FIU-India ने धन शोधन और वित्तीय अपराधों से निटने के लिए PFRDA और SEBI के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
संदर्भ: मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों के विरुद्ध भारत की लड़ाई को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) ने पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) तथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौता ज्ञापनों (MoUs) की मुख्य विशेषताएं
- ये समझौते संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों का पता लगाने के लिए FIU-IND और दोनों विनियामकों के बीच वास्तविक समय में सूचना साझा करने और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान पर केंद्रित हैं।
- इस सहयोग में एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने (CFT) की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रशिक्षण और आउटरीच कार्यक्रम शामिल हैं।
- अंतर-एजेंसी समन्वय: इस पहल का उद्देश्य बेहतर अंतर-एजेंसी समन्वय के माध्यम से भारत के वित्तीय निगरानी ढांचे को मजबूत करना और मनी लॉन्ड्रिंग तथा आतंकी वित्तपोषण का मुकाबला करना है।
भारतीय वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के बारे में
- वित्त मंत्रालय के अंतर्गत नवंबर 2004 में स्थापित, FIU-IND संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित सूचना प्राप्त करने, विश्लेषण करने और प्रसारित करने वाली केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है।
- यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण का सामना करने में प्रमुख भूमिका निभाती है।
- यह इकाई वित्तीय खुफिया जानकारी के भंडार के रूप में भी कार्य करती है और वित्तीय जांच में प्रवर्तन एजेंसियों का समर्थन करती है।
पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के बारे में
- PFRDA एक वैधानिक निकाय है जिसकी स्थापना PFRDA अधिनियम, 2013 के तहत की गई है।
- यह राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और अटल पेंशन योजना सहित पेंशन क्षेत्र का विनियमन और पर्यवेक्षण करता है।
- यह एक व्यापक नियामक ढांचे के माध्यम से पेंशन बाजारों की व्यवस्थित वृद्धि और अंशधारकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के बारे में
- SEBI भारत के प्रतिभूति बाजार का वैधानिक विनियामक है, जिसे SEBI अधिनियम, 1992 के तहत स्थापित किया गया था।
- यह बाजार मध्यस्थों, सूचीबद्ध कंपनियों और निवेशक सुरक्षा तंत्रों की निगरानी करता है।
- SEBI भारत में प्रतिभूति बाजार की पारदर्शिता, अखंडता और व्यवस्थित कामकाज को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
RELIEF योजना के कवरेज का विस्तार
संदर्भ: जारी पश्चिम एशिया संकट के जवाब में, जिसने नौवहन मार्गों को बाधित किया है और माल ढुलाई तथा बीमा लागत में वृद्धि की है, भारत सरकार ने RELIEF (निर्यात सुगमीकरण हेतु लचीलापन और रसद हस्तक्षेप) योजना के दायरे का विस्तार किया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- सरकार ने योजना के तहत पात्र गंतव्यों की सूची का विस्तार किया है, जिसमें मिस्र और जॉर्डन जैसे अतिरिक्त देशों को शामिल किया गया है, जिससे इसका भौगोलिक कवरेज व्यापक हो गया है।
- संशोधित ढांचा व्यवधान की अवधि के दौरान पूर्ण किए गए शिपमेंट और भविष्य के निर्यात, दोनों को कवर करना जारी रखता है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर विशेष बल दिया गया है।
- इसके अतिरिक्त, 16 मार्च 2026 या उसके बाद नई ECGC ‘संपूर्ण टर्नओवर पॉलिसी‘ (Whole Turnover Policy) प्राप्त करने वाले निर्यातक भी योजना के ‘घटक II’ के तहत सहायता के लिए पात्र होंगे।
RELIEF योजना के बारे में
- RELIEF (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) निर्यात संवर्धन मिशन के तहत मार्च 2026 में शुरू की गई एक समयबद्ध योजना है, जिसका परिव्यय ₹497 करोड़ है।
- इसे भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है, जो प्रभावित पश्चिम एशियाई देशों को या उनके माध्यम से होने वाले पात्र शिपमेंट के लिए बढ़ी हुई बीमा कवरेज और प्रतिपूर्ति सहायता प्रदान करता है।
- यह योजना माल ढुलाई और बीमा की बढ़ी हुई लागतों की आंशिक प्रतिपूर्ति भी प्रदान करती है, विशेष रूप से MSME निर्यातकों के लिए।
- इसका लक्ष्य रसद संबंधी व्यवधानों को कम करना, ऑर्डर रद्दीकरण को रोकना और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौरान भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना है।
मई 2026 में ब्रिक्स और क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठकों की मेजबानी करेगा भारत
संदर्भ: भारत, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच, मई 2026 में ब्रिक्स (BRICS) और क्वाड (Quad) दोनों के विदेश मंत्रियों की बैठकों की मेजबानी करेगा।
अन्य संबंधित जानकारी
- ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच पहली प्रत्यक्ष बातचीत होगी। यह इस समूह के भीतर बढ़ते तनाव को भी उजागर करता है।
- यह बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान, यूएई और सऊदी अरब—जिन्हें 2023 के जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स में शामिल किया गया था—अब वर्तमान पश्चिम एशियाई संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल हैं।
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 7-11 सितंबर, 2026 तक निर्धारित है, जिसमें नेताओं के 9-11 सितंबर के दौरान भाग लेने की उम्मीद है। यह अध्यक्ष के रूप में भारत की निरंतर केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
- क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तिथि अभी अनिश्चित है, जो मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यक्रम और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर निर्भर है।
ब्रिक्स (BRICS) के बारे में
- “BRIC” (ब्राजील, रूस, भारत, चीन) शब्द का प्रयोग पहली बार 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने किया था।
- ब्रिक को औपचारिक रूप से 2009 में स्थापित किया गया था।
- पहला आधिकारिक ब्रिक शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया गया था। दक्षिण अफ्रीका 2010 में इस समूह में शामिल हुआ।
- 2023 के दक्षिण अफ्रीका शिखर सम्मेलन में 6 देशों (सऊदी अरब, ईरान, यूएई, मिस्र, इथियोपिया और अर्जेंटीना) को शामिल करने की घोषणा की गई।
- अर्जेंटीना ने नए राष्ट्रपति के नेतृत्व में शामिल न होने की घोषणा की।
- सऊदी अरब ने अभी तक औपचारिक स्वीकृति पर निर्णय नहीं लिया है।
- इंडोनेशिया 6 जनवरी, 2025 को पूर्ण सदस्य के रूप में ब्रिक्स में शामिल हुआ।
- इस विस्तार के कारण इसे अक्सर BRICS+ कहा जाता है।
- वर्तमान सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया।
QUAD (चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद) के बारे में
- क्वाड ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका का एक अनौपचारिक सुरक्षा समूह है। यह पहली बार 2007 में बना, 2008 में निष्क्रिय हो गया और 2017 में इसे पुनः पुनर्जीवित किया गया।
- लक्ष्य एक स्वतंत्र, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है। इसे अक्सर चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है।
- इस समूह की शुरुआत 2004 की हिंद महासागर सुनामी के दौरान सहयोग से हुई थी और मालाबार अभ्यास जैसी पहलों के माध्यम से यह एक रणनीतिक संवाद में विकसित हुआ।
- वर्तमान में, क्वाड बिना किसी औपचारिक संरचना के एक लचीले “लघुपक्षीय” (Minilateral) मंच के रूप में कार्य करता है, जो सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, प्रौद्योगिकी और अन्य वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग करता है।
F414 फाइटर जेट इंजन
संदर्भ: हाल ही में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, क्योंकि GE एयरोस्पेस और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में F414 फाइटर जेट इंजन के सह-उत्पादन के लिए तकनीकी वार्ता को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- दोनों पक्षों ने तकनीकी वार्ताओं को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे एक वाणिज्यिक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके तहत उत्पादन दो वर्षों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है।
- इस सौदे में उन्नत एयरो-इंजन निर्माण तकनीक का अभूतपूर्व हस्तांतरण शामिल है—कथित तौर पर ~80% तक—जो अमेरिका से भारत को मिलने वाला अपनी तरह का पहला सहयोग है।
- ये इंजन भारत के अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करेंगे, जिनमें HAL तेजस Mk-2 और AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के प्रारंभिक संस्करण शामिल हैं।
- इसके अतिरिक्त, HAL तेजस Mk-1A बेड़े की सहायता के लिए भारत में F404 इंजनों हेतु एक घरेलू MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा स्थापित की जाएगी, जिससे विदेशी मरम्मत पाइपलाइनों पर निर्भरता कम होगी।
F414 Jet इंजन के बारे में
- F414-GE-400 एक आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन है जिसे GE एयरोस्पेस द्वारा विकसित किया गया है। यह पहले के लड़ाकू विमानों में उपयोग किए जाने वाले F404 इंजन का एक उन्नत संस्करण है।
- यह आफ्टरबर्नर के साथ लगभग 98 kN थ्रस्ट (प्रणोद) उत्पन्न करता है। इसका प्रणोद-भार अनुपात (Thrust-to-weight ratio) लगभग 9:1 और दाब अनुपात लगभग 30:1 है, जो उच्च दक्षता और शक्ति घनत्व को दर्शाता है।
- इंजन में FADEC (फुल अथॉरिटी डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल) तकनीक शामिल है, जो सटीक डिजिटल नियंत्रण, बेहतर ईंधन दक्षता और पायलट के कार्यभार को कम करने में सक्षम बनाती है।
- इसमें उन्नत सामग्रियों, थर्मल कोटिंग्स और कूलिंग तकनीकों का उपयोग किया गया है, जो इसकी टिकाऊपन, घटकों के जीवनकाल और उच्च तापमान पर प्रदर्शन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं।
- इसकी एक प्रमुख विशेषता इसका मॉड्यूलर डिजाइन है, जो आसान रखरखाव, पुर्जों को तेजी से बदलने और कम जीवनचक्र लागत की अनुमति देता है—जो परिचालन तत्परता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह इंजन युद्ध-सिद्ध है, जो बोइंग F/A-18 सुपर हॉर्नेट और EA-18G ग्राउलर जैसे विमानों को शक्ति प्रदान करता है, और दशकों से अमेरिकी नौसेना की सेवा में है।
- यह बहु-भूमिका अभियानों का समर्थन करता है, जिससे विमान की रेंज, पेलोड (भार वहन क्षमता), उत्तरजीविता और मिशन लचीलेपन में सुधार होता है।
- इसका उन्नत टिकाऊपन इंजन (EDE) अपग्रेड लगभग 20% अधिक थ्रस्ट या बेहतर ईंधन दक्षता के साथ-साथ कम रखरखाव लागत का विकल्प प्रदान करता है।
वैश्विक वन्यजीव व्यपार और ज़ूनोटिक रोग जोखिम
संदर्भ: ‘साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि वन्यजीवों का वैश्विक व्यापार भले ही वह कानूनी हो या गैर-कानूनी, ज़ूनोटिक स्पिलोवर (पशुओं से मनुष्यों में रोगजनकों का संचरण) को बढ़ा रहा है, जो भविष्य की महामारियों को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न करता है।
मुख्य निष्कर्ष
- बढ़ा हुआ जोखिम: व्यापार किए जाने वाले स्तनधारियों द्वारा मनुष्यों के साथ रोगजनक (वायरस, बैक्टीरिया, कवक, परजीवी) साझा करने की संभावना 1.5 गुना (~50% अधिक) होती है।
- मजबूत साक्ष्य आधार: 2,000 से अधिक स्तनपायी प्रजातियों और 40 वर्षों के वैश्विक व्यापार डेटा (1980-2019) के विश्लेषण से पता चलता है कि व्यापार की जाने वाली 41% प्रजातियां कम से कम एक रोगजनक साझा करती हैं, जबकि व्यापार न की जाने वाली प्रजातियों में यह आंकड़ा केवल 6.4% है।
- व्यापार में समय का प्रभाव: व्यापार में बिताए गए प्रत्येक 10 वर्ष एक अतिरिक्त साझा रोगजनक जोड़ते हैं, जो संचयी ज़ूनोटिक जोखिम का संकेत है।
- जीवित और अवैध व्यापार के हॉटस्पॉट:
- जीवित पशु बाजार: यहाँ रोगजनक विनिमय 1.34–1.5 गुना अधिक होता है।
- अवैध व्यापार: यहाँ रोगजनक साझा करने की संभावना ~1.4 गुना अधिक होती है।
- आपूर्ति श्रृंखला प्रवर्धन: शिकार, प्रजनन, परिवहन, भंडारण और बिक्री मानवीय-पशु संपर्क के कई बिंदु बनाते हैं, जिससे संचरण की संभावना बढ़ जाती है।
- प्रभाव का पैमाना: वन्यजीव व्यापार में विश्व स्तर पर सभी स्तनपायी प्रजातियों का लगभग 25% शामिल है, जो संभावित ज़ूनोटिक पोषितों के दायरे को बढ़ाता है।
- अतिरिक्त कारक: * सिनेनथ्रोपी (Synanthropy): मानवीय वातावरण के अनुकूल होने वाली प्रजातियां।
- जीवों के मांस का उपभोग: एक द्वितीयक लेकिन संबंधित कारक।
- ऐतिहासिक संबंध: एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS), इबोला वायरस, एमपॉक्स (Mpox) और कोविड-19 (COVID-19) जैसी महामारियों का संबंध वन्यजीव-मानव इंटरफेस से रहा है।
- शासन अंतराल: ‘वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन’ (CITES) मुख्य रूप से संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है, न कि ज़ूनोटिक रोग के जोखिम पर।
तिब्बती मृग
संदर्भ: भारत में वन्यजीव कानून प्रवर्तन के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय में, नई दिल्ली की एक अदालत ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन में, गंभीर रूप से लुप्तप्राय तिब्बती मृग के बालों से बनी शहतूश शालों के अवैध निर्यात के प्रयास के लिए जयपुर के एक आर्ट गैलरी मालिक को दोषी ठहराया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- अदालत ने 17 साल पुराने मामले में अपना फैसला सुनाया, जिसकी शुरुआत 2008 में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 1,290 शालों की जब्ती के साथ हुई थी।
- यह मामला इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि यह वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा अभियोजित किया गया पहला वन्यजीव अपराध है।
तिब्बती मृग (Pantholops hodgsonii) के बारे में
- वर्गीकरण और पहचान:
- वैज्ञानिक नाम: Pantholops hodgsonii
- सामान्य नाम: चीरू (तिब्बती मृग)
- यह उच्च ऊंचाई वाले किंगहाई-तिब्बत पठार (Qinghai-Xizang Plateau) का मूल निवासी है।
- मुख्य विशेषताएं:* इसके पास अत्यधिक महीन ‘अंडरफर’ (भीतरी कोमल बाल) होते हैं जिन्हें शहतूश कहा जाता है। यह विश्व के सबसे हल्के और गर्म प्राकृतिक रेशों में से एक है।
- नर मृगों के लंबे और सीधे सींग (लगभग 60 सेमी तक) होते हैं।
- यह –40°C से कम तापमान वाले अत्यधिक ठंडे वातावरण के अनुकूल होते हैं।
- आवास और वितरण: * यह 3,250 से 5,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अल्पाइन स्टेपी और घास के मैदानों में पाए जाते हैं।
- इनका मुख्य गढ़ उत्तर-पश्चिमी तिब्बत का चांगतांग क्षेत्र है।
- यह अत्यधिक प्रवासी जीव हैं, जो मौसम के अनुसार 400 किमी तक की यात्रा करते हैं।
- पारिस्थितिकी और व्यवहार: यह शाकाहारी जीव हैं जो घास और झाड़ियों को खाते हैं।
- यह पोषक तत्व चक्रण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं और हिम तेंदुए तथा भेड़ियों जैसे शिकारियों का समर्थन करते हैं।
- मादाएं विशिष्ट जन्म स्थानों की ओर प्रवास करती हैं; इनके शावक जन्म के कुछ ही मिनटों के भीतर खड़े हो सकते हैं।
- संरक्षण स्थिति और खतरे:
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची I के तहत संरक्षित।
- CITES: 1975 से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध।
- IUCN स्थिति: वर्तमान में ‘निकट संकटग्रस्त‘ के रूप में सूचीबद्ध (आबादी में सुधार हो रहा है लेकिन अभी भी संवेदनशील है)।
- प्रमुख खतरे: अवैध वन्यजीव व्यापार, आवास का विनाश, बुनियादी ढांचे का विस्तार और जलवायु परिवर्तन।
AI शासन और आर्थिक समूह (AIGEG)
संदर्भ: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) शासन के लिए भारत के केंद्रीय संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करने हेतु एक उच्च-स्तरीय अंतर-मंत्रालयी निकाय, AI शासन और आर्थिक समूह (AIGEG) का गठन किया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह कदम भारत के AI गवर्नेंस गाइडलाइंस और आर्थिक सर्वेक्षण में की गई सिफारिशों को औपचारिक रूप देता है।
- दोनों ने AI शासन के लिए एक समन्वित, ‘संपूर्ण-सरकार’ (whole-of-government) दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया था।
- आर्थिक सर्वेक्षण में AI की तैनाती को श्रम बाजार की वास्तविकताओं और सामाजिक स्थिरता के साथ संरेखित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया था।
AI शासन और आर्थिक समूह (AIGEG) के बारे में
- AIGEG भारत के AI शासन ढांचे के भीतर सर्वोच्च अंतर-मंत्रालयी निकाय के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
- यह AI नीति समन्वय के लिए केंद्रीय संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है।
- इसका उद्देश्य मंत्रालयों, नियामकों और सलाहकार निकायों को एक सुसंगत राष्ट्रीय AI रणनीति के तहत लाकर एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करना है
- नेतृत्व और संरचना:
- अध्यक्ष: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री।
- उपाध्यक्ष: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री।
- सदस्यता: इसमें नीति विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और आर्थिक मामलों जैसे सरकारी क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।
- विशेषज्ञ सहायता: इस समूह को एक प्रौद्योगिकी और नीति विशेषज्ञ समिति (TPEC) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो वैश्विक रुझानों, उभरती प्रौद्योगिकियों, जोखिमों और नियामक ढांचों पर विशेषज्ञ इनपुट प्रदान करती है।
AIGEG की संदर्भ की शर्तें
- नीति समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों और नियामकों के बीच AI नीतियों में सामंजस्य स्थापित करना और क्रॉस-सेक्टरल शासन के मुद्दों की निगरानी करना।
- नियामक निरीक्षण: कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना और कानूनी सुधारों के सुझावों के साथ नियामक कमियों की पहचान करना।
- उत्तरदायी AI का संवर्धन: नैतिक AI नवाचार को प्रोत्साहित करना और प्रमुख क्षेत्रों में इसकी तैनाती का समर्थन करना।
- जोखिम और रणनीति: उभरते हुए AI जोखिमों का आकलन करना और वैश्विक AI शासन में भारत की स्थिति को आकार देना।
- श्रम और आर्थिक प्रभाव: AI के कारण नौकरियों में होने वाले व्यवधानों का पूर्वानुमान लगाना और अनौपचारिकता तथा क्षेत्रीय विविधता को ध्यान में रखते हुए शमन एवं संक्रमण रणनीतियां तैयार करना।
- तैनाती रोडमैप: उद्योग के साथ मिलकर 10-वर्षीय AI रोडमैप विकसित करना, जिसमें नौकरियों पर प्रभाव, भूगोल और स्वचालन के स्तरों का विश्लेषण शामिल हो।
- उपयोग-मामला वर्गीकरण: डेटा तत्परता, कौशल, कानूनी ढांचे और श्रम समायोजन क्षमता के आधार पर AI अनुप्रयोगों को ‘परिनियोजन’, ‘पायलट’ या ‘स्थगन’ की श्रेणियों में वर्गीकृत करना।
