पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2:
भारत से संबंधित अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले वैश्विक समूह एवं समझौते; महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियाँ एवं मंच — उनकी संरचना एवं अधिदेश।

संदर्भ:

हाल ही में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में आयोजित वैश्विक प्रवासन समझौता (GCM) के द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा मंच (IMRF) के दौरान अधिक समावेशी, मानवीय एवं अधिकार-आधारित प्रवासन ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • भारत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवासन शासन को प्रवासी-केंद्रित, समावेशी एवं विकासोन्मुखी बनाए रखते हुए प्रवासियों की गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • भारत ने विभिन्न देशों में आर्थिक वृद्धि, श्रम गतिशीलता, नवाचार एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान में प्रवासियों के सकारात्मक योगदान को रेखांकित किया।
  • भारत ने सुरक्षित एवं नियमित प्रवासन मार्गों, नैतिक भर्ती प्रणालियों, सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी तथा कौशल की पारस्परिक मान्यता की आवश्यकता पर बल दिया।
  • भारत वर्ष 2010 से विश्व में सर्वाधिक प्रेषण (Remittances) प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है, जहाँ अंतर्वाह प्रेषण 2010 में लगभग 53.48 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 137.67 अरब डॉलर हो गया।
  • इससे पूर्व, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) की एक रिपोर्ट में 2024 में भारत–यूएई एवं भारत–अमेरिका प्रवासन गलियारों को विश्व के शीर्ष दस अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन गलियारों में शामिल किया गया था।

वैश्विक प्रवासन समझौता (GCM)

  • सुरक्षित, व्यवस्थित एवं नियमित प्रवासन हेतु वैश्विक समझौता (GCM) को वर्ष 2018 में मोरक्को के मराकेश में संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में अपनाया गया था।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के सभी आयामों से संबंधित प्रथम व्यापक अंतर-सरकारी ढाँचा है।
  • GCM कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है तथा निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित है:
    • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग,
    • साझा उत्तरदायित्व,
    • राज्य की संप्रभुता का सम्मान, तथा
    • प्रवासियों के मानवाधिकारों का संरक्षण।
  • यह समझौता सुरक्षित प्रवासन मार्गों, प्रवासियों की संवेदनशीलताओं में कमी, नैतिक भर्ती, श्रम गतिशीलता तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों से संबंधित 23 उद्देश्यों को रेखांकित करता है।
  • प्रत्येक चार वर्ष में आयोजित होने वाला अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा मंच (IMRF), GCM के क्रियान्वयन की समीक्षा हेतु प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है।

प्रवासन एवं मानव तस्करी से संबंधित प्रमुख चिंताएँ

  • अनियमित प्रवासन एवं प्रवासी शोषण: अनियमित एवं अवैध प्रवासन मार्ग प्रवासियों को असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, वेतन शोषण, बंधुआ मजदूरी, ऋण बंधन एवं तस्करी नेटवर्क के जोखिम में डालते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का विस्तार: मानव तस्करी एक अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध के रूप में उभर रही है, जिसमें फर्जी भर्ती एजेंसियाँ, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं अवैध सीमा-पार प्रवासन मार्ग शामिल हैं।
  • महिलाओं एवं बच्चों की संवेदनशीलता: महिलाएँ एवं बच्चे तस्करी, यौन शोषण, घरेलू दासता, बंधुआ मजदूरी एवं अन्य प्रकार के उत्पीड़न के प्रति अनुपातहीन रूप से अधिक संवेदनशील बने हुए हैं।
  • प्रवासियों हेतु सामाजिक सुरक्षा में कमी: अनेक देशों में प्रवासी श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवाओं, बीमा, कानूनी सुरक्षा तथा कल्याणकारी लाभों की पोर्टेबिलिटी तक पर्याप्त पहुँच प्राप्त नहीं है।
  • जलवायु परिवर्तन एवं उभरते प्रवासन दबाव: जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय क्षरण एवं आजीविका असुरक्षा विशेष रूप से विकासशील देशों में विस्थापन एवं प्रवासन संबंधी संवेदनशीलताओं को बढ़ा रहे हैं।

भारत का प्रवासन दृष्टिकोण

  • भारत का प्रवासन ढाँचा केवल सीमा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह प्रवासी संरक्षण, कल्याण, कौशल मान्यता तथा गंतव्य देशों के साथ सहयोग पर भी केंद्रित है।
  • भारत ने प्रवासी श्रमिकों की पारदर्शिता एवं सुरक्षा बढ़ाने के लिए -प्रवासन पोर्टल तथा शिकायत निवारण प्रणालियों जैसे संस्थागत एवं डिजिटल तंत्र विकसित किए हैं।
  • सरकार ने मानव तस्करी की रोकथाम, प्रत्यावर्तन एवं प्रवासी कल्याण को सुदृढ़ करने हेतु बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, कंबोडिया तथा म्यांमार जैसे देशों के साथ अनेक द्विपक्षीय समझौते एवं समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • भारत ने विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी से संबंधित व्यक्तियों की तस्करी पर संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध विरोधी अभिसमय (UNCTOC)प्रोटोकॉल का भी अनुमोदन किया है।
    • इसके अतिरिक्त, भारत ने महिलाओं एवं बच्चों की वेश्यावृत्ति हेतु तस्करी की रोकथाम एवं नियंत्रण पर सार्क अभिसमय (2002) का भी अनुमोदन किया है।
  • भारत का घरेलू मानव तस्करी-रोधी कानूनी ढाँचा निम्नलिखित को सम्मिलित करता है:
    • संविधान का अनुच्छेद 23, जो मानव तस्करी एवं बंधुआ श्रम को निषिद्ध करता है।
    • अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956।
    • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 143 एवं धारा 144
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