अनुरूप है और ‘स्मार्ट हाईवे’ के विकास का समर्थन करती है।
  • देशव्यापी विस्तार: सभी चार-लेन और उससे ऊपर के राजमार्गों पर इसे लागू करने की योजना है, जिसके लिए मार्च 2029 तक देशव्यापी कार्यान्वयन का लक्ष्य रखा गया है।

Sources :
PIB
Fastagsuvidha
Indian Express
DD News

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