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सामान्य अध्ययन-2: भारत और उसके पड़ोसी संबंध; भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव, प्रवासी भारतीय।

संदर्भ: म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने 30 मई से 3 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की। यह अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा है।

अन्य संबंधित जानकारी 

• राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा के लिए चीन के स्थान पर भारत का चयन भारत-म्यांमार संबंधों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है और बदलते क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच म्यांमार के साथ जुड़ने के प्रति भारत के व्यावहारिक दृष्टिकोण की सफलता को दर्शाता है।

• भारत ने एक स्थिर, शांतिपूर्ण और समृद्ध म्यांमार के लिए अपने समर्थन को दोहराया तथा समावेशी राजनीतिक सुलह और विकास-प्रेरित जुड़ाव की आवश्यकता पर बल दिया।

• दोनों पक्षों ने बिम्सटेक (BIMSTEC), आसियान (ASEAN) से जुड़े तंत्रों और मेकांग-गंगा सहयोग ढांचे सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग की समीक्षा की।

यात्रा के मुख्य परिणाम 

• संपर्क (कनेक्टिविटी) सहयोग: दोनों पक्षों ने कलादान मल्टी-मॉडल पारगमन परिवहन परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग की प्रगति की समीक्षा की तथा क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए उनके क्रियान्वयन को गति देने पर सहमति व्यक्त की।

• व्यापार और आर्थिक सहयोग: दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, अवसंरचना, कृषि, ऊर्जा और सीमा व्यापार में सहयोग को प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर और म्यांमार के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।

• सुरक्षा और रक्षा सहयोग: म्यांमार ने भारत को आश्वासन दिया कि उसके क्षेत्र का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा और उग्रवाद, आतंकवाद तथा अन्य सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

• विकास साझेदारी और क्षमता निर्माण: भारत ने विकास परियोजनाओं, सीमा क्षेत्र विकास पहल, त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (QIPs), क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) ढांचे के तहत प्रशिक्षण के माध्यम से म्यांमार के लिए अपने समर्थन को दोहराया।

• मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण: भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्म’ के तहत पहले से विस्तारित सहायता को आगे बढ़ाते हुए, भूकंप के बाद म्यांमार की रिकवरी, पुनर्वास और पुनर्निर्माण प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

• सांस्कृतिक और सभ्यतागत सहयोग: दोनों देशों ने अपनी साझा बौद्ध विरासत पर बल दिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, धार्मिक पर्यटन तथा लोगों से लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।

भारत के लिए म्यांमार का महत्व 

• दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार: म्यांमार, आसियान (ASEAN) के लिए भारत के ‘लैंड ब्रिज’ (स्थल सेतु) के रूप में कार्य करता है और इसका ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के कार्यान्वयन में एक केंद्रीय स्थान है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के जुड़ाव को सुगम बनाता है।

• पूर्वोत्तर भारत के लिए रणनीतिक महत्व: भारत के चार पूर्वोत्तर राज्यों के साथ 1,600 किलोमीटर से अधिक की सीमा साझा करने वाला म्यांमार, क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक एकीकरण को बढ़ाने के साथ-साथ भारत में उग्रवाद, सीमा पार आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों की तस्करी जैसी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

• चीन के प्रभाव को संतुलित करना: भारत-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में म्यांमार एक धुरी पर स्थित है और भारत के निकटतम पड़ोस तथा बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में चीन के अत्यधिक प्रभाव को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।

• समुद्री और हिंद-प्रशांत महत्व: बंगाल की खाड़ी के साथ म्यांमार की रणनीतिक तटरेखा भारत के ‘सागर’ (SAGAR – सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) दृष्टिकोण, सामुद्रिक सुरक्षा ढांचे और व्यापक हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए इसके महत्व को बढ़ाती है।

• संसाधन और आर्थिक सुरक्षा: म्यांमार के पास प्राकृतिक गैस, दुर्लभ मृदा तत्वों और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं, जो इसे ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के भारत के प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाते हैं।

भारत–म्यांमार द्विपक्षीय संबंध

• राजनीतिक संबंध

  • भारत और म्यांमार गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध साझा करते हैं तथा दोनों के बीच नियमित उच्च स्तरीय राजनीतिक वार्ताएं होती रहती हैं।
  • म्यांमार, आसियान का एकमात्र ऐसा देश है जो भारत के साथ स्थल सीमा साझा करता है और इसका भारत की ‘पड़ोसी प्रथम नीति’, ‘एक्ट ईस्ट नीति’ तथा हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण में केंद्रीय स्थान है।

• आर्थिक संबंध

  • भारत, म्यांमार के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है, जिसके बीच द्विपक्षीय व्यापार ‘आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते’ (AITIGA) और भारत की ‘शुल्क-मुक्त टैरिफ वरीयता’ (DFTP) योजना के तहत संचालित होता है।
  • म्यांमार में भारत की निवेश उपस्थिति लगातार बढ़ रही है, विशेष रूप से तेल और गैस, विद्युत और अवसंरचना क्षेत्रों में, जहाँ ऊर्जा सहयोग दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

• संपर्क  (कनेक्टिविटी) संबंध

  • म्यांमार, एकमात्र ऐसा आसियान देश है जो भारत से स्थल और सामुद्रिक दोनों सीमाओं के माध्यम से जुड़ा हुआ है। इस प्रकार यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है।
  • कलादान मल्टी-मॉडल पारगमन परिवहन परियोजना और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग भारत की क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का आधार हैं।

• रक्षा और सुरक्षा सहयोग

  • भारत और म्यांमार उग्रवाद, सीमा पार आतंकवाद, अवैध प्रवासन, मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों की तस्करी से निपटने में निकटता से सहयोग करते हैं।
  • म्यांमार ने सीमा पर सक्रिय उग्रवादी गुटों, जैसे कि NSCN-K और ULFA के विरुद्ध भारत के प्रयासों का समर्थन किया है, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने ठिकाने बना रखे थे।

• सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध

  • बौद्ध धर्म दोनों देशों के बीच एक प्रमुख सभ्यतागत सेतु के रूप में कार्य करता है और मजबूत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को बढ़ावा देता है।
  • धार्मिक पर्यटन, शैक्षणिक आदान-प्रदान, छात्रवृत्तियाँ और सांस्कृतिक सहयोग लोगों से लोगों के बीच संपर्कों को निरंतर बढ़ावा दे रहे हैं।
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