संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: विश्व हाथी दिवस प्रति वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिवस हाथियों और उनके आवासों की रक्षा करने तथा मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच सतत सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।
विश्व हाथी दिवस के बारे में
• विश्व हाथी दिवस विश्व के हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय वार्षिक दिवस है।
• इसकी शुरुआत 12 अगस्त 2012 को कनाडाई संरक्षणवादी पेट्रीसिया सिम्स और थाईलैंड के एलीफेंट रीइंट्रोडक्शन फाउंडेशन द्वारा की गई थी।
• इस दिवस का उद्देश्य है:
- जंगली और बंदी हाथियों के समक्ष मौजूद खतरों के बारे में जागरूकता सृजन करना।
- हाथी संरक्षण के संबंध में ज्ञान और सकारात्मक समाधानों को बढ़ावा देना।
- सरकारों, संरक्षण संगठनों और समुदायों को मिलकर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना।
- आवासों के क्षरण, विखंडन, अवैध शिकार, अवैध वन्यजीव व्यापार तथा मानव-हाथी संघर्ष के विरुद्ध वैश्विक कार्रवाई को बढ़ावा करना।
• 2026 का विषय — हाथियों की तरह बनें (“Be More Like Elephants”) — हाथी संरक्षण के लिए अधिक समझ, सहयोग और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करता है।
एशियाई हाथियों (एलिफस मैक्सिमस) के बारे में
• यह एशिया का सबसे बड़ा स्थलीय स्तनधारी है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के 13 रेंज देशों में वनों और घासभूमियों में पाया जाता है।
• यह विभिन्न प्रकार के आवासों के अनुकूल है और घास, पत्तियाँ, छाल, जड़ें तथा कृषि फसलों को खाता है।
• वैज्ञानिक नाम: एलिफस मैक्सिमस
• वैश्विक आबादी: 50,000 से कम
• आवास: वन और घासभूमियाँ
• ऊँचाई: लगभग 6.5–11.5 फीट
• वजन: लगभग 11,000 पाउंड
• सामाजिक संरचना: मादाएँ छोटे, घनिष्ठ रूप से संबंधित समूहों में रहती हैं, जिनका नेतृत्व एक वृद्ध मादा करती है, जिसे मातृसत्ता (Matriarch) कहा जाता है।
• आहार: मुख्य रूप से घास, साथ ही पत्तियाँ, छाल, जड़ें और छोटी टहनियाँ।
• जल की आवश्यकता: हाथियों को सामान्यतः प्रतिदिन मीठे पानी की आवश्यकता होती है।
• कानूनी और संरक्षण स्थिति:
- आईयूसीएन रेड लिस्ट: संकटग्रस्त
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची I
- प्रवासी प्रजातियों पर कन्वेंशन: परिशिष्ट I
भारत की हाथी आबादी
• भारत में विश्व की सबसे बड़ी जंगली एशियाई हाथी आबादी है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 60% है।
• SAIEE 2021–25 ने डीएनए-आधारित मार्क-रीकैप्चर पद्धति का उपयोग करते हुए 22,446 हाथियों का अनुमान लगाया।
• हाथियों की आबादी मुख्यतः उत्तर-पूर्वी, मध्य, उत्तरी और दक्षिणी भारत में केंद्रित है, लेकिन बढ़ते आवास विखंडन का सामना कर रही है।
भारत का हाथी संरक्षण ढाँचा
• प्रोजेक्ट एलीफेंट: प्रोजेक्ट एलीफेंट को 1991–92 में शुरू किया गया था। यह हाथियों के आवास संरक्षण, जंगली और बंदी हाथियों के संरक्षण, मानव-हाथी संघर्ष को कम करने, वैज्ञानिक निगरानी और सामुदायिक भागीदारी का समर्थन करता है।
• हाथी रिजर्व: भारत में 33 हाथी रिजर्व हैं, जो लगभग 80,777 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं। ये हाथी संरक्षण के लिए परिदृश्य-स्तरीय प्रबंधन इकाइयों के रूप में कार्य करते हैं।
• हाथी गलियारे: भारत ने 150 हाथी गलियारों की पहचान की है, जिनमें 52 पूर्व-मध्य, 48 उत्तर-पूर्वी, 32 दक्षिणी और 18 उत्तरी गलियारे शामिल हैं। इनमें 19 अंतर्राज्यीय और 6 सीमा-पार गलियारे हैं, जो भारत और नेपाल को जोड़ते हैं।
• प्रबंधन प्रभावशीलता: प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन ढाँचे को 2023 में शुरू किया गया था। इसका प्रारंभिक परीक्षण शिवालिक, काजीरंगा–कार्बी आंगलोंग, मयूरभंज और नीलगिरि में किया गया तथा अब इसे देशभर में विस्तारित किया जा रहा है।
• अवसंरचना को सुरक्षित बनाना: 14 राज्यों में 77 रेलवे खंडों को प्राथमिकता दी गई है, जहाँ 705 शमन संरचनाएँ स्थापित की गई हैं। थर्मल कैमरों, भूकंपीय सेंसर और AI-सक्षम डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसिंग (Distributed Acoustic Sensing) की सहायता से ट्रेन की चपेट में आने से होने वाली हाथियों की मृत्यु को 2013 में 26 से घटाकर 2024 में 12 करने में मदद मिली है।
• मानव-हाथी संघर्ष का प्रबंधन: उपायों में हॉटस्पॉट मैपिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, त्वरित प्रतिक्रिया दल, सामुदायिक भागीदारी और शीघ्र मुआवजा शामिल हैं। इनमें मृत्यु/स्थायी अक्षमता के लिए ₹10 लाख, गंभीर चोट के लिए ₹2 लाख और मामूली चोट के लिए ₹25,000 तक का मुआवजा शामिल है।
• बंदी हाथियों का संरक्षण: गज सूचना पंजीकृत बंदी हाथियों का राष्ट्रीय आनुवंशिक डेटाबेस बनाए रखता है, जबकि बंदी हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम, 2024 उनके स्थानांतरण और परिवहन को विनियमित करते हैं।
दिवस का महत्व
• जैव विविधता संरक्षण: हाथी कीस्टोन प्रजातियाँ हैं, जिनकी आवाजाही, भोजन और बीज प्रसार वन स्वास्थ्य तथा व्यापक जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
• पारिस्थितिकीय कनेक्टिविटी: हाथी गलियारों की सुरक्षा से व्यापक वन्यजीव आवागमन मार्गों की भी रक्षा होती है और जुड़े हुए आवासों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
• सतत अवसंरचना: हाथी संरक्षण सड़कों, रेलवे, खदानों और अन्य अवसंरचनाओं की वन्यजीव-संवेदनशील योजना को प्रोत्साहित करता है।
• सामुदायिक सह-अस्तित्व: प्रभावी संघर्ष प्रबंधन से फसल नुकसान, मानव मृत्यु तथा प्रतिशोधात्मक हत्याओं को कम किया जा सकता है, जिससे शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलता है।
• वैज्ञानिक संरक्षण: डीएनए-आधारित अनुमान, आनुवंशिक डेटाबेस और प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी साक्ष्य-आधारित हाथी संरक्षण और नीतिनिर्माण को बढ़ावा देते हैं।
