संदर्भ: केंद्र सरकार को भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों (LBCs) से संबंधित निवेशों को नियंत्रित करने वाले संशोधित ढाँचे के तहत ₹4,895.65 करोड़ के 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह विकास केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2026 में LBCs से संबंधित निवेशों पर लागू पूर्ववर्ती FDI प्रतिबंधों में बदलाव के निर्णय के बाद हुआ है।
पृष्ठभूमि
- भारत ने प्रेस नोट 3 (2020) को कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण और अधिग्रहण-प्रयासों को रोकने के उद्देश्य से लागू किया था।
- इसके तहत भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले निवेश अथवा ऐसे निवेश, जिनमें लाभकारी स्वामी (Beneficial Owner) ऐसे किसी देश में स्थित हो या उसका नागरिक हो, के लिए सरकारी मार्ग से पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य किया गया था।
- हालांकि, बाद में सरकार ने पाया कि यह ढाँचा निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंड जैसे वैश्विक निवेशकों को भी प्रभावित कर सकता है, भले ही भूमि-सीमा साझा करने वाले देशों के निवेशकों की हिस्सेदारी केवल छोटी और गैर-नियंत्रणकारी हो।

संशोधित ढाँचा
- मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों (LBCs) से होने वाले निवेशों के लिए FDI नीति में संशोधन को मंजूरी दी थी।
- यह संशोधित ढाँचा लाभकारी स्वामित्व (BO) के संबंध में अधिक स्पष्टता प्रदान करता है। इसमें धन शोधन निवारण नियम, 2005 के आधार पर परिभाषा और मानदंड शामिल किए गए हैं। लाभकारी स्वामित्व की जाँच निवेशक इकाई के स्तर पर की जाती है।
- महत्वपूर्ण बात यह है कि, LBC से संबंधित 10% तक का गैर-नियंत्रणकारी लाभकारी स्वामित्व रखने वाले निवेशकों को स्वचालित मार्ग के माध्यम से निवेश करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते कि संबंधित क्षेत्रीय सीमा, प्रवेश मार्ग तथा अन्य निर्धारित शर्तों का पालन किया जाए। संबंधित जानकारी की रिपोर्टिंग निवेश प्राप्त करने वाली इकाई द्वारा DPIIT को करना आवश्यक है।
- संशोधित ढाँचा कुछ निर्दिष्ट विनिर्माण गतिविधियों के लिए LBC निवेश प्रस्तावों के प्रसंस्करण हेतु 60 दिनों की त्वरित समय-सीमा भी प्रदान करता है। इसमें पूंजीगत वस्तुएँ, इलेक्ट्रॉनिक पूंजीगत वस्तुएँ, इलेक्ट्रॉनिक घटक, पॉलीसिलिकॉन तथा इंगट-वेफर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ऐसे मामलों में बहुमत हिस्सेदारी और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों या भारतीय-निवासी-नियंत्रित संस्थाओं के पास रहना आवश्यक है।
महत्व
यह सुधार राष्ट्रीय सुरक्षा और निवेश सुगमता के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। जहाँ एक ओर भूमि-सीमा साझा करने वाले देशों से जुड़े रणनीतिक या नियंत्रणकारी निवेशों की जाँच को बनाए रखा गया है, वहीं वास्तविक गैर-नियंत्रणकारी निवेशों के लिए नियामकीय बाधाओं को कम किया गया है।
- इससे ये उम्मीदें हैं:
- व्यवसाय करने में सुगमता में सुधार की अपेक्षा है;
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह को बढ़ावा मिल सकता है;
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और घरेलू मूल्य संवर्धन को समर्थन मिल सकता है;
- भारत का वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के साथ एकीकरण मजबूत हो सकता है; तथा
- इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है।
कोसी–मेची लिंक परियोजना और अन्य प्रमुख अवसंरचना पहल
संदर्भ: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास से जुड़े मुद्दों पर नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ चर्चा किया है। चर्चा में कोसी–मेची अंतर्राज्यीय नदी लिंक परियोजना, पर्यटन अवसंरचना, प्रस्तावित विक्रमशिला विश्वविद्यालय और अन्य विकास प्राथमिकताएँ शामिल थीं।
कोसी–मेची अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना
- इस परियोजना का उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त जल के एक हिस्से का उपयोग करना तथा पूर्वी कोसी मुख्य नहर (EKMC) के पुनर्निर्माण और विस्तार के माध्यम से इसे महानंदा बेसिन की ओर मोड़ना है।
- बिहारमेंपर्यटनअवसंरचना
- इस बैठक में पर्यटन से संबंधित विकास पर भी चर्चा की गई, जिसमें महाबोधि मंदिर कॉरिडोर और विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर शामिल हैं।
- महाबोधिमंदिर
- यह मंदिर बोधगया में स्थित है।
- यह एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ केंद्र है।
- केंद्रीय बजट 2024–25 में महाबोधि मंदिर कॉरिडोर के विकास के लिए सहायता की घोषणा की गई थी।

- विष्णुपदमंदिर
- यह मंदिर गया में स्थित है।
- केंद्रीय बजट 2024–25 में विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर के विकास का भी प्रस्ताव किया गया था।
- इस प्रस्तावित कॉरिडोर का विकास काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर की व्यापक विकास अवधारणा के अनुरूप किया जाना है, जिसका उद्देश्य इन स्थलों को विश्वस्तरीय तीर्थ एवं पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित करना है।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय
- एक अन्य मुद्दा विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार से संबंधित था।
- बिहार सरकार ने विक्रमशिला के पुनरुद्धार को उच्च शिक्षा और विरासत संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में चिह्नित किया है।
- बिहार सरकार ने जून 2026 में कहा था कि उसका उद्देश्य अगले एक वर्ष के भीतर विक्रमशिला विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार करना है।
- ऐतिहासिक विक्रमशिला केंद्र प्राचीन भारत के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में से एक था, जो नालंदा और अन्य प्रसिद्ध संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण स्थान रखता था। शिक्षा मंत्रालय भी विक्रमशिला को भारत की प्राचीन बहुविषयक उच्च शिक्षा परंपरा के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में मान्यता देता है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026: बिहार के दो शिक्षक चयनित
संदर्भ: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 5 सितंबर 2026, शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित 48 स्कूली शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। बिहार से खुशबू कुमारी और पुष्पा प्रसाद का चयन इस पुरस्कार के लिए किया गया है।

बिहार के पुरस्कार प्राप्तकर्ता
- खुशबू कुमारी — उर्दू प्राथमिक विद्यालय, बिदायदिह, बांका।
- पुष्पा प्रसाद — कन्या मध्य विद्यालय, कुचाइकोट, गोपालगंज।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से संबंधित तथ्य
- राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार की स्थापना 1958 में की गई थी। इसका उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार तथा विद्यार्थियों के सीखने के अनुभवों को समृद्ध करने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों और विद्यालय प्रमुखों को सम्मानित करना है।
- यह पुरस्कार शिक्षा मंत्रालय के समग्र पर्यवेक्षण में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा प्रदान किया जाता है। इसके माध्यम से विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार और समर्पण को मान्यता दी जाती है।
पुरस्कार के घटक
- प्रत्येकपुरस्कारप्राप्तकर्ताको:
- प्रशस्ति प्रमाण-पत्र
- रजत पदक
- ₹50,000 की नकद राशि प्रदान की जाती है।
- इसके अतिरिक्त, पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को प्रधानमंत्री के साथ संवाद करने का अवसर भी मिलता है।
