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सामान्य अध्ययन-3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
संदर्भ: भारत में हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1998 के सफल पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षणों की स्मृति मे मनाया जाता है और विज्ञान, नवाचार व स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में भारत की प्रगति और सामर्थ्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस
• भारत में हर साल 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। यह दिन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में देश की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को चिह्नित करने के लिए समर्पित है।
• यह दिन 11 मई 1998 को राजस्थान में किए गए सफल पोखरण-II परमाणु परीक्षणों की याद दिलाता है। इन परीक्षणों ने भारत को एक परमाणु-सक्षम राष्ट्र के रूप में स्थापित किया और देश की स्वदेशी वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

• पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में, भारत सरकार ने 1999 में आधिकारिक तौर पर 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य उन वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं को सम्मानित करना है जिन्होंने भारत की तकनीकी प्रगति में योगदान दिया।
• यह दिन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के योगदान को भी रेखांकित करता है, जिन्होंने भारत के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों में मुख्य भूमिका निभाई और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के प्रतीक बने।
• इस वर्ष की थीम “समावेशी विकास के लिए जिम्मेदार नवाचार” (Responsible Innovation for Inclusive Growth) है। यह स्वदेशी तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीप-टेक नवाचार और समावेशी तकनीकी विकास पर केंद्रित है।
पोखरण-II परमाणु परीक्षण के बारे में
• पोखरण-II परमाणु परीक्षण, जिसका कोड-नाम ‘ऑपरेशन शक्ति’ था, भारत द्वारा 11 और 13 मई, 1998 को राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज में आयोजित किया गया था।
• भारत ने कुल पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए, जिनमें एक थर्मोन्यूक्लियर (संलयन) डिवाइस और चार विखंडन डिवाइस शामिल थे।
• डिवाइसों के नाम: इन पाँचों डिवाइसों को निम्नलिखित नाम दिए गए थे:
- शक्ति-I
- शक्ति-II
- शक्ति-III
- शक्ति-IV
- शक्ति-V
• पहले तीन परीक्षण 11 मई को आयोजित किए गए थे, जबकि शेष दो परीक्षण 13 मई को संपन्न हुए।
• पोखरण-II भारत के पहले परमाणु परीक्षण के बाद आयोजित किया गया था, जो 1974 में ‘स्माइलिंग बुद्धा‘ कोड-नाम के तहत किया गया था।
• ये परीक्षण अत्यधिक गोपनीयता के साथ किए गए थे। अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रतिबंधों के बावजूद, इसने भारत की स्वदेशी वैज्ञानिक और रणनीतिक क्षमताओं का लोहा मनवाया।
• 11 मई, 1998 को परमाणु परीक्षणों के साथ-साथ त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण और स्वदेशी विमान हंसा-3 (Hansa-3) की पहली उड़ान भी संपन्न हुई थी।
पोखरण-II का महत्व
• रणनीतिक महत्व: पोखरण-II ने आधिकारिक तौर पर भारत को एक परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में स्थापित किया और इसकी रणनीतिक निवारण (Strategic Deterrence) क्षमता को मजबूत किया।
- इन परीक्षणों ने दक्षिण एशिया के सुरक्षा परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव किया और भारत के ‘विश्वसनीय न्यूनतम निवारण’ (Credible Minimum Deterrence) के सिद्धांत की नींव रखी।
• वैज्ञानिक और तकनीकी महत्व: इस ऑपरेशन ने परमाणु विज्ञान, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सामग्री विज्ञान और रक्षा प्रौद्योगिकी में भारत की उन्नत स्वदेशी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
- इससे घरेलू अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा।
• राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव: परीक्षणों के बाद, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान सहित कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, भारत धीरे-धीरे एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति के रूप में उभरा और अपने वैश्विक रणनीतिक जुड़ाव का विस्तार किया।
• आत्मनिर्भरता का प्रतीक: पोखरण-II भारत की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, तकनीकी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया।
- इसने राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास में स्वदेशी नवाचार और रणनीतिक प्रौद्योगिकी के महत्व को सुदृढ़ किया।

