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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।

संदर्भ: हाल ही में, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने 19-21 अप्रैल, 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा की, जिसके परिणामस्वरूप भारत-ROK (कोरिया गणराज्य) विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए ‘संयुक्त रणनीतिक विजन (2026-2030)’ को अपनाया गया।

अन्य संबंधित जानकारी:

• इस यात्रा का उद्देश्य कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ को सुदृढ़ करना था।

• चर्चा व्यापार, निवेश, जहाज निर्माण, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रही।

• दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जो शांति और स्थिरता के लिए उनके साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

• यह यात्रा वैश्विक आर्थिक बदलावों और भू-राजनीतिक तनावों के संदर्भ में भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।

यात्रा के मुख्य परिणाम

• रणनीतिक और संस्थागत परिणाम: संबंधों को एक “भविष्योन्मुखी साझेदारी” में बदलने के लिए एक ‘संयुक्त रणनीतिक विजन’ को अपनाया गया।

  • लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करने के लिए ‘आर्थिक सुरक्षा संवाद’ का शुभारंभ किया गया।
  • उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश के समन्वय हेतु एक ‘औद्योगिक सहयोग समिति’ की स्थापना की गई।
  • जलवायु परिवर्तन, आर्कटिक शासन और समुद्री सहयोग जैसे वैश्विक मुद्दों पर ‘विदेश मंत्रालय संवाद’ की शुरुआत की गई।
  • उप-मंत्री स्तर पर ‘2+2 संवाद’ (रक्षा और विदेश मामले) शुरू करने पर सहमति बनी।

• आर्थिक और व्यापारिक परिणाम: द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में $27 बिलियन है, जिसे 2030 तक $50 बिलियन तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

  • गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने, ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ (rules of origin) में ढील देने और बाजार पहुंच विस्तार पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मध्य-2027 तक भारत-दक्षिण कोरिया CEPA को उन्नत करने का निर्णय लिया गया।
  • वित्तीय प्रवाह को सुगम बनाने के लिए ‘इंडिया-कोरिया फाइनेंशियल फोरम’ का शुभारंभ।
  • भारत में विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए एक ‘कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप’ की स्थापना।

• प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डिजिटल नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग के लिए ‘इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज’ का शुभारंभ।

  • जहाज निर्माण और समुद्री रसद (जिसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना गया), बंदरगाह सहयोग, इस्पात आपूर्ति श्रृंखला और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • जहाज निर्माण को औद्योगिक सहयोग के एक नए स्तंभ के रूप में मान्यता दी गई।
  • ‘भारत-ROK वार्षिक इस्पात संवाद’ की स्थापना और POSCO-JSW सहयोग।
  • रक्षा प्रौद्योगिकियों में नवाचार के लिए ‘कोरिया-इंडिया डिफेंस एक्सीलरेटर’ (KIND-X) का शुभारंभ।
  • अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार (ISRO-KASA संयुक्त कार्य समूह)।

• ऊर्जा, जलवायु और स्थिरता: ऊर्जा संसाधन सुरक्षा और स्थिरता सहयोग पर संयुक्त बयान।

  • पुनर्चक्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण सहित महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग।
  • पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत सहयोग सहित जलवायु और पर्यावरण पर समझौता ज्ञापन।
  • दक्षिण कोरिया ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’ (ISA) और ‘हिंद-प्रशांत महासागर पहल’ (IPOI) में शामिल हुआ।
  • भारत ‘ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट’ में शामिल हुआ।

• सांस्कृतिक और जन-केंद्रित पहल: ‘भारत-ROK मैत्री वर्ष’ (2028–29) की घोषणा।

  • ‘सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम’ (2026–2030) का शुभारंभ।
  • अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और राजा किम सूरो की पौराणिक कथा के माध्यम से ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों की पुन: पुष्टि की गई।

• वित्तीय और संस्थागत समझौते: IFSCA (अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण) और कोरियाई वित्तीय नियामकों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) तथा NPCI इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और कोरियाई क्लियरिंग सिस्टम के बीच समझौता।

  • ‘डिस्टिंग्विश्ड विजिटर्स प्रोग्राम’ (DVP) का शुभारंभ।

भारत–कोरिया गणराज्य (ROK) द्विपक्षीय संबंध

ऐतिहासिक संबंध:·         भारत और ROK (कोरिया गणराज्य) ने 1962 में कांसुलर संबंध और 1973 में राजनयिक संबंध स्थापित किए, जिन्हें बाद में 2015 में ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में उन्नत किया गया।·         नेतृत्व स्तर पर संवाद G20, G7 और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के मंचों (2023-2025) के माध्यम से निरंतर जारी रहा।·         भारत ने कोरियाई युद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता, चिकित्सा सहायता और युद्धबंदियों के प्रत्यावर्तन  प्रयासों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया था।·         रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘लैंप ऑफ द ईस्ट’ ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया।
आर्थिक संबंध:·         CEPA (2010) ने व्यापार को बढ़ावा दिया, जिससे 2024-25 में यह लगभग 26.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, हालाँकि इसमें भारत के लिए व्यापार घाटा बना हुआ है।·         भारत मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पादों, धातुओं और लोहे का निर्यात करता है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और ऑटोमोबाइल घटकों का आयात करता है।·         ROK भारत में 13वां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) निवेशक है, जिसकी विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति है।
रक्षा संबंध:·         रक्षा संबंध प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) द्वारा निर्देशित हैं: 2005 (रक्षा उद्योग और रसद), 2010 (रक्षा R&D), और 2020 (रक्षा उद्योग रोडमैप)।·         समुद्री सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है, जिसमें 2025 में पहला द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास और समुद्री खोज एवं बचाव (Maritime Search and Rescue) पर कोस्ट गार्ड समझौता ज्ञापन शामिल है।·         KADEX जैसी रक्षा प्रदर्शनियों और ‘सियोल रक्षा संवाद’ एवं ‘दिल्ली रक्षा संवाद’ जैसे मंचों में भागीदारी रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करती है।
प्रवासी:·         दक्षिण कोरिया में भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 18,000 है, जिसमें छात्र, पेशेवर और शोधकर्ता शामिल हैं।·         बड़ी संख्या में भारतीय STEM शिक्षा और आईटी एवं ऑटोमोबाइल जैसे उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में कार्यरत हैं।·         भारतीय प्रवासी संघ सांस्कृतिक जुड़ाव और सामुदायिक कल्याण को सक्रिय रूप से बढ़ावा देते हैं।

Sources:
PIB
PM India
The Hindu
Indian Express

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