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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: विश्व स्वास्थ्य संगठन (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने बच्चों और किशोरों में मोटापे के समेकित प्रबंधन पर पहली वैश्विक दिशा-निर्देशावली जारी की है। इसमें समय पर, व्यक्ति-केंद्रित और आयु के अनुरूप देखभाल के लिए साक्ष्य-आधारित सिफारिशें दी गई हैं।

अन्य संबंधित जानकारी

  • ये दिशा-निर्देश 29 दिन से कम 10 वर्ष की आयु के बच्चों तथा 10–19 वर्ष के किशोरों को शामिल करते हैं।
  • इन दिशा-निर्देशों में आहार संबंधी हस्तक्षेप, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार परिवर्तन, डिजिटल स्वास्थ्य, दवाओं, बेरियाट्रिक सर्जरी और वजन-प्रबंधन उपकरणों के संबंध में सिफारिशें दी गई हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देता है, जिसमें बच्चों, किशोरों और उनकी देखभाल करने वालों की भागीदारी शामिल है।
  • ये दिशा-निर्देश मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण के महत्त्व को भी स्वीकार करते हैं। इसमें कलंक, भेदभाव और डराने-धमकाने (बुलिंग) के प्रभाव शामिल हैं।

दिशा-निर्देशों की आवश्यकता

  • बढ़ता स्वास्थ्य बोझ: बाल्यावस्था में मोटापा टाइप-2 मधुमेह, हृदय-संबंधी रोगों और अन्य गैर-संचारी रोगों का जोखिम बढ़ाता है तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
  • आयु-विशिष्ट देखभाल की आवश्यकता: बच्चों और किशोरों की वृद्धि एवं विकास संबंधी आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए मोटापे के प्रबंधन में आयु के अनुरूप दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
  • साक्ष्य-आधारित उपचार की आवश्यकता: दवाओं, डिजिटल हस्तक्षेपों और शल्य चिकित्सा के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इनके उचित उपयोग के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक हैं।
  • समेकित दृष्टिकोण: मोटापे के प्रबंधन में केवल वजन घटाने पर ध्यान देने के बजाय आहार, शारीरिक गतिविधि, व्यवहार, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण को भी शामिल किया जाना चाहिए।
  • नैदानिक देखभाल से परे: मोटापे से निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और खाद्य प्रणालियों के बीच समन्वित कार्रवाई के माध्यम से स्वस्थ खाद्य विकल्पों और शारीरिक गतिविधि के अनुकूल वातावरण विकसित करना भी आवश्यक है।

बाल्यावस्था में मोटापा: वैश्विक और भारतीय परिदृश्य

  • वैश्विक परिदृश्य: वर्ष 2024 में 5–19 वर्ष की आयु के लगभग 17 करोड़ बच्चे और किशोर मोटापे से ग्रस्त थे।
    • इसमें 5–9 वर्ष की आयु के 7 करोड़ बच्चे और 10–19 वर्ष की आयु के 10 करोड़ किशोर शामिल थे।
  • भारत का परिदृश्य: विश्व मोटापा एटलस 2026 के अनुसार, उच्च बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले बच्चों की संख्या के मामले में भारत, चीन के बाद विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है।
    • वर्ष 2025 में भारत के 5–19 वर्ष की आयु के लगभग 4.1 करोड़ बच्चे उच्च BMI के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे, जिनमें लगभग 1.4 करोड़ बच्चे मोटापे से ग्रस्त थे।
    • इसमें 5–9 वर्ष की आयु के 1.49 करोड़ बच्चे और 10–19 वर्ष की आयु के 2.64 करोड़ किशोर अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे।
    • 11–17 वर्ष की आयु के लगभग 74% किशोर शारीरिक गतिविधि के अनुशंसित स्तर को पूरा नहीं करते हैं। यह निष्क्रिय जीवनशैली को एक महत्त्वपूर्ण चिंता के रूप में रेखांकित करता है।
  • भारत की पहल
    • ऑयल बोर्ड: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अत्यधिक तेल और उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थों के सेवन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विद्यालयों के सार्वजनिक स्थानों पर “ऑयल बोर्ड” लगाने का निर्देश दिया।
    • शुगर बोर्ड: CBSE ने अत्यधिक चीनी के सेवन के प्रति जागरूकता पैदा करने और स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए विद्यालयों में “शुगर बोर्ड” स्थापित करने का निर्देश दिया।
    • ईट राइट स्कूल कार्यक्रम: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) जागरूकता तथा अनुभवात्मक शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से स्कूली बच्चों में सुरक्षित, स्वस्थ और टिकाऊ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देता है।
    • जंक फूड का विनियमन: FSSAI विद्यालयों में तथा विद्यालयों के प्रवेश द्वारों से 50 मीटर के दायरे में वसा, नमक और चीनी की अधिक मात्रा वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री और विपणन पर प्रतिबंध लगाता है।
    • लेट्स फिक्स आवर फूड कंसोर्टियम: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN) के नेतृत्व वाले इस संघ ने वर्ष 2026 का रोडमैप जारी किया, जिसमें पैकेट के सामने पोषण संबंधी लेबलिंग, विद्यालयों में अधिक स्वस्थ भोजन, विपणन पर प्रतिबंध, राजकोषीय उपाय और पोषण साक्षरता शामिल हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों की प्रमुख सिफारिशें

  • जीवनशैली संबंधी हस्तक्षेप: विश्व स्वास्थ्य संगठन मोटापे के प्रबंधन की आधारशिला के रूप में संरचित जीवनशैली संबंधी हस्तक्षेपों को महत्त्व देता है।
    • इनमें स्वस्थ आहार संबंधी हस्तक्षेप, शारीरिक गतिविधि और व्यवहार परिवर्तन संबंधी हस्तक्षेप शामिल हैं।
    • दिशा-निर्देश बहुआयामी हस्तक्षेपों का समर्थन करते हैं, जिनमें किसी एक हस्तक्षेप पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न दृष्टिकोणों को एक साथ अपनाया जाता है।
    • इसका उद्देश्य केवल वजन घटाने के बजाय स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और कल्याण में सुधार करना है।
  • डिजिटल स्वास्थ्य: शारीरिक गतिविधि और व्यवहार परिवर्तन में सहायता के लिए डिजिटल स्वास्थ्य संबंधी हस्तक्षेपों की सशर्त अनुशंसा की गई है। इनके उपयोग के दौरान माता-पिता या देखभालकर्ता का उचित पर्यवेक्षण आवश्यक है।
  • दवाएँ: विश्व स्वास्थ्य संगठन 0–9 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए औषधीय उपचार की अनुशंसा नहीं करता।
    • 10–19 वर्ष के किशोरों के लिए, यदि पर्यवेक्षण में संचालित बहुआयामी जीवनशैली कार्यक्रम से अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं, तो स्वीकृत दवाओं पर विचार किया जा सकता है।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन यह भी रेखांकित करता है कि बच्चों और किशोरों में मोटापे की कुछ नई दवाओं की दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रभावशीलता के संबंध में साक्ष्य अभी सीमित हैं।
  • बेरियाट्रिक सर्जरी: 0–9 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए बेरियाट्रिक सर्जरी की अनुशंसा नहीं की गई है। गंभीर मोटापे से ग्रस्त किशोरों के लिए कड़ी शर्तों के अधीन इस पर विचार किया जा सकता है।
  • वजन-प्रबंधन उपकरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन 0–9 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए वजन-प्रबंधन उपकरणों की अनुशंसा नहीं करता। छोटे बच्चों में मोटापे के प्रबंधन के लिए जीवनशैली-आधारित हस्तक्षेपों को ही केंद्र में रखा गया है।
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