संदर्भ: हाल ही में, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘संकल्प’, लोक सेवक आवास में विज़न 2030–बिहार मत्स्य प्राथमिकता परियोजना की समीक्षा की। इसके अंतर्गत बिहार के विभिन्न जिलों में विशेष मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।

प्रमुख बिंदु

  • राज्य में स्थानीय संसाधनों एवं संभावनाओं के आधार पर क्षेत्र-विशिष्ट मत्स्य क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।
  • प्रस्तावित प्रमुख क्षेत्रों में सारण एवं मुंगेर में एकीकृत मत्स्य क्लस्टर विकास, सारण में बड़े पैमाने पर मीठे पानी की मछली पालन, सिवान में पिंजरा मत्स्य पालन एवं मत्स्य विकास, मधुबनी में एकीकृत मत्स्य पालन, बेगूसराय, खगड़िया एवं भागलपुर में विशेष मत्स्य क्लस्टर तथा पूर्णिया में बड़े पैमाने पर एकीकृत मत्स्य क्लस्टर शामिल हैं।
  • 1,848.75 हेक्टेयर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप क्षेत्र और 9,357 हेक्टेयर अप्रत्यक्ष प्रभाव क्षेत्र विकसित करने के लिए आठ प्राथमिकता वाली परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
  • इन परियोजनाओं से लगभग 52,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने का लक्ष्य है।
  • मत्स्य निदेशालय के जिला-वार आँकड़ों के अनुसार, बिहार में सरकारी एवं निजी जल निकायों को मिलाकर 93,000 हेक्टेयर से अधिक जल क्षेत्र उपलब्ध है।
  • गंगा, कोसी, गंडक, सोन, बागमती, कमला एवं महानंदा जैसी प्रमुख नदियाँ अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए व्यापक संभावनाएँ प्रदान करती हैं। हालांकि, बाढ़ एवं जल उपलब्धता में मौसमी उतार-चढ़ाव प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
  • बिहार में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत मत्स्य पालन संबंधी योजनाएँ लागू की जा रही हैं, जो उत्पादन, उत्पादकता, फसलोत्तर प्रबंधन, मछुआरों के कल्याण तथा सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देती हैं।

महत्त्व

  • उत्पादकता में वृद्धि: क्लस्टर आधारित इनपुट आपूर्ति, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी एवं विस्तार सेवाओं से मछली उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
  • मूल्य संवर्धन: कोल्ड स्टोरेज, बर्फ संयंत्र, प्रसंस्करण, पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग जैसी सुविधाएँ फसलोत्तर हानि को कम करने तथा किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होंगी।
  • नीली अर्थव्यवस्था: यह पहल नीली अर्थव्यवस्था के अंतर्देशीय मत्स्य पालन घटक को बढ़ावा देती है तथा सतत संसाधन-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में योगदान करती है।

चुनौतियाँ

  • गुणवत्तापूर्ण बीज एवं चारा: रोगमुक्त मत्स्य बीज, प्रमाणित हैचरी तथा किफायती गुणवत्तापूर्ण चारे तक सीमित पहुँच उत्पादकता को प्रभावित कर सकती है।
  • बाढ़ का जोखिम: बाढ़ से तालाबों को नुकसान पहुँच सकता है, मछलियाँ बाहर निकल सकती हैं तथा इनपुट एवं बाजार व्यवस्था बाधित हो सकती है।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: चारे, रसायनों अथवा एंटीबायोटिक्स के अत्यधिक उपयोग से जल की गुणवत्ता एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकते हैं।

बिहार में वास्तविक समय पर अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता के आकलन के लिए एआई का उपयोग

संदर्भ: बिहार ई-हॉस्पिटल (e-Hospital) सॉफ्टवेयर के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में ICU, वार्ड एवं सामान्य बिस्तरों की उपलब्धता की वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • यह प्रणाली सरकारी अस्पतालों में ICU एवं सामान्य बिस्तरों की उपलब्धता की वास्तविक समय में जानकारी प्रदर्शित करेगी।
  • इसके माध्यम से जिला अस्पतालों के चिकित्सक यह पहचान सकेंगे कि गंभीर रोगी को किस अस्पताल में रेफर किया जा सकता है तथा उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र पर बिस्तर एवं चिकित्सक उपलब्ध हैं या नहीं।
  • इस पहल के अंतर्गत लगभग 14,000 स्वास्थ्य संस्थानों को शामिल किया जाएगा, जिनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चिकित्सा महाविद्यालय तथा सरकारी अस्पताल शामिल हैं।
  • इसे राज्य की इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेख प्रणाली के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिससे रोगियों के अभिलेख एवं स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटल प्रबंधन संभव होगा।

डिजिटल स्वास्थ्य घटक

  • आभा (ABHA): नागरिकों के लिए विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान संख्या।
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): एक परस्पर-संचालनीय एवं नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का उद्देश्य रखता है।
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत संचालित होता है तथा इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) की है।
  • स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री (HFR): ABDM का एक आधिकारिक घटक है, जो पूरे भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं की सत्यापित एवं व्यापक सूची उपलब्ध कराता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेख (EHR): रोगी की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड।
  • टेलीमेडिसिन: ऑडियो, वीडियो एवं डिजिटल माध्यमों के जरिए दूरस्थ चिकित्सा परामर्श की सुविधा।
  • आपातकालीन रेफरल नेटवर्क: रोगियों के रेफरल एवं अस्पताल में भर्ती की सुविधा के लिए अस्पतालों को डिजिटल रूप से जोड़ता है।

स्रावाणी: बहुभाषी भारतीय वाक् पहचान मॉडल

संदर्भ: हाल ही में, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने आर्टपार्क (ARTPARK) और गूगल के सहयोग से 65 भारतीय भाषाओं और बोलियों पर प्रशिक्षित एक ओपन-सोर्स स्वचालित भाषण-पहचान मॉडल स्रावाणी 1.0 जारी किया है।

प्रमुख बिंदु

  • स्रवाणी एक स्वचालित वाक् पहचान (ASR) मॉडल है, जो बोले गए शब्दों को लिखित पाठ में परिवर्तित करता है।
  • इसे IISc की स्पायर लैब तथा आर्टपार्क द्वारा प्रोजेक्ट वाणी की व्यापक पहल के अंतर्गत विकसित किया गया है।
  • प्रोजेक्ट वाणी का उद्देश्य भारत के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली प्राकृतिक भाषण सामग्री का एक विशाल खुला ऑडियो डेटासेट तैयार करना है। इसके अंतर्गत अंततः 773 जिलों के लगभग 10 लाख लोगों से 1,50,000 घंटे से अधिक ऑडियो एकत्र करने का लक्ष्य है।
  • यह मॉडल 20 अनुसूचित भाषाओं तथा 45 क्षेत्रीय भाषाओं एवं बोलियों को समर्थन प्रदान करता है।
  • इसे 65 भारतीय भाषाओं एवं बोलियों में लगभग 31,270 घंटे के लिप्यंतरित भाषण डेटा पर सूक्ष्म-प्रशिक्षित किया गया है।
  • यह अंगामी, अंगिका, अवधी, बज्जिका, बेयरी बाशे, भीली, भोजपुरी, बुंदेली, चकहसांग, चकमा, छत्तीसगढ़ी, गारो, गढ़वाली, कोकबोरोक तथा तुलु सहित कई भाषाओं एवं बोलियों को समर्थन देता है।

BCI ने NALSAR ग्रेजुएट्स के खिलाफ़ जारी निर्देश वापस लिया

संदर्भ: हाल ही में, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) ने स्टेट बार काउंसिल्स को NALSAR विधि विश्वविद्यालय, हैदराबाद के 2026 के स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन न करने का निर्देश दिया था। बाद में उसी दिन यह आदेश वापस ले लिया गया और BCI ने स्पष्ट किया कि NALSAR के स्नातक किसी भी स्टेट बार काउंसिल में नामांकन के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र हैं।

कानूनी ढाँचा

  • एडवोकेट्स एक्ट, 1961: यह अधिनियम बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) तथा स्टेट बार काउंसिल्स के गठन का प्रावधान करता है और अधिवक्ताओं के नामांकन एवं व्यावसायिक अभ्यास को विनियमित करता है।
  • धारा 17: प्रत्येक स्टेट बार काउंसिल को अधिवक्ताओं की नामावली तैयार एवं उसका रखरखाव करना अनिवार्य है।
  • धारा 24: अधिवक्ता के रूप में नामांकन के लिए पात्रता निर्धारित करती है, जिसमें नागरिकता संबंधी आवश्यकताएँ, मान्यता प्राप्त विधि डिग्री, स्टेट बार काउंसिल के नियमों का पालन तथा निर्धारित शुल्क का भुगतान शामिल हैं।
  • धारा 25: उम्मीदवार को उस स्टेट बार काउंसिल में नामांकन के लिए आवेदन करना होता है, जिसके अधिकार क्षेत्र में वह अधिवक्ता के रूप में अभ्यास करना चाहता है।
  • किसी अधिवक्ता का एक से अधिक स्टेट बार काउंसिल्स में नामांकन नहीं किया जा सकता है।
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