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सामान्य अध्ययन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा।

संदर्भ: भारत 15 जून 2026 को गोवा में ‘वैश्विक पवन दिवस 2026’ सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। यह आयोजन पवन ऊर्जा क्षमता के विस्तार, घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ करने और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाने के लिए देश के रोडमैप को रेखांकित करता है।

वैश्विक पवन दिवस 2026

  • भारत,  गोवा में वैश्विक पवन दिवस 2026′ सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
  • वर्ष 2026 का विषय: “विंड एनर्जी: फ्रॉम एम्बिशन टू एक्सेलरेशन” (Wind Energy: From Ambition to Acceleration)।\
  • सम्मेलन निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहेगा:
    • संसाधन पर्याप्तता और पवन ऊर्जा क्षमता का आकलन।
    • ग्रिड तैयारी और नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण।
    • क्षमता वृद्धि और परियोजना निष्पादन।
    • घरेलू विनिर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता।
    • भारतीय पवन टर्बाइनों के लिए निर्यात के अवसर।
    • पूर्वानुमान और नवीकरणीय ऊर्जा को सुदृढ़ करने वाली तकनीकें।
  • कार्यक्रम के दौरान उद्योग रिपोर्ट “वैश्विक बाजारों के लिए भारत के पवन टरबाइनों के निर्यात को बढ़ाना” जारी की जाएगी।

वैश्विक पवन दिवस के बारे में

  • वैश्विक पवन दिवस प्रतिवर्ष 15 जून को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य पवन ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन से निपटने में इसकी भूमिका को रेखांकित करना है।
  • इसकी शुरुआत मूल रूप से वर्ष 2007 में ‘यूरोपीय पवन ऊर्जा संघ’ द्वारा की गई थी।
  • वर्ष 2009 में, ‘वैश्विक पवन ऊर्जा परिषद’ और ‘विंड यूरोप’ ने इस पहल का विस्तार विश्व स्तर पर किया और इसका नाम बदलकर ‘वैश्विक पवन दिवस’ कर दिया।
  • यह आयोजन सरकारों, उद्योगों, समुदायों, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज को एक मंच पर लाता है ताकि पवन ऊर्जा को एक स्वच्छ, लागत प्रभावी और स्वदेशी ऊर्जा स्रोत के रूप में बढ़ावा दिया जा सके।
  • इसकी गतिविधियों में सम्मेलन, प्रदर्शनियाँ, शैक्षिक अभियान, पवन ऊर्जा संयंत्रों का दौरा और नीतिगत संवाद शामिल हैं।

भारत में पवन ऊर्जा की वर्तमान स्थिति

  • पवन ऊर्जा संसाधन क्षमता: 120 मीटर हब ऊँचाई पर भारत की अनुमानित सकल पवन ऊर्जा क्षमता 695.5 गीगावॉट (GW) है और 150 मीटर हब ऊँचाई पर यह 1,163.9 गीगावॉट है।
    • प्रमुख पवन-संपन्न राज्यों में राजस्थान (284.2 गीगावॉट), गुजरात (180.8 गीगावॉट), महाराष्ट्र (173.9 गीगावॉट), कर्नाटक (169.3 गीगावॉट), आंध्र प्रदेश (123.3 गीगावॉट), तमिलनाडु (95.1 गीगावॉट), मध्य प्रदेश (55.4 गीगावॉट) और तेलंगाना (54.7 गीगावॉट) शामिल हैं।
    • देश भर में 900 से अधिक पवन-निगरानी स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
  • स्थापित क्षमता और विकास: स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत, विश्व में चौथे स्थान पर है।
    • स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता मार्च 2014 के 21.04 गीगावॉट से बढ़कर मार्च 2026 तक 56.09 गीगावॉट हो गई है।
    • 28 गीगावॉट की अतिरिक्त पवन परियोजनाएं कार्यान्वयन के चरण में हैं।
    • भारत ने 2025–26 में 6.05 गीगावॉट की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक पवन क्षमता वृद्धि दर्ज की है।
    • पवन ऊर्जा ग्रिड स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान देती है, जिसमें पीक माँग घंटों के दौरान लगभग 45% उत्पादन होता है।
    • भारत का लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावॉट और 2036 तक 156 गीगावॉट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
  • विनिर्माण इकोसिस्टम: पवन टरबाइन विनिर्माण क्षमता 2014 के 10 गीगावॉट से बढ़कर 2026 में लगभग 24 गीगावॉट हो गई है।
    • इस क्षेत्र ने प्रमुख घटकों में 70–80% स्वदेशीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

पवन ऊर्जा विकास के लिए सरकार की पहल

  • राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति, 2018: यह नीति पवन और सौर संसाधनों, पारेषण अवसंरचना और भूमि के इष्टतम उपयोग के लिए बड़े ग्रिड-कनेक्टेड पवन-सौर हाइब्रिड प्रणालियों को बढ़ावा देती है।
  • अपतटीय पवन ऊर्जा नीति, 2015: यह नीति अपतटीय पवन परियोजनाओं के विकास को सुगम बनाती है, गुजरात और तमिलनाडु में अपतटीय क्षमता पर ध्यान केंद्रित करती है, और भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर सर्वेक्षण, पट्टे और परियोजना विकास के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।
  • 1,000 मेगावाट (MW) की अपतटीय पवन परियोजनाओं के लिए ₹6,853 करोड़ की व्यवहार्यता अंतराल निधि (VGF) स्वीकृत की गई है, जिसमें गुजरात और तमिलनाडु के तटों से 500-500 मेगावाट की परियोजनाएं शामिल हैं।
  • वर्ष 2025–26 के दौरान उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (GBI) योजना के तहत ₹500 करोड़ का संवितरण किया गया।
  • कॉन्ट्रैक्ट्स फॉर डिफरेंस (CfD) के तहत 500 मेगावाट की एक पायलट परियोजना शुरू की गई।
    • CfD एक ऐसा तंत्र है जिसे मूल्य अस्थिरता को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स को राजस्व सुनिश्चितता प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।

पवन ऊर्जा में वैश्विक भागीदारी

  • भारत–ब्रिटेन (UK): विज़न 2035 और चौथे भारत-ब्रिटेन ऊर्जा संवाद के तहत फरवरी 2026 में ‘भारत–ब्रिटेन अपतटीय पवन टास्कफोर्स’ का शुभारंभ किया गया। यह बाजार डिजाइन, बंदरगाह अवसंरचना, आपूर्ति श्रृंखला और मिश्रित वित्त पर केंद्रित है।
  • भारत–बेल्जियम: विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 में, भारत और बेल्जियम ने अपतटीय पवन ऊर्जा, अनुसंधान एवं विकास और ग्रीन टैक्सोनॉमी  में सहयोग की पुष्टि की।
  • भारत–डेनमार्क: डेनमार्क के साथ भारत का अपतटीय पवन ऊर्जा सहयोग में क्षमता निर्माण, विद्युत प्रणाली मॉडलिंग, परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा  का एकीकरण और संयुक्त विशेषज्ञ प्रशिक्षण शामिल है। इस सहयोग की शुरुआत 2019 के एक समझौते और मई 2025 में हस्ताक्षरित नवीनीकृत समझौता ज्ञापन के माध्यम से हुई थी।

Sources :
PIB
The Hans India
GWEC
Economic Times

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