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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय| अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण के प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इसका उद्देश्य एमएसएमई विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन करके एमएसएमई क्षेत्र के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत करना है। इसके माध्यम से व्यवसाय करने में सुगमता, विवाद समाधान तथा भुगतान तंत्र में सुधार पर जोर दिया गया है।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ

  • बदलते एमएसएमई परिदृश्य के अनुरूप: संयंत्र एवं मशीनरी/उपकरण में निवेश तथा वार्षिक कारोबार के दोहरे मानदंडों पर आधारित एमएसएमई वर्गीकरण को अधिनियम में शामिल किया गया है। साथ ही, निःशुल्क, डिजिटल एवं स्वैच्छिक उद्यम पंजीकरण पोर्टल को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है।
  • ऑनलाइन विवाद समाधान: सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के सामने आने वाले विवादों के समयबद्ध एवं कम लागत वाले समाधान के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) तंत्र का प्रावधान किया गया है।
  • समयबद्ध विवाद समाधान: मध्यस्थता को 90 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है। मध्यस्थता के बाद 30 दिनों के भीतर पंचाट को संदर्भित करना तथा अभिवचनों के पूरा होने के 90 दिनों के भीतर पंचाट निर्णय देना अनिवार्य किया गया है।
  • बकाया राशि की वसूली: मध्यस्थता द्वारा हुए समझौते तथा पंचाट निर्णय के तहत देय राशि को भू-राजस्व के बकाये के रूप में जिला कलेक्टर, उपायुक्त या अन्य अधिसूचित प्राधिकारी के माध्यम से वसूल किया जा सकेगा।
  • पंचाट निर्णयों का प्रवर्तन: यदि पंचाट निर्णय के विरुद्ध चुनौती छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है, तो न्यायालय आपूर्तिकर्ता को निर्णय की राशि का कम-से-कम 50% जारी कर सकेंगे।
  • TReDS के माध्यम से अनिवार्य चालान निपटान: प्रत्येक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (CPSE) को एमएसएमई से की गई खरीद के चालानों का निपटान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से करना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारें भी इस व्यवस्था को अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों तक विस्तारित कर सकती हैं।
  • एमएसई सुविधा परिषदों को मजबूत करना: सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषदों (MSEFCs) की संरचना को तर्कसंगत बनाया गया है। राज्य सरकारों को एक से अधिक परिषदों की स्थापना करने तथा उनके कामकाज के लिए नियम बनाने का अधिकार दिया गया है।
  • व्यवसाय करने में सुगमता: दोषसिद्धि-आधारित दंड के स्थान पर क्रमिक नागरिक दंड की व्यवस्था की गई है। इससे कुछ उल्लंघनों का अपराधीकरण समाप्त होगा और विश्वास-आधारित नियामकीय वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।

विधेयक का महत्व

  • विलंबित भुगतानों की समस्या का समाधान: एमएसएमई को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध विवाद समाधान, ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) तथा TReDS के माध्यम से अनिवार्य भुगतान मार्ग की व्यवस्था करता है।
  • कानूनी ढाँचे को मजबूत करना: बकाया राशि की वसूली, मध्यस्थता पंचाटों के निर्णयों के प्रवर्तन तथा एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित संस्थागत तंत्र को मजबूत करता है।
  • व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा: कुछ निर्दिष्ट अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर तथा दोषसिद्धि-आधारित जुर्माने के स्थान पर क्रमिक नागरिक दंड एवं अनुपालन-उन्मुख विनियमन लागू करके व्यवसाय करना आसान बनाता है।
  • औपचारिकीकरण एवं डिजिटलीकरण को बढ़ावा: उद्यम पंजीकरण पोर्टल को वैधानिक आधार प्रदान करता है तथा डिजिटल विवाद समाधान तंत्र का विस्तार करता है।
  • विकसित भारत @2047 को समर्थन: औपचारिकीकरण, उद्यमों के विस्तार, नियामकीय अनुपालन तथा रोजगार-प्रधान आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

विधेयक की आलोचना

  • प्रक्रियात्मक पक्ष पर अधिक जोर: संशोधन मुख्यतः प्रक्रियाओं को मजबूत करते हैं, जबकि एमएसएमई द्वारा सामना किए जा रहे बकाया भुगतानों की बड़ी मात्रा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
  • अधिक वित्तीय सहायता की आवश्यकता: सदस्यों ने एमएसएमई के लिए बेहतर नकदी प्रवाह सहायता तथा वित्त तक आसान पहुँच की आवश्यकता पर जोर दिया।
  • अतिरिक्त नीतिगत सहायता की आवश्यकता: उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI), बेहतर अवसंरचना सहायता तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत प्रदान करने के सुझाव दिए गए।
  • संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता: कुछ सदस्यों ने केवल प्रक्रियात्मक सुधारों के बजाय व्यापक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

आगे की राह

  • प्रभावी क्रियान्वयन: ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR), TReDS तथा संशोधित विवाद समाधान समय-सीमाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
  • संस्थागत क्षमता को मजबूत करना: विवादों के त्वरित निपटारे के लिए पर्याप्त अवसंरचना एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन के साथ अतिरिक्त एमएसई सुविधा परिषदों की स्थापना की जाए।
  • डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार: डिजिटल पंजीकरण, चालान निपटान तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन तंत्र को व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा दिया जाए।
  • एमएसएमई विकास को समर्थन: विकसित भारत @2047 के तहत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एमएसएमई के निर्माण के लिए वित्त, प्रौद्योगिकी, बाजार एवं उद्यमिता तक पहुँच को निरंतर बढ़ाया जाए।
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