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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: नीति आयोग ने ट्रेड वॉच क्वार्टरली का नौवाँ संस्करण जारी किया है, जिसमें वैश्विक और घरेलू व्यापार के रुझानों तथा भारत के धातु एवं अयस्क क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला गया है।
रिपोर्ट के बारे में
• यह रिपोर्ट भू-राजनीतिक और व्यापार नीति से संबंधित अनिश्चितताओं के बीच वैश्विक और घरेलू व्यापार में होने वाले विकास का आकलन प्रस्तुत करती है तथा इसमें भारत के धातु एवं अयस्क व्यापार पर विशेष ध्यान दिया गया है।
• रिपोर्ट भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता, बढ़ती आयात निर्भरता तथा घरेलू मूल्य संवर्धन, महत्वपूर्ण खनिज क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण के अवसरों का परीक्षण करती है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
• वैश्विक और भारतीय व्यापार प्रदर्शन: 2026 की पहली छमाही में वैश्विक वस्तु व्यापार 13.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें वर्ष-दर-वर्ष 12.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सेवा व्यापार में 10.5% की वृद्धि हुई।
- वित्त वर्ष 2026–27 की पहली तिमाही में भारत का कुल व्यापार 506.9 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें वर्ष-दर-वर्ष 15.5% की वृद्धि दर्ज की गई।
- भारत का डिजिटल रूप से प्रदत्त सेवाओं का निर्यात 2024 के 277 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 317 बिलियन डॉलर हो गया। इसके साथ भारत डिजिटल रूप से प्रदत्त सेवाओं का विश्व का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया, अमेरिका, ब्रिटेन और आयरलैंड के बाद।
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA) वाले साझेदार देशों के साथ व्यापार में निर्यात में 36.3% और आयात में 10% की वृद्धि दर्ज की गई।
• धातु निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता: धातुओं और अयस्कों का वैश्विक आयात 2015 के 1.2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर हो गया। हालाँकि, वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी केवल मामूली रूप से बढ़कर 1.7% से 1.8% हुई।
- 2025 में भारत का धातु एवं अयस्क निर्यात लगभग 36.8 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें धातुओं और उनसे बनी वस्तुओं का योगदान 34.8 बिलियन डॉलर था।
- लोहा एवं इस्पात, लोहे एवं इस्पात से बनी वस्तुएँ तथा एल्युमीनियम ने 2025 में भारत के धातु निर्यात का लगभग 78% हिस्सा बनाया।
- भारत का निर्यात अभी भी पारंपरिक धातु क्षेत्रों में केंद्रित है, जबकि वैश्विक मांग तेजी से उच्च-मूल्य वाली अलौह धातुओं और महत्वपूर्ण खनिजों की ओर बढ़ रही है।
- 2025 में भारत का तांबा निर्यात 2.9 बिलियन डॉलर रहा, जो तांबे और तांबे से बनी वस्तुओं के वैश्विक आयात का लगभग 1.1% था।
- एल्युमीनियम निर्यात 2015 के 2.7 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 6.8 बिलियन डॉलर हो गया, जिससे वैश्विक एल्युमीनियम मांग में भारत की हिस्सेदारी 1.7% से बढ़कर 2.6% हो गई।
- वैश्विक सीसा मांग में भारत की हिस्सेदारी 12.1% रही, जिसे उसके पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र से बल मिला।
• आयात पर बढ़ती निर्भरता: भारत का धातु एवं अयस्क आयात 2015 के 32.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 60.5 बिलियन डॉलर हो गया, जिसका प्रमुख कारण औद्योगिक और अवसंरचनात्मक मांग में वृद्धि है।
- तांबे का आयात 2015 के 3.2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 11.8 बिलियन डॉलर हो गया।
- भारत अपनी तांबा अयस्क और सांद्रण की लगभग 96% आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है।
- भारत निकल, कोबाल्ट और लिथियम के लिए अभी भी 100% आयात पर निर्भर है।
- 2000 से 2025 के बीच खनन क्षेत्र में संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) इक्विटी प्रवाह केवल 3.5 बिलियन डॉलर रहा।
रिपोर्ट की सिफारिशें
• खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देना: भूवैज्ञानिक आँकड़ों में सुधार करना, अन्वेषण को बढ़ावा देना तथा खनिज ब्लॉकों की नीलामी और उनके परिचालन में तीव्रता लाना।
• घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना: महत्वपूर्ण खनिजों और उच्च-मूल्य वाली अलौह धातुओं के लिए घरेलू प्रसंस्करण तथा विशेषीकृत विनिर्माण क्षमताओं का विकास करना।
• आयात निर्भरता को कम करना: महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय कंपनियों को विदेशों में खनिज संसाधन सुरक्षित करने में सहायता प्रदान करना।
• निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करना: लॉजिस्टिक्स और निर्यात-वित्त की लागत को कम करना तथा उद्योगों के लिए नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुँच का विस्तार करना।
• वैश्विक व्यापार चुनौतियों का समाधान करना: यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र के लिए तैयारी को बेहतर करना तथा मुक्त व्यापार समझौतों के अंतर्गत अधिक कठोर मूल-नियम बनाना
• नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना: निवेश को प्रोत्साहित करने तथा भारत के वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण को बढ़ाने के लिए खनन और वन संबंधी स्वीकृति प्रक्रियाओं को सुचारू बनाना।
