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संदर्भ: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक अधिसूचना का मसौदा जारी किया है, जिसमें 1 अक्टूबर 2028 से निर्दिष्ट मोटर वाहनों में वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य रूप से अपनाने का प्रस्ताव है।
पृष्ठभूमि
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए वाहन-से-सर्व (V2X) संचार पर विशेष ध्यान देते हुए बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों (ITS) के लिए रूपरेखा विकसित करने हेतु एक कार्यबल का गठन किया था।
- कार्यबल ने 3GPP-आधारित सेलुलर वाहन-से-सर्व (C-V2X) तकनीक, 5.875–5.925 GHz (5.9 GHz) स्पेक्ट्रम बैंड के उपयोग तथा V2V के कार्यान्वयन के लिए सक्षम नियामक ढाँचे को अपनाने की सिफारिश की।
- इसके बाद, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने V2X संचार के लिए नियामक ढाँचे पर एक परामर्श पत्र जारी किया, जिसमें स्पेक्ट्रम आवंटन, अंतःसंचालनीयता, लाइसेंसिंग तथा साइबर सुरक्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया।
- वर्तमान प्रारूप अधिसूचना इन नीतिगत पहलों को क्रियान्वित करते हुए मोटर वाहनों में वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणालियों की चरणबद्ध तैनाती को प्रस्तावित करती है।
अधिसूचना के मसौदे की प्रमुख विशेषताएँ
- दो चरणों में क्रियान्वयन:
- 1 अक्टूबर 2027 से: यदि नवनिर्मित L, M और N श्रेणी के वाहनों में V2V संचार प्रणाली लगी है, तो उन्हें AIS-230 के अनुरूप होना अनिवार्य होगा।
- 1 अक्टूबर 2028 से: नवनिर्मित L, M और N श्रेणी के वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V संचार प्रणालियाँ लगाना अनिवार्य होगा।
- केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत, L दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों, M कम-से-कम चार पहियों वाले यात्री वाहनों तथा N मालवाहक वाहनों को दर्शाता है।
- सड़क सुरक्षा का उद्देश्य: V2V प्रणालियाँ वाहनों को वास्तविक समय में सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान करने तथा आपातकालीन ब्रेक चेतावनी, आगे की टक्कर की चेतावनी, गलत दिशा में वाहन चलाने की चेतावनी और आपातकालीन वाहन चेतावनी जैसी स्थितियों के लिए अग्रिम चेतावनी प्रदान करने में सक्षम बनाएँगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में सहायता मिलेगी।
- AIS-230 मानक: यह 5.875–5.925 GHz आवृत्ति बैंड में सेलुलर वाहन-से-सर्व (C-V2X) तकनीक का उपयोग करने वाली कारखाने में स्थापित ऑन-बोर्ड इकाइयों (OBUs) के लिए न्यूनतम तकनीकी, कार्यात्मक, रेडियो प्रदर्शन, पर्यावरणीय एवं साइबर सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करता है।
- सक्षम नियामक ढाँचा: यह प्रस्ताव ITS/V2X अनुप्रयोगों के लिए 5.875–5.925 GHz आवृत्ति बैंड के लाइसेंस-मुक्त उपयोग के बाद लाया गया है तथा अंतिम अधिसूचना से पहले हितधारकों के परामर्श के लिए जारी किया गया है।
वाहन-से-वाहन (V2V) संचार को समझना
- परिचय: वाहन-से-वाहन (V2V) संचार एक वायरलेस तकनीक है, जो आसपास के वाहनों को स्थिति, गति, दिशा, त्वरण एवं ब्रेक लगाने की स्थिति जैसी वास्तविक समय की सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाती है। इसमें ऐसी सुरक्षा संबंधी जानकारी भी शामिल होती है जो चालक की प्रत्यक्ष दृष्टि-सीमा से बाहर हो सकती है।
- कार्यप्रणाली: कारखाने में स्थापित ऑन-बोर्ड इकाइयों (OBUs) से युक्त वाहन सेलुलर वाहन-से-सर्व (C-V2X) तकनीक का उपयोग करके लगातार वास्तविक समय की सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इससे संभावित टक्कर के जोखिम का समय रहते पता लगाने में सहायता मिलती है।
- प्रमुख लाभ:
- वाहन में लगे सेंसर तथा चालक की दृष्टि-सीमा से आगे परिस्थितिजन्य जागरूकता का विस्तार करता है।
- सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के समय पर आदान-प्रदान के माध्यम से सहकारी टक्कर-निवारण को सक्षम बनाता है।
- वाहन सुरक्षा प्रणालियों के पूरक के रूप में कार्य करते हुए सक्रिय दुर्घटना-रोकथाम में सहायता करता है।
- V2X इकोसिस्टम का हिस्सा: V2V व्यापकवाहन-से-सर्व (V2X) पारिस्थितिकी तंत्र का एक घटक है। इसमेंवाहन-से-अवसंरचना (V2I), वाहन-से-पैदल यात्री (V2P) तथा वाहन-से-नेटवर्क (V2N) संचार भी शामिल हैं। ये सभी मिलकरकनेक्टेड एवं बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों (C-ITS) की आधारशिला बनाते हैं।

V2V संचार प्रणालियों का महत्व
- भारत की सड़क सुरक्षा चुनौती का समाधान: संभावित खतरों की समय पर चेतावनी देकर सहकारी टक्कर-निवारण को सक्षम बनाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं एवं मृत्यु की घटनाओं को कम करने में सहायता मिलती है।
- उन्नत चालक सहायता प्रणालियों (ADAS) का पूरक: चालक की प्रत्यक्ष दृष्टि-सीमा से बाहर की जानकारी उपलब्ध कराकर वाहन में लगे सेंसरों की क्षमता बढ़ाता है तथा सक्रिय दुर्घटना-रोकथाम में सहायता करता है।
- कनेक्टेड परिवहन को क्रियान्वित करना: कनेक्टेड एवं बुद्धिमान परिवहन प्रणालियों (C-ITS) को लागू करने की दिशा में भारत की पहली प्रमुख नियामक पहल है तथा भविष्य के कनेक्टेड एवं स्वचालित परिवहन के लिए संचार आधार तैयार करती है।
- स्वदेशी ऑटोमोबाइल नवाचार को बढ़ावा: C-V2X तकनीक, वाहन संचार मॉड्यूल तथा बुद्धिमान परिवहन समाधानों के घरेलू विकास को प्रोत्साहित करता है, जिससे मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलता है।
V2V संचार प्रणालियों के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ
- मानकीकरण एवं अंतःसंचालनीयता: विभिन्न निर्माताओं के वाहनों के बीच सुचारु संचार सुनिश्चित करने के लिए सामंजस्यपूर्ण तकनीकी मानकों एवं संचार प्रोटोकॉल की आवश्यकता।
- साइबर सुरक्षा एवं डेटा गोपनीयता: कनेक्टेड वाहनों को साइबर हमलों, डेटा में हेरफेर, अनधिकृत पहुँच तथा वाहन-जनित डेटा के दुरुपयोग से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता।
- क्रियान्वयन की तैयारी: V2V संचार के व्यापक विस्तार के लिए AIS-230 के अनुरूप हार्डवेयर, परीक्षण एवं प्रमाणन अवसंरचना तथा उद्योग-स्तरीय तैयारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
- क्रमिक नेटवर्क प्रभाव: V2V संचार के पूर्ण सुरक्षा लाभ तभी प्राप्त होंगे जब पर्याप्त संख्या में वाहन V2V-सक्षम हो जाएँ। प्रारंभिक चरण में पुराने वाहनों की मौजूदगी इसकी प्रभावशीलता को सीमित कर सकती है।
आगे की राह
- चरणबद्ध उद्योग तैयारी सुनिश्चित करना: अक्टूबर 2028 से प्रस्तावित चरणबद्ध अनिवार्यता के सुचारु क्रियान्वयन के लिए AIS-230 के अनुरूप समयबद्ध परीक्षण, प्रमाणन एवं अनुपालन सुनिश्चित करना।
- सम्पूर्ण V2X इकोसिस्टम विकसित करना: सड़क सुरक्षा के अधिकतम लाभ के लिए V2V संचार को वाहन-से-अवसंरचना (V2I) प्रणालियों, बुद्धिमान यातायात प्रबंधन तथा स्मार्ट सिटी अवसंरचना के साथ एकीकृत करना।
- साइबर सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करना: कनेक्टेड वाहनों के लिए कूटलेखन, प्रमाणीकरण, सुरक्षित सॉफ्टवेयर अपडेट, डेटा संरक्षण तथा दायित्व निर्धारण से संबंधित मजबूत मानक विकसित करना।
- स्वदेशी अनुसंधान एवं विनिर्माण को बढ़ावा देना: ऑन-बोर्ड इकाइयों (OBUs), संचार मॉड्यूल तथा ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स के घरेलू अनुसंधान, परीक्षण एवं विनिर्माण को प्रोत्साहित कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कनेक्टेड परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
