केंद्र सरकार ने इथेनॉलसम्मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को समाप्त किया

संदर्भ: हाल ही में, केंद्र सरकार ने उच्च इथेनॉल सम्मिश्रण को बढ़ावा देने और भारत के जैव ईंधन, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ गतिशीलता के उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में 22%–30% इथेनॉल-सम्मिश्रित पेट्रोल (E22–E30 ईंधन) को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट दी है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह छूट वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के माध्यम से प्रदान की गई है।
  • पहले, ‘इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम’ (EBP) के तहत अधिसूचित सीमा तक पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने पर उत्पाद शुल्क से छूट उपलब्ध थी। नवीनतम अधिसूचना इस लाभ का विस्तार उच्च इथेनॉल मिश्रणों तक करती है।
  • अधिसूचित श्रेणियों में शामिल हैं:
    • E22: 22% इथेनॉल और 78% पेट्रोल।
    • E25: 25% इथेनॉल और 75% पेट्रोल।
    • E27: 27% इथेनॉल और 73% पेट्रोल।
    • E30: 30% इथेनॉल और 70% पेट्रोल।
  • यह उपाय तब किया गया है जब भारत ने समय से पहले 20% इथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है, जो इथेनॉल-आधारित ईंधन अपनाने के अगले चरण का प्रतीक है।
  • इस कदम से वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और ईंधन खुदरा विक्रेताओं को उच्च इथेनॉल-सम्मिश्रण वाले ईंधन के लिए तैयारी करने हेतु प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के बारे में

  • वर्ष 2003 में शुरू किया गया यह कार्यक्रम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
  • इस कार्यक्रम का लक्ष्य कच्चे तेल के आयात को कम करना, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए पेट्रोल के साथ इथेनॉल को मिलाना है।
  • सम्मिश्रण के लिए इथेनॉल निम्नलिखित से उत्पादित किया जाता है:
    • सी-हैवी मोलासेस (C-heavy molasses)
    • बी-हैवी मोलासेस (B-heavy molasses)
    • गन्ने का रस और सिरप
    • खराब खाद्यान्न
    • सरकार द्वारा अनुमत मक्का और अधिशेष चावल।
  • यह कार्यक्रम ‘राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018’ द्वारा समर्थित है, जो परिवहन क्षेत्र में जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देती है।
  • भारत ने 2025-26 की त्वरित समय सीमा को पूरा करते हुए मूल लक्ष्य वर्ष 2030 से 5 वर्ष पूर्व ही 20% इथेनॉल सम्मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देता है: आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करता है और भारत के परिवहन-ईंधन मिश्रण में विविधता लाता है।
  • जैव ईंधन अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है: घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल की माँग का विस्तार करता है और जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करता है।
  • किसानों को लाभ: गन्ने और अनाज आधारित फीडस्टॉक के लिए अतिरिक्त बाजार अवसरों का सृजन करते है, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि होती है।
  • स्वच्छ गतिशीलता  को बढ़ावा: उच्च इथेनॉल मिश्रण ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकते हैं और भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों का समर्थन करते हैं।
  • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ाता है: स्वदेशी ईंधन उत्पादन को प्रोत्साहित करता है और वैश्विक तेल-मूल्य के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है।

युवा संगम चरण-VI

संदर्भ: युवा संगम (Yuva Sangam) का छठा चरण वर्ष 2026 में आयोजित किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (EBSB) पहल के तहत आयोजित यह कार्यक्रम युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विविधता, विकास पहलों, प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम और जन संपर्क का प्रत्यक्ष अनुभव लेने करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

युवा संगम के बारे में

  • युवा संगम’ शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ (EBSB) के अंतर्गत संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है।
  • यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों के युवाओं के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है, जिससे राष्ट्रीय एकता और आपसी समझ को बढ़ावा दिया जा सके।
  • 5 ‘P’ फ्रेमवर्क: पूरा कार्यक्रम निम्नलिखित पांच स्तंभों पर केंद्रित है:
    • पर्यटन (Tourism)
    • परंपरा (Tradition)
    • प्रगति (Development)
    • परस्पर संपर्क (People-to-People Connect)
    • प्रौद्योगिकी (Technology)
  • यह देशभर में उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत (EBSB) के बारे में

  • सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2015 को शुरू किया गया।
  • जोड़े गए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच संरचित जुड़ाव के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।
  • सांस्कृतिक, भाषाई, शैक्षिक, पर्यटन और जन-जन के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।
  • शिक्षा मंत्रालय द्वारा इसका समन्वय किया जाता है।

महत्व

  • राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है: विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच भावनात्मक जुड़ाव और एकता को बढ़ावा देता है।
  • सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देता है: भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता की सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • अनुभवात्मक अधिगम  को सुगम बनाता है: सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों, विकासात्मक पहलों और नवाचार इकोसिस्टम से अवगत कराता है।
  • विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाता है: राष्ट्र निर्माण और सहकारी संघवाद में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।

ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स जून 2026

संदर्भ: विश्व बैंक की ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स’ (जून 2026) रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा-बाजार में व्यवधान और मध्य पूर्व में संघर्ष से उत्पन्न मुद्रास्फीति के दबावों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से विकसित होती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • वैश्विक विकास: वैश्विक विकास दर 2025 के 2.9% से घटकर 2026 में 2.5% रहने का अनुमान है। यह कोविड-19 महामारी के बाद की सबसे धीमी गति है (पूर्ण मंदी को छोड़कर)।
  • EMDEs (उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं): इन अर्थव्यवस्थाओं में विकास दर 2025 के 4.4% से घटकर 2026 में 3.6% रहने का अनुमान है।
  • दक्षिण एशिया: यह क्षेत्र 6.3% की अनुमानित वृद्धि दर के साथ दुनिया में सबसे तेजी से प्रगति करने वाला क्षेत्र बना हुआ है।
  • पण्य बाजार (Commodity Markets): 2026 में कुल वस्तु कीमतों में 22% की वृद्धि होने का अनुमान है; ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत $94 प्रति बैरल रहने की संभावना है।
  • जोखिम: यदि भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा-आपूर्ति में व्यवधान और बढ़ता है, तो वैश्विक विकास दर 2026 में 1.3% तक गिर सकती है और मुद्रास्फीति का दबाव और तीव्र हो सकता है।
  • दीर्घकालिक कारक: रिपोर्ट में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ-ऊर्जा संक्रमण  और क्षेत्रीय व्यापार एकीकरण की वैश्विक विकास के संभावित भावी चालक के रूप में पहचान की गई है।

इस रिपोर्ट में भारत

  • वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था के 6.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से विकसित होती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
  • यह अनुमान जनवरी 2026 के प्रोजेक्शन से 0.1 प्रतिशत अंक अधिक है, जो अर्थव्यवस्था में निरंतर सुधार को दर्शाता है।
  • भारत की लचीली स्थिति के प्रमुख कारक:
    • उच्च घरेलू खपत
    • निरंतर सार्वजनिक और निजी निवेश
    • अवसंरचना-आधारित विकास
    • सेवा क्षेत्र का विस्तार
  • वैश्विक चुनौतियों के विरुद्ध स्थिति: रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। हालांकि, उच्च ऊर्जा कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं अभी भी जोखिम के रूप में बनी हुई हैं।

13वाँ ब्रिक्स शहरीकरण फोरम

संदर्भ: भारत ने अपनी 2026 की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली में ’13वें ब्रिक्स शहरीकरण फोरम’ की मेजबानी की।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस फोरम का आयोजन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा किया गया था।
  • फोरम का विषय “(लोगों के लिए शहर: समावेशी और लचीले शहरी भविष्य के लिए ब्रिक्स सहयोग” था।
  • भारत ने चौथी बार ब्रिक्स शहरीकरण फोरम की मेजबानी की; इससे पहले उसने 2013 में नई दिल्ली में, 2016 में विशाखापत्तनम में और 2021 में आभासी रूप से इसकी मेजबानी की थी।
  • फोरम ने ‘जन-केंद्रित शहरी विकास पर ब्रिक्स शहरीकरण फोरम संकल्प’ को अपनाया।
  • संकल्प में निम्नलिखित पर बल दिया गया:
    • समावेशी, टिकाऊ, लचीले और रहने योग्य शहर;
    • किफायती और पर्याप्त आवास;
    • जलवायु-अनुकूल शहरी नियोजन;
    • टिकाऊ शहरी अवसंरचना;
    • बेहतर शहरी शासन और नगरपालिका संस्थान;
    • बेहतर शहरी प्रबंधन के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना।
  • यह फोरम ब्रिक्स देशों के बीच तीव्र शहरीकरण के प्रबंधन और शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।

ब्रिक्स शहरीकरण मंच के बारे में  

  • ब्रिक्स शहरीकरण फोरम ब्रिक्स देशों के बीच एक सहयोग तंत्र है जो शहरी विकास और टिकाऊ शहरीकरण पर केंद्रित है।
  • यह निम्नलिखित विषयों से संबंधित संवाद, ज्ञान-साझाकरण और सहयोग को सुगम बनाता है:
    • शहरी नियोजन,
    • आवास,
    • शहरी अवसंरचना,
    • नगरपालिका शासन,
    • स्मार्ट और लचीले शहर।
  • यह फोरम टिकाऊ और जन-केंद्रित शहरी विकास को प्राप्त करने में व्यापक ब्रिक्स सहयोग का पूरक है।

MNIT जयपुर में उन्नत क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई लैब

संदर्भ: हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री (MeitY) ने अग्रणी प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को मजबूत करने के लिए एमएनआईटी (MNIT) जयपुर में एक ‘एडवांस्ड क्वांटम कंप्यूटिंग एंड क्वांटम कम्युनिकेशंस लैब’ और एक ‘एआई (AI) लैब’ की स्थापना की घोषणा की।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • उन्नत क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम संचार लैब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ‘इलेक्ट्रॉनिक्स और आईसीटी (ICT) अकादमिक परियोजना’ के तहत स्थापित की जाएगी।
    • यह क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD), क्वांटम कंप्यूटिंग सिमुलेशन और क्वांटम सेंसिंग हार्डवेयर घटकों में स्वदेशी क्षमताएं विकसित करने पर केंद्रित होगी।
  • एक एआई लैब भी स्थापित की जाएगी, जो अनुसंधान और नवाचार के लिए उन्नत कंप्यूटिंग सुविधाएं और उपकरण प्रदान करेगी तथा ‘इंडियाएआई (IndiaAI) मिशन नेटवर्क’ के साथ जुड़ेगी।
  • इन पहलों का लक्ष्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर काम करने वाले शिक्षाविदों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।

क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई के बारे में

  • क्वांटम कंप्यूटिंग: यह सूचनाओं को संसाधित करने के लिए क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों, जैसे कि अध्यारोपण (superposition) और एंटैंगलमेंट (entanglement) का लाभ उठाती है। यह कुछ जटिल कार्यों के लिए पारंपरिक कंप्यूटरों से कहीं अधिक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
  • क्रिप्टोग्राफी, दवा की खोज, सामग्री विज्ञान, अनुकूलन (optimisation), वित्तीय मॉडलिंग और जलवायु सिमुलेशन।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): यह उन कंप्यूटर प्रणालियों को संदर्भित करती है जो उन कार्यों को करने में सक्षम हैं जिनके लिए आमतौर पर मानवीय बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है, जैसे सीखना, तर्क करना, निर्णय लेना और पैटर्न की पहचान करना।
  • उपयोग: एआई को स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, विनिर्माण, शासन और वित्त सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से लागू किया जा रहा है।

महत्व

  • अग्रणी अनुसंधान को बढ़ावा: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करता है।
  • कुशल मानव पूंजी का निर्माण: उभरते तकनीकी क्षेत्रों में छात्रों के प्रशिक्षण और कार्यबल की तैयारी को बढ़ाता है।
  • तकनीकी आत्मनिर्भरता का समर्थन: महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताएं विकसित करने के भारत के लक्ष्य में योगदान देता है।
  • नवाचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देना: उद्योग-अकादमिक सहयोग और प्रौद्योगिकी-संचालित उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है।

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