संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन -2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय
सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग तथा रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव|
संदर्भ: हाल ही में, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने ‘व्हीकल-टू-एवरीथिंग’ (V2X) संचार हेतु विनियामक फ्रेमवर्क विकसित करने पर एक परामर्श पत्र जारी किया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
• यह परामर्श पत्र V2X के परिनियोजन के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम आवंटन, लाइसेंसिंग मॉडल, अंतर-संचालनीयता मानक और सुरक्षा ढांचे जैसे प्रमुख मुद्दों पर हितधारकों से सुझाव मांगने हेतु जारी किया गया है।
• इसमें 5.9 गीगाहर्ट्ज (GHz) स्पेक्ट्रम बैंड की पहचान भारत की कार्यान्वयन रणनीति के लिए एक संभावित विकल्प के रूप में की गई है—जिसे वैश्विक स्तर पर V2X के लिए निर्धारित किया गया है।
• यह सड़क सुरक्षा बढ़ाने और भविष्य की स्वायत्त गतिशीलता को सक्षम करने में 5G-सक्षम संचार प्रणालियों के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
प्रस्तावित नियामकीय फ्रेमवर्क की मुख्य विशेषताएँ
• स्पेक्ट्रम प्रबंधन और प्रौद्योगिकी का चयन: यह रूपरेखा 5.9 गीगाहर्ट्ज (GHz) बैंड के इष्टतम उपयोग का परीक्षण करती है और विश्वसनीय तथा न्यून-विलंबता संचार के लिए ‘सेलुलर V2X’ (C-V2X) जैसी प्रौद्योगिकी विकल्पों का मूल्यांकन करती है।
• अवसंरचना और इकोसिस्टम का विकास: यह निर्बाध संचार और वास्तविक समय की चेतावनियों की सुविधा के लिए वाहनों में ‘ऑन-बोर्ड यूनिट्स’ (OBUs) और सड़क के किनारे ‘रोडसाइड यूनिट्स’ (RSUs) की तैनाती पर बल देता है।
• अंतर-संचालनीयता और मानकीकरण: V2X प्रणालियों के निर्बाध कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए उपकरणों, नेटवर्क और क्षेत्रों के बीच साझा मानकों और अंतर-संचालनीयता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है।
• सुरक्षा, गोपनीयता और दायित्व: यह रूपरेखा साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और कानूनी दायित्व से संबंधित चिंताओं को संबोधित करती है, जो सुरक्षित और विश्वसनीय कार्यान्वयन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
V2X संचार के बारे में
• व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) संचार: यह वाहनों और उनके आसपास के वातावरण के बीच वास्तविक समय की सूचनाओं के आदान-प्रदान को संदर्भित करता है, जो बुद्धिमानीपूर्ण निर्णय लेने को सक्षम बनाता है।
• सुरक्षा संवर्धन: यह वाहनों को वायरलेस अलर्ट और डेटा विनिमय (जैसे: गति, स्थान, ट्रैफ़िक सिग्नल और टकराव की चेतावनी) के माध्यम से “दृष्टि रेखा से परे” खतरों का पता लगाने में सक्षम बनाता है, जिससे सड़क सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार होता है।
• संचार मोड: इसमें कई संचार मोड शामिल हैं जैसे:

- व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V)
- व्हीकल -टू-इन्फ्रास्ट्रक्चर (V2I)
- व्हीकल -टू-पेडेस्ट्रीयन (V2P)
- व्हीकल -टू-नेटवर्क (V2N)
• प्रारंभिक V2X प्रणालियाँ ‘डेडिकेटेड शॉर्ट-रेंज कम्युनिकेशंस’ (DSRC) पर निर्भर थीं, वहीं अब ‘सेलुलर V2X’ (C-V2X) की ओर झुकाव बढ़ रहा है। इसका कारण 4G/5G नेटवर्क का लाभ उठाने की इसकी क्षमता, व्यापक कवरेज प्रदान करना और मौजूदा दूरसंचार अवसंरचना के साथ अधिक निर्बाध रूप से एकीकृत होना है।
V2X संचार का महत्व
• सड़क सुरक्षा संवर्धन: V2X टकराव, सड़क के खतरों और यातायात की स्थिति के संबंध में वास्तविक समय में चेतावनी सक्षम बनाता है, जिससे दुर्घटनाओं में महत्वपूर्ण कमी आती है।
• यातायात दक्षता में सुधार: यह स्मार्ट यातायात प्रबंधन, भीड़भाड़ में कमी और मार्ग अनुकूलन की सुविधा प्रदान करता है, जिससे शहरी गतिशीलता में सुधार होता है।
• स्वायत्त वाहनों को सक्षम बनाना: स्वायत्त ड्राइविंग प्रणालियों के लिए विश्वसनीय संचार अनिवार्य है, जो V2X को भविष्य की गतिशीलता के लिए एक आधारभूत प्रौद्योगिकी बनाता है।
• डिजिटल इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना: यह 5G अवसंरचना और डिजिटल कनेक्टिविटी की मांग को बढ़ाता है, जो भारत के व्यापक डिजिटल रूपांतरण में योगदान देता है।
V2X संचार की चुनौतियाँ
• स्पेक्ट्रम आवंटन और नीतिगत संतुलन: भारत को सुरक्षा-महत्वपूर्ण V2X सेवाओं के लिए 5.9 गीगाहर्ट्ज (GHz) बैंड के आवंटन और अन्य प्रतिस्पर्धी दूरसंचार मांगों के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि सड़क सुरक्षा उद्देश्यों से समझौता किए बिना स्पेक्ट्रम का कुशल उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
• अवसंरचनात्मक तत्परता और इकोसिस्टम की कमियाँ: V2X की तैनाती के लिए वाहनों, सड़क किनारे की अवसंरचना और दूरसंचार नेटवर्क में एक साथ अपग्रेड की आवश्यकता है; वर्तमान में समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र की तत्परता का अभाव एक बड़ी बाधा बना हुआ है।
• लागत, मानकीकरण और अंतर-संचालनीयता संबंधी मुद्दे: उच्च कार्यान्वयन लागत, समान मानकों की अनुपस्थिति और DSRC तथा C-V2X प्रौद्योगिकियों के बीच सह-अस्तित्व की चुनौतियां बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण बाधाएं उत्पन्न करती हैं।
• साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता जोखिम: V2X प्रणालियां साइबर खतरों और डेटा के दुरुपयोग के जोखिमों के प्रति सुभेद्य हैं, जिसके लिए विश्वास और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सुदृढ़ सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता है।
• विनियामक और दायित्व संबंधी अनिश्चितता: दुर्घटनाओं में दायित्व, डेटा स्वामित्व और जवाबदेही के संबंध में अस्पष्ट विनियामक ढांचे प्रभावी विनियमन के लिए निरंतर चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
आगे की राह
• व्यापक विनियामक और स्पेक्ट्रम रूपरेखा: भारत को 5.9 गीगाहर्ट्ज (GHz) स्पेक्ट्रम आवंटन, लाइसेंसिंग और कार्यान्वयन मॉडल पर स्पष्ट नीतियां स्थापित करनी चाहिए, जिससे सुरक्षा-महत्वपूर्ण V2X उपयोग को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके।
• मानक विकसित करना और अंतर-संचालनीयता सुनिश्चित करना: भारत को 3GPP और ITS-WAVE जैसे अंतर्राष्ट्रीय ढांचों के समन्वय में ‘ऑन-बोर्ड यूनिट्स’ (OBUs) और ‘रोडसाइड यूनिट्स’ (RSUs) के लिए भारत-विशिष्ट मानक विकसित करने चाहिए और C-V2X/DSRC के निर्बाध सह-अस्तित्व को सक्षम बनाना चाहिए।
• अवसंरचना और इकोसिस्टम की तत्परता: बड़े पैमाने पर इसे अपनाने हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से 5G नेटवर्क, सड़क किनारे की अवसंरचना और ‘कनेक्टेड व्हीकल’ प्रणालियों के प्रसार में तेजी लानी चाहिए।
• साइबर सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस ढांचा: विश्वास और सुरक्षित तैनाती सुनिश्चित करने के लिए साइबर सुरक्षा, डेटा स्वामित्व, उपयोगकर्ता की सहमति और दुर्घटना की स्थितियों में दायित्व को संबोधित करने वाला एक समर्पित ढांचा तैयार करना चाहिए।
SOURCES:
PIB
Economictimes
