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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा।

संदर्भ: भारत ने केंद्रीय मोटर यान नियम, 1989 में संशोधनों को प्रस्तावित किया है ताकि E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रणों के अनुकूल वाहनों को सक्षम बनाया जा सके। यह कदम 100% इथेनॉल-आधारित ईंधन इकोसिस्टम की ओर बढ़ने का संकेत है।

संशोधन के मुख्य बिंदु

  • इस मसौदे में वाहन उत्सर्जन और ‘टाइप-अप्रूवल’ मानकों के अंतर्गत E85 (85% इथेनॉल) और E100 (लगभग शुद्ध इथेनॉल) जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रणों को औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।
  • गैसोलीन अनुकूलता मानदंडों को E10 से बढ़ाकर E20 कर दिया गया है, जिसमें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप E25, E27 और E35 जैसे उच्च मिश्रणों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं।
  • बायोडीजल के वर्गीकरण को B10 से बढ़ाकर B100 कर दिया गया है, जिससे 100% बायोडीजल ईंधन के उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
  • स्पष्टता और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए हाइड्रोजन ईंधन शब्दावली को “हाइड्रोजन+CN” से संशोधित कर “हाइड्रोजन +CNG” कर दिया गया है।
  • उत्सर्जन मानकों के अंतर्गत सकल वाहन भार (GVW) की सीमा को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दिया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय हल्के वाणिज्यिक वाहन मानकों के अनुरूप है।
  • उत्सर्जन मेट्रिक्स में सुधार किया गया है (Mg/kWh के स्थान पर mg/kWh), और ‘वर्ल्ड-हार्मोनाइज्ड नॉट-टू-एक्सीड’ (WNTE) उत्सर्जन सीमा को 60 से संशोधित कर 600 कर दिया गया है।
  • ये संशोधन सभी श्रेणियों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए नियामक मार्ग प्रशस्त करते हैं, जिनमें दुपहिया वाहन, यात्री वाहन और भारी शुल्क वाले परिवहन वाहन शामिल हैं।
  • अंतिम रूप दिए जाने से पहले, यह मसौदा 30 दिनों के लिए सार्वजनिक परामर्श हेतु उपलब्ध है।

इथेनॉल सम्मिश्रण के बारे में

  • इथेनॉल सम्मिश्रण: उत्सर्जन को कम करने और जीवाश्म ईंधन को आंशिक रूप से प्रतिस्थापित करने के लिए इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है।
  • मिश्रण का अनुपात: E10 में 10% इथेनॉल होता है, जबकि E20 में 20% इथेनॉल होता है।
    • E20 (इथेनॉल 20): यह 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल है। यह एक जैव-ईंधन है जो आमतौर पर गन्ने, मक्का या अधिशेष अनाज से प्राप्त किया जाता है।
  • इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP): इस कार्यक्रम ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में भी सहायता की है।
    • वैकल्पिक और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने तथा भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए जनवरी 2003 में इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम शुरू किया गया था।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत ने पेट्रोल प्रतिस्थापन के माध्यम से 2014–15 से अब तक ₹1.40 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत की है।
  • भारत ने जून 2022 में समय से पहले ही पेट्रोल में 10% इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया था। इसके पश्चात, 20% सम्मिश्रण के लक्ष्य को 2030 से घटाकर 2025–26 कर दिया गया है। देश के कई हिस्सों में कई ईंधन स्टेशनों पर पहले से ही E20 की बिक्री की जा रही है।
  • COP26 में घोषित अपनी ‘पंचामृत’ रणनीति के हिस्से के रूप में, भारत 2030 तक अपनी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को (2005 के स्तर से) 45% कम करने और 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net-Zero) उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इथेनॉल सम्मिश्रण के लिए सरकार की पहल  

  • इथेनॉल सम्मिश्रण रोडमैप (2020–25): वर्ष 2021 में “भारत में इथेनॉल सम्मिश्रण हेतु रोडमैप 2020–25” जारी किया गया था, जो 20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
  • प्रधानमंत्री जी-वन (JI-VAN) योजना: प्रधानमंत्री जी-वन (जैव ईंधन-वातावरण अनुकूल फसल अवशेष निवारण) योजना लिग्नोसेल्युलोसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक का उपयोग करने वाली एकीकृत बायोइथेनॉल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018: इसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता का समर्थन करने के लिए नवीकरणीय फीडस्टॉक से घरेलू जैव ईंधन उत्पादन को बढ़ावा देना है। साथ ही, इसके माध्यम से 20% इथेनॉल और 5% बायोडीजल सम्मिश्रण के लक्ष्यों को प्राप्त करना है।
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