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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: केंद्र सरकार ने ‘औषधि नियम, 1945’ में ‘औषधि (आठवां संशोधन) नियम, 2026’ के माध्यम से संशोधन किया है, ताकि कोशिका या स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पादों, जीन चिकित्सीय उत्पादों और ज़ेनोग्राफ़्ट्स (Xenografts) को ‘केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण’ (CLAA) के दायरे में लाया जा सके।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह संशोधन मौजूदा ‘केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण’ (CLAA) ढांचे का विस्तार करता है, जिसके तहत निर्दिष्ट उच्च-जोखिम वाली दवाओं और जैविक उत्पादों को केंद्रीय और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा संयुक्त रूप से विनियमित किया जाता है, ताकि इसमें उन्नत पुनर्योजी और जीन-आधारित चिकित्सा पद्धतियों को शामिल किया जा सके।
  • इस कदम का उद्देश्य विनियामक निगरानी को मजबूत करना, एकसमान राष्ट्रीय लाइसेंसिंग मानक सुनिश्चित करना, रोगी की सुरक्षा की रक्षा करना और भारत के विनियामक ढांचे को वैज्ञानिक प्रगति तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना है।
  • यह संशोधन ‘औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड’ (DTAB) के साथ परामर्श और आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के बाद, 29 जून 2026 से प्रभावी हो गया है।

औषधि (आठवाँ संशोदन) नियम, 2026 के बारे में

  • CLAA के अंतर्गत कवरेज का विस्तार: CLAA दायरे में नए शामिल किए गए उत्पाद:
    • कोशिका या स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पाद
    • जीन चिकित्सीय उत्पाद
    • ज़ेनोग्राफ़्ट्स (Xenografts – पशुओं के ऊतक जो मनुष्यों में प्रत्यारोपित किए जाते हैं)
  • CLAA के अंतर्गत पहले से शामिल उत्पाद:
    • टीके
    • रिकॉम्बिनेंट डीएनए (r-DNA) व्युत्पन्न दवाएं
    • लार्ज वॉल्यूम पैरेंटेरल (100 मिलीलीटर से अधिक के IV समाधान)
    • अन्य निर्दिष्ट जैविक उत्पाद
  • संयुक्त केंद्र-राज्य लाइसेंसिंग: इन उन्नत चिकित्सा पद्धतियों के लिए अब केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों की संयुक्त निगरानी में लाइसेंसिंग की आवश्यकता होगी, जिससे देश भर में एकसमान विनियामक निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • कवर किए गए उत्पाद
    • कोशिका या स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पाद: स्टेम सेल-आधारित पुनर्योजी चिकित्सा और CAR-T सेल थेरेपी, जिसका उपयोग ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे रक्त कैंसर के उपचार में किया जाता है।
    • जीन चिकित्सीय उत्पाद: आनुवंशिक विकारों और विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में उपयोग की जाने वाली जीन रिप्लेसमेंट (जीन प्रतिस्थापन) और जीन-संपादन थेरेपी।
    •  ज़ेनोग्राफ़्ट्स: मनुष्यों में प्रत्यारोपित किए जाने वाले पशु ऊतक-व्युत्पन्न उत्पाद (जैसे, हृदय वाल्व), जो कार्डियोलॉजी (हृदय रोग विज्ञान) और आर्थोपेडिक्स (अस्थि रोग विज्ञान) में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
  • किए गए कानूनी परिवर्तन: यह संशोधन ‘औषधि नियम, 1945’ (Drugs Rules, 1945) में निम्नलिखित परिवर्तन करता है:
    • CLAA के दायरे में नई अधिसूचित उत्पाद श्रेणियों को शामिल करने के लिए नियम 75, 75A, 76 और 76A में संशोधन किया गया है।
    • इन उत्पादों को शामिल करने के लिए अनुसूची A में लाइसेंसिंग फॉर्म 27D, 27DA, 28D और 28DA को अद्यतन किया गया है।
  • विनियामक औचित्य: उन्नत कोशिका और जीन थेरेपी में जटिल विनिर्माण प्रक्रियाएं, विशेष वैज्ञानिक मूल्यांकन और दीर्घकालिक सुरक्षा निगरानी शामिल होती है।
    • इसलिए, पारंपरिक दवाओं की तुलना में इन्हें अधिक गहन विनियामक जाँच (scrutiny) की आवश्यकता होती है।

संशोधन का महत्व

  • रोगी सुरक्षा को बढ़ावा देना: यह जटिल और तेजी से विकसित हो रही चिकित्सा पद्धतियों के लिए, जिनमें महत्वपूर्ण नैदानिक होते हैं, गहन विनियामक जाँच सुनिश्चित करता है।
  • एकसमान राष्ट्रीय मानक सुनिश्चित करना: केंद्रीय और राज्य स्तरीय संयुक्त लाइसेंसिंग पूरे देश में सुसंगत विनियामक मानकों और वैज्ञानिक मूल्यांकन को बढ़ावा देती है।
  • बायोमेडिकल नवाचार के साथ कदम मिलाना: यह भारत के औषधि विनियामक ढांचे को पुनर्योजी चिकित्सा, जीन थेरेपी और प्रिसिजन मेडिसिन (सटीक चिकित्सा) में हुई प्रगति के अनुरूप अपडेट करता है।
  • जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा: यह डेवलपर्स और निर्माताओं के लिए गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के मानकों को बनाए रखते हुए एक स्पष्ट और पूर्वानुमान योग्य लाइसेंसिंग मार्ग प्रदान करता है।
  • विनियामक क्षमता में वृद्धि: यह उभरते हुए जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों के लिए विशेष वैज्ञानिक मूल्यांकन और विनियामक निगरानी को प्रोत्साहित करता है।
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप: यह भारत के विनियामक ढांचे को उन्नत जैविक और जीन-आधारित चिकित्सा के नियमन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लासमकक्ष बनाता है।
  • जीवन विज्ञान क्षेत्र के विकास को समर्थन: यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा करते हुए उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को तेजी से और जिम्मेदारी के साथ अपनाने की सुविधा प्रदान करता है।
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