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सामान्य अध्ययन-2: महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ, एजेंसियाँ और मंच—उनकी संरचना एवं अधिदेश।
सामान्य अध्ययन -3: पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन|
संदर्भ: भारत ने ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग (IWC-70) की 70वीं बैठक में व्हेल और अन्य सीटेशियन (Cetaceans) के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अन्य संबंधित जानकारी
- अपने उद्घाटन वक्तव्य में भारत ने सीटेशियन के प्रभावी संरक्षण के लिए प्राकृतिक क्षेत्र वाले देशों, वैज्ञानिक संस्थानों और संबंधित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बीच निरंतर सहयोग पर जोर दिया।

- भारत ने रेखांकित किया कि जनसंख्या की स्थिति, वितरण, आवागमन, प्रजनन पारिस्थितिकी और खतरों से संबंधित बेहतर वैज्ञानिक जानकारी संरक्षण उपायों को बढ़ावा देने तथा सूचित निर्णय लेने में सहायता करने के लिए आवश्यक है।
- भारत ने वैज्ञानिक अध्ययनों और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों के प्रति समर्थन दोहराया। साथ ही, सीटेशियन के समक्ष मौजूद खतरों से निपटने के लिए व्यावहारिक और स्थानीय रूप से उपयुक्त दृष्टिकोण विकसित करने हेतु सरकारों, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों के बीच अधिक सहयोग पर बल दिया।
- IWC-70 का विशेष महत्व है, क्योंकि यह व्हेलिंग के विनियमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय पर हस्ताक्षर किए जाने की 80वीं वर्षगांठ के साथ आयोजित हो रही है।
अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग के बारे में
- अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग (IWC) एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1946 में व्हेलिंग के विनियमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय के तहत की गई थी। इस अभिसमय पर 2 दिसंबर 1946 को वॉशिंगटन, डी.सी. में हस्ताक्षर किए गए थे।
- इसके 89 सदस्य देश हैं और यह व्हेलिंग के प्रबंधन तथा व्हेल के संरक्षण के लिए वैश्विक निकाय के रूप में कार्य करता है।
- अभिसमय IWC के लिए कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जबकि इसका कानूनी रूप से बाध्यकारी अनुसूची निम्नलिखित उपाय निर्धारित करती है, जैसे— पकड़ की सीमा, व्हेल अभयारण्य, बछड़ों तथा बछड़ों के साथ रहने वाली मादा व्हेलों का संरक्षण और शिकार की विधियों पर प्रतिबंध।
- IWC की वैज्ञानिक समिति अनुसंधान, जनसंख्या आकलन और सीटेशियन जीवविज्ञान के अध्ययन के माध्यम से वैज्ञानिक सलाह प्रदान करती है।
IWC का गठन क्यों किया गया?
- व्हेल की घटती आबादी: अत्यधिक और अपर्याप्त रूप से विनियमित व्हेलिंग के कारण व्हेल के भंडार में भारी कमी आई। अंटार्कटिक क्षेत्र में व्हेल के शिकार की संख्या 1904 में 195 से बढ़कर 1931 में लगभग 37,000 हो गई, जबकि अंटार्कटिक ब्लू व्हेल की अनुमानित संख्या 2–3 लाख से घटकर 400 से भी कम रह गई।
- अंतर्राष्ट्रीय विनियमन की आवश्यकता: चूँकि व्हेल प्रवासी होती हैं और राष्ट्रीय सीमाओं को पार करती हैं, इसलिए उनके दोहन को विनियमित करने और उनकी आबादी के संरक्षण के लिए एकतरफा उपाय अपर्याप्त थे। इससे समन्वित अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता उत्पन्न हुई।
IWC का विकास
- विनियमन से संरक्षण की ओर: प्रारंभ में IWC का ध्यान व्हेलिंग के विनियमन पर था, लेकिन वैश्विक व्हेल पकड़ की संख्या 1946 में 35,000 से बढ़कर 1962 में 66,000 हो जाने के कारण अधिक मजबूत संरक्षण उपाय अपनाए गए। इनमें 1982 में अपनाई गई और 1986 से प्रभावी वाणिज्यिक व्हेलिंग पर रोक भी शामिल है।
- व्यापक संरक्षण भूमिका: बाद में IWC ने अपना ध्यान बायकैच (अन्य जीवों के साथ अनजाने में व्हेल का पकड़ा जाना), उलझाव, जहाजों की टक्कर, समुद्री शोर, प्रदूषण, रोग और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों तक विस्तारित किया।
- विभिन्न देशों के अलग-अलग रुख: नॉर्वे इस रोक के प्रति अपनी औपचारिक आपत्ति के तहत वाणिज्यिक व्हेलिंग जारी रखता है, जबकि आइसलैंड 2002 में इस रोक के प्रति आरक्षण के साथ IWC में फिर शामिल हुआ। जापान 2019 में IWC से अलग हो गया और उसने वाणिज्यिक व्हेलिंग फिर शुरू कर दी।
- आदिवासी निर्वाह व्हेलिंग: IWC स्वदेशी समुदायों द्वारा उनकी पारंपरिक खाद्य एवं सांस्कृतिक आवश्यकताओं के लिए सीमित व्हेल शिकार को वैज्ञानिक रूप से निर्धारित पकड़ सीमा के माध्यम से विनियमित करता है।
व्हेल और अन्य सीटेशियन के संरक्षण हेतु भारत के प्रयास
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: भारतीय जलक्षेत्र में पाई जाने वाली सीटेशियन प्रजातियों को इस अधिनियम के तहत उच्चतम स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- समुद्री संरक्षित क्षेत्र: भारत ने समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के लिए कई समुद्री संरक्षित क्षेत्र (MPAs) अधिसूचित किए हैं, जिनमें व्हेल, डॉल्फिन, डुगोंग, शार्क, रे मछलियाँ, कछुए और प्रवाल शामिल हैं।
- प्रोजेक्ट डॉल्फिन (2020): 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया प्रोजेक्ट डॉल्फिन डॉल्फिन, व्हेल, पॉरपॉइज़ तथा संबंधित जलीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण के लिए समग्र दृष्टिकोण अपनाता है।
- अरब सागर की हंपबैक व्हेल: भारत ने इसके संरक्षण को विशेष महत्व दिया है; यह केंद्रित संरक्षण प्रयासों के लिए चिन्हित 25 प्रजातियों में शामिल है।
- भारत और IWC (1981): भारत 1981 से IWC का सदस्य है और उसने दोहराया है कि IWC का भावी कार्य विज्ञान-आधारित संरक्षण प्राथमिकताओं, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और व्हेल तथा अन्य सीटेशियन के समक्ष मौजूद खतरों से निपटने के लिए व्यावहारिक उपायों द्वारा निर्देशित रहना चाहिए।
