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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की सिफारिश पर, मिजोरम विश्वविद्यालय, आइजोल के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) को जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत भारत का 21वाँ नामित रिपॉजिटरी अधिसूचित किया है।
मिजोरम के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम (NHM) के बारे में
- स्थापना: 2022 में मिजोरम विश्वविद्यालय के तत्वावधान में।
- स्थान: आइजोल, मिजोरम; यह इंडो-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट के भीतर स्थित है, जो दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है।
- पदनाम: भारत का 21वां नामित रिपॉजिटरी बना।
- वर्तमान संग्रह: इसमें 500 से अधिक जैविक नमूने हैं, जिनमें हर्बेरियम शीट और नम-संरक्षित (wet-preserved) संग्रह शामिल हैं।
- वैज्ञानिक विशेषज्ञता: इसमें सात वर्गीकरण समूहों में विशेषज्ञता रखने वाली एक बहु-विषयक टीम है, जिनमें टेरिडोफाइट्स, मैक्रोफंगी, मछलियां, सरीसृप, उभयचर, पतंगे, भृंग और तितलियां शामिल हैं।
- रिपॉजिटरी के कार्य:
- वनस्पति और जीवों के वाउचर नमूनों का संरक्षण करना।
- नई खोजी गई प्रजातियों के ‘टाइप नमूनों’ के लिए भंडार के रूप में कार्य करना।
- लेप्टोब्राकेला टैमडिल (Leptobrachella tamdil) जैसी स्थानिक प्रजातियों के प्रलेखन और संरक्षण में सहायता करना।
- क्षेत्रीय महत्व: जैव विविधता से समृद्ध पूर्वोत्तर के संरक्षण में सहयोग करता है, जहां 7,500 से अधिक पुष्पीय पौधों की प्रजातियां और 2,000 से अधिक जीव प्रजातियां पाई जाती हैं।
नामित रिपॉजिटरी के बारे में
- ये वे संस्थान हैं जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा जैविक विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के तहत प्रमाणित जैविक नमूनों की सुरक्षित अभिरक्षा और संरक्षण के लिए अधिसूचित किया जाता है।
- उद्देश्य:
- वाउचर नमूनों और संदर्भ नमूनों का संरक्षण करना।
- नई खोजी गई प्रजातियों के होलोटाइप, आइसोटाइप और पैराटाइप का रखरखाव करना।
- प्रजातियों की पहचान, ट्रेसैबिलिटी और वैज्ञानिक अनुसंधान को सुविधाजनक बनाना।
- दीर्घकालिक संरक्षण और पारिस्थितिक बहाली के लिए जैविक संसाधनों की सुरक्षा करना।
- मुख्य कार्य:
- जमा किए गए नमूनों को अद्वितीय परिग्रहण संख्या प्रदान करना।
- नई खोजी गई प्रजातियों (taxa) को अनिश्चित काल तक संरक्षित रखना।
- जमा किए गए जैविक संसाधनों को कम से कम पांच वर्षों के लिए, या राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के निर्देशानुसार अधिक समय तक बनाए रखना।
- अधिनियम के प्रावधानों के अधीन भारत के भीतर अनुसंधान के लिए नमूनों को उपलब्ध कराना।
- मौजूदा रिपॉजिटरी नेटवर्क: इसमें भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI), वन अनुसंधान संस्थान (FRI), राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR), राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) और अन्य विशिष्ट रिपॉजिटरी जैसे संस्थान शामिल हैं।
जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के बारे मेंउद्देश्य:

- जैव विविधता का संरक्षण करना, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना और उनके उपयोग से होने वाले लाभों का निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित करना।
- त्रि-स्तरीय संस्थागत ढांचे के माध्यम से कार्यान्वयन:
- राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA)।
- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBBs) और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदें (UTBCs)।
- स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs)।
- धारा 39:
- यह केंद्र सरकार को जैविक संसाधनों की विभिन्न श्रेणियों के लिए संस्थानों को रिपॉजिटरी के रूप में नामित करने का अधिकार देती है।
- यह नई प्रजातियों (taxa) के खोजकर्ताओं को नामित रिपॉजिटरी को सूचित करने और वाउचर/टाइप नमूनों को जमा करने के लिए बाध्य करती है।
- सहायक तंत्र:
- जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) द्वारा तैयार किए गए ‘पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर’ (PBRs)।
- अधिनियम के तहत ‘एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग’ (ABS) तंत्र।
- संरक्षण और लाभ साझा करने के लिए ‘राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण निधि’।
- संशोधन: जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने अनुसंधान, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और अनुपालन में सुगमता को बढ़ावा देकर कार्यान्वयन को प्रभावी बनाया है।
महत्व
- राष्ट्रीय रिपॉजिटरी नेटवर्क का विस्तार करके भारत के जैव विविधता शासन और वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करता है।
- जैविक नमूनों को उनके प्राकृतिक स्रोत के निकट संरक्षित करने में सक्षम बनाता है, जिससे प्रलेखन में सुधार होता है और लॉजिस्टिकल (तार्किक/परिवहन संबंधी) चुनौतियां कम होती हैं।
- जैव विविधता से समृद्ध पूर्वोत्तर के स्थानिक और कम अध्ययन की गई प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- वर्गीकरण अनुसंधान, प्रजातियों की पहचान, ट्रेसैबिलिटी और दीर्घकालिक पारिस्थितिक बहाली का समर्थन करता है।
- मिजोरम राज्य जैव विविधता बोर्ड, क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों और राष्ट्रीय रिपॉजिटरी के साथ सहयोग को बढ़ावा देता है।
- पर्स्थाने संरक्षण और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (2024–2030) के तहत ‘राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्य 4’ को आगे बढ़ाता है।
- जैव विविधता सम्मेलन के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं में योगदान देता है और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क के अनुरूप है।
