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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
संदर्भ: एक महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक पहल के तहत, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने, जिसकी अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-III को मार्च 2025 के बाद मार्च 2028 तक जारी रखने के साथ-साथ इसके वित्तीय परिव्यय में वृद्धि को स्वीकृति दी है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- इस निर्णय का उद्देश्य लंबित कार्यों को पूरा करना तथा ग्रामीण सड़क संपर्कता की पूर्ण सामाजिक-आर्थिक क्षमता को साकार करना है।
- इसमें आवासीय क्षेत्रों को ग्रामीण कृषि बाजारों (GrAMs), उच्च माध्यमिक विद्यालयों और अस्पतालों से जोड़ने वाले मार्गों और प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों का समेकन शामिल है।
प्रमुख निर्णय एवं वित्तीय प्रावधान:
- योजना का विस्तार:
- सड़कें एवं पुल (मैदानी क्षेत्र) तथा पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कें: मार्च 2028 तक
- पहाड़ी क्षेत्रों में पुल: समय-सीमा मार्च 2029 तक विस्तारित
- संशोधित परिव्यय:
- ₹80,250 करोड़ से बढ़ाकर ₹83,977 करोड़ किया गया
- लंबित कार्यों का प्रावधान:
- 31 मार्च 2025 से पूर्व स्वीकृत लेकिन अभी तक आवंटित न किए गए परियोजनाओं को अब निविदा एवं क्रियान्वयन हेतु लिया जा सकेगा
- दीर्घ-विस्तार पुल (LSBs):
- पूर्व में स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे 161 दीर्घ-विस्तार पुल (अनुमानित लागत ₹961 करोड़), जो पहले से स्वीकृत सड़कों के संरेखण पर स्थित हैं, उन्हें स्वीकृत कर निविदा/आवंटन किया जा सकेगा
महत्त्व:
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं संपर्कता को बढ़ावा:
- पीएमजीएसवाई-III का विस्तार लक्षित ग्रामीण सड़कों के उन्नयन को पूर्ण करने में सहायक होगा, जिससे इसके सामाजिक-आर्थिक लाभों की पूर्ण प्राप्ति संभव होगी।
- बाजार तक बेहतर पहुँच: कृषि एवं गैर-कृषि उत्पादों के लिए संपर्कता में सुधार, जिससे ग्रामीण व्यापार सुदृढ़ होगा।
- लॉजिस्टिक लागत में कमी: परिवहन समय और लागत में कमी से दक्षता में वृद्धि होगी।
- ग्रामीण आय में वृद्धि: बेहतर बाजार एकीकरण सीधे आय वृद्धि में योगदान देगा।
- सामाजिक अवसंरचना तक पहुँच: शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों तक संपर्कता को सुदृढ़ कर आवश्यक सेवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी, विशेषकर दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में।
- रोजगार सृजन एवं समावेशी विकास:
- प्रत्यक्ष रोजगार: बड़े पैमाने पर निर्माण और अवसंरचना गतिविधियों के माध्यम से।
- अप्रत्यक्ष रोजगार: ग्रामीण उद्यमों, सेवाओं और सहायक क्षेत्रों को बढ़ावा देकर।
- ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करना: ग्रामीण क्षेत्रों को व्यापक अर्थव्यवस्था से जोड़ना।
- सतत विकास पथ: दीर्घकालिक और समावेशी विकास परिणामों को समर्थन।
- दृष्टि समन्वय: विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान।
SOURCES:
Hindu Business Line
PM India
PIB
