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सामान्य अध्ययन-I (प्रारम्भिक परीक्षा): राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ

सामान्य अध्ययन -3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

संदर्भ: भारत सरकार ने धोलेरा विशेष आर्थिक क्षेत्र में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा देश का पहला सेमीकंडक्टर चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने हेतु एक विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिसूचित किया है।

सेमीकंडक्टर फैब परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ

  • धोलेरा विशेष आर्थिक क्षेत्र को 66.166 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिसमें ₹91,000 करोड़ का प्रस्तावित निवेश है।
  • यह भारत का पहला चिप निर्माण (फैब्रिकेशन) संयंत्र है।
  • यह विशेष आर्थिक क्षेत्र इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और आईटी/आईटीईएस सेवाओं के लिए एकीकृत अवसंरचना प्रदान करने हेतु डिज़ाइन किया गया है।
  • इसमें व्यापार सुगमता सुनिश्चित करने के लिए समर्पित अनुमोदन एवं लॉजिस्टिक तंत्र शामिल है।
  • इस परियोजना को बोर्ड ऑफ अप्रूवल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।
  • यह इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 जैसे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूर्ण सेमीकंडक्टर पारितंत्र का निर्माण करना है।
  • नीतिगत एवं विनियामक सुधार: विशेष आर्थिक क्षेत्र नियम, 2006 (जून 2025) में सेमीकंडक्टर निर्माण के अनुरूप संशोधन किए गए। प्रमुख सुधारों में शामिल हैं:o न्यूनतम भूमि आवश्यकता में कमी (50 → 10 हेक्टेयर)
    • बाध्यता (एन्कम्ब्रेंस) मानकों में शिथिलता
    • शुद्ध विदेशी मुद्रा अर्जन (NFE) में निःशुल्क आपूर्ति को शामिल करना
    • घरेलू शुल्क क्षेत्र (DTA) में शुल्क के भुगतान पर बिक्री की अनुमति
    • इन सुधारों का उद्देश्य उच्च-मूल्य, पूंजी-गहन निवेश को प्रोत्साहित करना तथा व्यापार सुगमता में सुधार करना है।

अन्य स्वीकृत सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र

  1. माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्रा. लि. गुजरात के साणंद में ₹13,000 करोड़ की एटीएमपी इकाई स्थापित कर रही है, जिससे चिप पैकेजिंग क्षमताओं को सुदृढ़ किया जा सके।
  2. हुब्बल्ली ड्यूरेबल गुड्स क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड कर्नाटक के धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक अवयव निर्माण हेतु एक विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित कर रही है।
  3. सीजी सेमी प्रा. लि. सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण को समर्थन देने के लिए ₹2,150 करोड़ की ओसैट सुविधा विकसित कर रही है।
  4. केन्स सेमिकॉन प्रा. लि. ₹681 करोड़ की ओसैट इकाई स्थापित कर घरेलू सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखलाओं को सुदृढ़ कर रही है।

संयंत्र का महत्त्व

  • सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करना: वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 600 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है और 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है; ऐसे में भारत का चिप निर्माण में प्रवेश आपूर्ति शृंखला की लचीलापन बढ़ाता है और बाहरी निर्भरता को कम करता है।
  •  इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पहले ही 115 अरब अमेरिकी डॉलर (2023–24) से अधिक हो चुका है; घरेलू चिप निर्माण स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को समर्थन देगा तथा आयात निर्भरता को कम करेगा।
  • रोजगार एवं कौशल विकास: यह परियोजना लगभग 21,000 उच्च-कौशल रोजगार सृजित करेगी तथा उन्नत अनुसंधान एवं विकास, विशेष प्रशिक्षण और उद्योग-शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करेगी।
  •  वैश्विक मूल्य शृंखलाओं (GVCs) में एकीकरण: यह फैब, एटीएमपी/ओसैट इकाइयों (जैसे माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया प्रा. लि.) के साथ मिलकर भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में स्थापित करता है, जो पूर्वी एशिया और अमेरिका के केंद्रों का पूरक है।
  • उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए समर्थन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विद्युत वाहन, दूरसंचार (5G/6G), रक्षा प्रणालियों और डेटा केंद्रों के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमता अत्यंत आवश्यक है, जिससे यह भविष्य के उद्योगों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनता है।
  • रणनीतिक एवं प्रौद्योगिकीय संप्रभुता: स्वदेशी चिप निर्माण आयात निर्भरता को कम करता है, राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है तथा महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना पर नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
  • पारितंत्र विकास का उत्प्रेरक: यह संयंत्र निर्माण, डिज़ाइन, पैकेजिंग और अवयव निर्माण को जोड़ते हुए एकीकृत सेमीकंडक्टर क्लस्टर के विकास का आधार बनेगा, जिससे भारत के पूर्ण-स्टैक सेमीकंडक्टर पारितंत्र की ओर संक्रमण में तेजी आएगी।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के बारे में

  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन को 2021 में सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत ₹76,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ प्रारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य एक व्यापक सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले पारितंत्र का निर्माण करना है।
  • प्रमुख उद्देश्य:
    • निर्माण एवं विनिर्माण: सेमीकंडक्टर फैब, एटीएमपी/ओसैट इकाइयों तथा डिस्प्ले निर्माण सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
    • डिज़ाइन एवं नवाचार: चिप डिज़ाइन क्षमताओं का विकास, सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स को समर्थन तथा घरेलू बौद्धिक संपदा को सुदृढ़ करना।
    • अनुसंधान एवं विकास: ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और अगली पीढ़ी के चिप्स जैसे क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना।
    • वैश्विक साझेदारी: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखलाओं में एकीकृत करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन, अवसंरचना समर्थन तथा नीतिगत सुविधा प्रदान करना।
    • कौशल विकास और नवाचार के लिए उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना।
    • डिज़ाइन से लेकर विनिर्माण और पैकेजिंग तक संपूर्ण मूल्य शृंखला के निर्माण पर केंद्रित।
  • हालिया विस्तार (आईएसएम 2.0 – बजट 2026):
    • निर्माण से आगे बढ़कर चिप पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सामग्री तथा आपूर्ति शृंखला अवसंरचना को शामिल करता है।
    • भारत में एक पूर्ण-स्टैक, आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर पारितंत्र के निर्माण का लक्ष्य।

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