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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: पर्यटन मंत्रालय ने नीति आयोग के सहयोग से नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में ‘पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास को गति प्रदान करना’ नामक रिपोर्ट जारी की है।
समाचार के मुख्य बिंदु:
- यह रिपोर्ट ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत के पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विनियमों को सरल बनाने, व्यापार सुगमता को बेहतर करने, निवेश आकर्षित करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है।
- यह रिपोर्ट आवास प्रदाताओं, आतिथ्य प्रतिष्ठानों, होमस्टे, खाद्य एवं पेय सेवाओं, टूर ऑपरेटरों और पर्यटन अवसंरचना परियोजनाओं को विनियमित करने वाले नियमों के विस्तृत मूल्यांकन पर आधारित है।
पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र से संबंधित मुख्य आँकड़े
- वैश्विक पर्यटन परिदृश्य
- वर्ष 2024 में, यात्रा और पर्यटन का वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 10% योगदान रहा और इसने दुनिया भर में हर 10 में से 1 रोजगार को सहायता प्रदान की।
- अंतरराष्ट्रीय पर्यटक व्यय 1.87 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 12% वार्षिक वृद्धि) रहा; वहीं घरेलू पर्यटक व्यय 5.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (रिकॉर्ड स्तर) दर्ज किया गया।
- वर्ष 2035 तक, इस क्षेत्र के 16.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान करने का अनुमान है। इसकी वार्षिक वृद्धि दर 3.5% रहने की संभावना है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की 2.5% अनुमानित वृद्धि दर से अधिक है।
- भारत का पर्यटन क्षेत्र
- वित्त वर्ष 2023–24 में, पर्यटन ने भारत की जीडीपी में 15.73 लाख करोड़ रुपये (लगभग 170 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का योगदान दिया (जीडीपी का 5.22%) और 8.46 करोड़ (84.6 मिलियन) नौकरियों का सृजन किया (पिछले पांच वर्षों में लगभग 20% की वृद्धि)।
- घरेलू पर्यटन विकास का मुख्य चालक बना हुआ है। वर्ष 2024 में 2.9 अरब (2.9 बिलियन) घरेलू पर्यटक दौरे दर्ज किए गए, जो महामारी-पूर्व वर्ष 2019 के 2.3 अरब के शीर्ष स्तर से अधिक हैं।
- भारत में 44 यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल, 106 राष्ट्रीय उद्यान और 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं, साथ ही यहाँ धार्मिक और वेलनेस पर्यटन की भी मजबूत उपस्थिति है।
- वर्ष 2024 में 2.06 करोड़ (20.6 मिलियन) अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन (अनिवासी भारतीयों सहित) दर्ज किए गए और पर्यटन से लगभग 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आय हुई, जो 2023 की तुलना में लगभग 9% की वृद्धि है।
- क्षमता और प्रदर्शन के बीच अंतराल
- अंतरराष्ट्रीय आगमन: वैश्विक अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन में भारत की हिस्सेदारी 1.5% से भी कम है। वर्ष 2024 में विदेशी पर्यटक आगमन (FTAs) 9.95 मिलियन रहा, जो अभी भी महामारी-पूर्व के स्तर से नीचे है और थाईलैंड, मलेशिया तथा वियतनाम जैसे देशों से पीछे है।
- पर्यटन आय: विशाल पर्यटन संपदा होने के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्राप्तियों में भारत (35 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तुर्किये (56.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर), थाईलैंड (42.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) और सऊदी अरब (42 बिलियन अमेरिकी डॉलर) जैसे देशों से पीछे है।

प्रमुख चुनौतियाँ और विनियामक बाधाएँ
- प्रतिबंधात्मक भवन मानदंड: सख्त भवन विनियम निर्माण लागत को बढ़ाते हैं और परियोजना की व्यवहार्यता को कम करते हैं, जिससे भूमि का इष्टतम उपयोग सीमित हो जाता है।
- खंडित लाइसेंसिंग प्रणाली: विभिन्न प्राधिकरणों से कई प्रकार की स्वीकृतियाँ लेने की आवश्यकता के कारण दोहराव, देरी और अनुपालन जटिलताएँ बढ़ती हैं।
- उच्च अनुपालन बोझ: परिचालन लाइसेंसों का बार-बार नवीनीकरण प्रशासनिक लागत को बढ़ाता है और संसाधनों को व्यावसायिक कार्यों से भटकाता है।
- अंतर-राज्य परिवहन बाधाएँ: विभिन्न राज्यों के अलग-अलग कर और परमिट आवश्यकताएँ परिवहन लागत को बढ़ाती हैं और अंतर-राज्यीय पर्यटन की निर्बाध गति में बाधा डालती हैं।
- जटिल वीज़ा प्रक्रियाएँ: लंबी वीज़ा प्रक्रियाएँ और प्रक्रियात्मक अक्षमताएँ विदेशी पर्यटकों को हतोत्साहित करती हैं और अंतरराष्ट्रीय आगमन को सीमित करती हैं।
- आउटबाउंड पर्यटन: आउटबाउंड पर्यटन में तेजी से वृद्धि हुई है। भारतीय यात्रियों द्वारा किया जाने वाला व्यय महामारी-पूर्व के स्तर से लगभग 15% अधिक है, जो घरेलू मांग के ‘लीकेज’ को दर्शाता है।
- यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक (TTDI) 2024: इस सूचकांक में, भारत प्राकृतिक संसाधनों में 6वें और सांस्कृतिक संसाधनों में 9वें स्थान पर है, लेकिन व्यावसायिक वातावरण, पर्यटक सेवा अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय खुलापन के मामलों में अभी भी पीछे है।
रिपोर्ट की मुख्य अनुशंसाएँ
- लाइसेंसिंग को सुव्यवस्थित करना: होटल लाइसेंसों को एकीकृत करके और दोहरे परमिटों को समाप्त करके एक ‘सिंगल-विंडो’ अनुमोदन प्रणाली अपनाना।
- भवन विनियमों का उदारीकरण: लागत कम करने और पर्यटन परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए ‘फ्लोर एरिया रेशियो’ (FAR) और ग्राउंड कवरेज मानदंडों में छूट देना।
- होमस्टे को बढ़ावा देना: ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए कमरों की सीमा बढ़ाना और अनावश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOCs) को हटाना।
- पर्यटक परिवहन में सुधार: अंतर-राज्यीय यात्रा को निर्बाध बनाने के लिए ‘ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट’ (AITP) की वैधता का विस्तार करना और राज्य करों को तर्कसंगत बनाना।
- वीज़ा व्यवस्था को मजबूत करना: अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन को बढ़ाने के लिए ‘वीज़ा-ऑन-अराइवल’ (VoA) का विस्तार करना और ई-वीज़ा प्रक्रिया को सरल बनाना।
- सतत और समावेशी विकास: देश भर में सतत, समावेशी और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देना।
- निजी निवेश को प्रोत्साहित करना: पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में अधिक निजी निवेश को बढ़ावा देना।

