पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: शासन, पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व के महत्त्वपूर्ण आयाम; महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियाँ एवं मंच — उनकी संरचना एवं अधिदेश।
संदर्भ: हाल ही में, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (3 मई) के अवसर पर विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 जारी किया। इस रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर प्रेस स्वतंत्रता और मीडिया की स्वायत्तता में आई गंभीर गिरावट को रेखांकित किया गया है।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक
• यह सूचकांक वर्ष 2002 से प्रतिवर्ष रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो विश्व के 180 देशों एवं क्षेत्रों में प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है।
- रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की स्थापना वर्ष 1985 में हुई थी तथा इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है।
- इसे संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन तथा यूरोप परिषद में परामर्शदात्री दर्जा प्राप्त है।
• मूल्यांकन के मानदंड: प्रत्येक देश अथवा क्षेत्र के प्रदर्शन का मूल्यांकन पाँच संदर्भात्मक संकेतकों के आधार पर किया जाता है—

- राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
- कानूनी ढाँचा
- आर्थिक परिप्रेक्ष्य
- सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य
- पत्रकारों की सुरक्षा
• इस सूचकांक द्वारा देशों को 0 से 100 तक अंक प्रदान किया जाता है, जहाँ 100 सर्वोत्तम स्थिति को दर्शाता है। इसके आधार पर देशों को पाँच रंग-आधारित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
सूचकांक के प्रमुख निष्कर्ष
• वर्ष 2026 के सूचकांक में यह पाया गया कि वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के 25 वर्षीय इतिहास में प्रेस स्वतंत्रता अपने सबसे निम्न स्तर पर पहुँच गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्वतंत्र पत्रकारिता पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है।
• वर्ष 2002 में सूचकांक की शुरुआत के बाद पहली बार विश्व के आधे से अधिक देशों और क्षेत्रों को प्रेस स्वतंत्रता की “कठिन” अथवा “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
• प्रेस स्वतंत्रता के मूल्यांकन हेतु प्रयुक्त पाँच संकेतकों में से इस वर्ष कानूनी संकेतक में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई।
• रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने मीडिया संगठनों की आर्थिक अस्थिरता को वैश्विक स्तर पर प्रेस स्वतंत्रता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया।
• नॉर्वे ने लगातार दसवें वर्ष सूचकांक में प्रथम स्थान बनाए रखा, जबकि इरिट्रिया लगातार तीसरे वर्ष अंतिम स्थान पर रहा।
• शीर्ष तीन देश: नॉर्वे, नीदरलैंड तथा एस्टोनिया।
• निम्नतम तीन देश: इरिट्रिया, उत्तर कोरिया तथा चीन।
भारत की रैंकिंग एवं क्षेत्रीय तुलना:
• भारत को विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में 180 देशों में 157वाँ स्थान प्राप्त हुआ, जो वर्ष 2025 की 151वीं रैंकिंग से छह स्थान नीचे है।

• भारत का कुल स्कोर 100 में से 31.96 रहा, जिसके आधार पर इसे प्रेस स्वतंत्रता की “अत्यंत गंभीर” श्रेणी में रखा गया।
• रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने भारत में मीडिया स्वामित्व के केंद्रीकरण, कानूनी दबाव तथा पत्रकारों के ऑनलाइन उत्पीड़न को प्रमुख चिंताओं के रूप में रेखांकित किया।
• भारत के पड़ोसी देशों में नेपाल 87वें, मालदीव 108वें, श्रीलंका 134वें, भूटान 150वें, बांग्लादेश 152वें तथा पाकिस्तान 153वें स्थान पर रहे, जबकि भारत इन देशों से नीचे रहा।
• हालाँकि, भारत की स्थिति म्यांमार (166वाँ), अफगानिस्तान (175वाँ) तथा चीन (178वाँ) से बेहतर रही।
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस
• यह दिवस प्रत्येक वर्ष 3 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करना, पत्रकारों के योगदान एवं बलिदान का सम्मान करना तथा सरकारों को मीडिया की स्वायत्तता बनाए रखने हेतु प्रेरित करना है।
• इसे वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन की 1991 की सिफारिश तथा विंडहोक घोषणा के आधार पर स्थापित किया गया था।
• वर्ष 2026 की थीम: “मानवाधिकार, विकास और सुरक्षा हेतु प्रेस स्वतंत्रता को प्रोत्साहित करते हुए शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण”।
