दिल्ली के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS)

संदर्भ: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दिल्ली पुलिस द्वारा इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दी है। इसकी अनुमानित लागत ₹1,789.52 करोड़ है।

इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के बारे में

  • ITMS एक तकनीक-आधारित पहल है, जो दिल्ली के मौजूदा सड़क नेटवर्क को अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से प्रबंधित करने के लिए रियल-टाइम डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्वचालित प्रवर्तन का उपयोग करती है।
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • कवरेज: 42 चिन्हित यातायात गलियारों में 1,092 अनुकूली यातायात नियंत्रण प्रणाली (ATCS) स्थान और 1,029 प्रवर्तन स्थान शामिल होंगे।
    • अनुकूली सिग्नल: सिग्नल का समय मौजूदा यातायात की स्थिति के अनुसार समायोजित किया जाएगा तथा पूरे गलियारों में सिग्नलों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
    • आपातकालीन प्राथमिकता: एंबुलेंस तथा अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर और प्राथमिकता मार्ग उपलब्ध कराए जाएंगे।
    • यात्री सूचना: वैरिएबल मैसेज साइन (VMS) बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म यातायात जाम, मार्ग परिवर्तन तथा पार्किंग से संबंधित जानकारी साझा करेंगे; यह डेटा नेविगेशन सेवा प्रदाताओं को भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
    • स्वचालित प्रवर्तन: लाल बत्ती का उल्लंघन, तेज गति से वाहन चलाना, गलत दिशा में वाहन चलाना, हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, अवैध पार्किंग और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग जैसे उल्लंघनों का पता लगाया जाएगा। AI आधारित विश्लेषण चोरी या ब्लैकलिस्ट किए गए वाहनों, बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों तथा हिट-एंड-रन वाहनों की पहचान में भी सहायता करेगा।
    • कमांड सेंटर: ट्रैफिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, डेटा सेंटर और आपदा रिकवरी अवसंरचना द्वारा समर्थित होंगे। भविष्य में विस्तार के लिए ओपन स्टैंडर्ड और APIs का उपयोग किया जाएगा।
  • कार्यान्वयन: परियोजना को 24 महीनों में तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसके बाद पाँच वर्षों तक संचालन और रखरखाव किया जाएगा। प्रत्येक चरण का अगला चरण शुरू करने से पहले प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा।
    • प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से चयनित मास्टर सिस्टम इंटीग्रेटर परियोजना को क्रियान्वित करेगा, जबकि C-DAC परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में कार्य करेगा।

आवश्यकता और महत्त्व

  • दिल्ली में लगभग 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन हैं और वाहनों की संख्या में वृद्धि सड़क अवसंरचना के विस्तार की तुलना में काफी तेज रही है।
  • यातायात विनियमन अभी भी काफी हद तक निश्चित सिग्नल समय-निर्धारण और मैनुअल हस्तक्षेप पर निर्भर करता है।
  • ITMS वास्तविक सड़क परिस्थितियों के अनुसार गतिशील रूप से प्रतिक्रिया देकर मौजूदा सड़क क्षमता के बेहतर उपयोग में सुधार करता है।
  • इससे यातायात का अधिक सुचारु संचालन, सुरक्षित सड़कें, घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया, नियमों का एकरूप प्रवर्तन तथा यात्रियों के लिए अधिक पूर्वानुमेय यात्रा सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027

संदर्भ: टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में 118 देशों और क्षेत्रों के 2,297 विश्वविद्यालयों को रैंक किया गया, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा संस्करण बन गया है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • वैश्विक स्तर:
    • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने लगातार 11वें वर्ष प्रथम स्थान बरकरार रखा, जिसके बाद MIT दूसरे स्थान पर रहा। दोनों के बीच केवल 0.1 अंक का अंतर रहा।
    • सिंघुआ विश्वविद्यालय बढ़कर 11वें स्थान पर पहुँच गया और एशिया का सर्वोच्च रैंक वाला संस्थान बन गया, जबकि पेकिंग विश्वविद्यालय 13वें और NUS 15वें स्थान पर रहा। इस प्रकार, पहली बार एशिया के तीन विश्वविद्यालय वैश्विक शीर्ष 15 में शामिल हुए।
    • एशिया के 40 विश्वविद्यालय वैश्विक शीर्ष 200 में शामिल हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 अधिक हैं। वहीं, मलेशिया पहली बार शीर्ष 200 में शामिल हुआ।
    • चीन के शीर्ष 200 में शामिल विश्वविद्यालयों की संख्या 13 से बढ़कर 17 हो गई, जो वैश्विक उच्च शिक्षा में एशियाई संस्थानों की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है।
  • भारत से संबंधित निष्कर्ष:
    • रैंकिंग में भारत के 143 विश्वविद्यालय शामिल हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 अधिक हैं। इसके साथ ही, लगातार दूसरे वर्ष भारत एशिया में सर्वाधिक प्रतिनिधित्व वाला देश रहा।
    • IISc बेंगलुरु वैश्विक स्तर पर 254वें स्थान के साथ भारत का सर्वोच्च रैंक वाला संस्थान रहा, जिसका समग्र स्कोर 57.0 था।
    • इसका सबसे मजबूत संकेतक अनुसंधान परिवेश (Research Environment) — 98.0 रहा, इसके बाद शिक्षण (Teaching) — 62.1 और अनुसंधान गुणवत्ता (Research Quality) — 58.6 रहे।
    • अन्य प्रमुख भारतीय संस्थानों में सवीथा (326–350), शूलिनी (451–500), जामिया मिल्लिया इस्लामिया और KIIT (501–550) शामिल रहे।
    • SRM यूनिवर्सिटी-आंध्र प्रदेश ने पहली बार भाग लेते हुए 1001–1200 बैंड में प्रवेश किया।

भारत–जापान UNICORN समझौता

संदर्भ: जापान ने भारत से UNICORN (यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना) समझौते की आंतरिक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का आग्रह किया है, तथा द्विपक्षीय रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाने में इसके महत्त्व को रेखांकित किया है।

UNICORN (यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना) नौसैनिक रडार सिस्टम के बारे में

  • UNICORN एक उन्नत एकीकृत नौसैनिक एंटीना मास्ट है, जिसे NORA-50 एकीकृत मास्ट के नाम से भी जाना जाता है।
  • शिपबोर्ड UNICORN की विशेषताएँ: इसका विकास जापान की कंपनियों, जिनमें एनईसी कॉरपोरेशन, साम्पा कोग्यो के.के.और योकोहामा रबर कंपनी लिमिटेड शामिल हैं, द्वारा किया गया है।
  • यह प्रणाली कई संचार, निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को एकएकल संलग्न मास्ट में एकीकृत करने के लिए डिजाइन की गई है।
  • प्रमुख विशेषताएँ
    • यह कई एंटेना को एक ही संरचना में समेकित करता है, जिससे युद्धपोतों के रडार क्रॉस-सेक्शन और विद्युतचुंबकीय सिग्नेचर में कमी आती है।
    • इस मास्ट में टैक्टिकल डेटा लिंक, संचार, टैक्टिकल एयर नेविगेशन सिस्टम (TACAN), आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड ऑर फो (IFF) और इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) जैसी प्रणालियों को एकीकृत किया गया है।
    • इसका एकीकृत डिजाइन स्थान के बेहतर उपयोग, विद्युतचुंबकीय अनुकूलता और प्रणालियों के रखरखाव में सुगमता को बेहतर बनाता है।
    • इस मास्ट में फाइबर-रिइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (FRP) रेडोम का उपयोग किया गया है तथा समुद्र में सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लाइटनिंग-डायवर्टर व्यवस्था भी शामिल है।
    • UNICORN वर्तमान में जापान के मोगामी-क्लास फ्रिगेट्स से संबद्ध है।
  • सामरिक महत्त्व
    • यह प्रणाली नौसैनिक प्लेटफॉर्मों की स्टील्थ क्षमता और उत्तरजीविता को बढ़ा सकती है, क्योंकि इससे उनका पता लगाना और ट्रैक करना अधिक कठिन हो जाता है।
    • यह उन्नत जापानी नौसैनिक प्रौद्योगिकी तक पहुँच प्रदान करती है और भारत के स्वदेशी नौसैनिक आधुनिकीकरण के प्रयासों को समर्थन देती है।

UNICORN पर भारत–जापान समझौता

  • भारत और जापान ने 15 नवंबर 2024 को भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए UNICORN मास्ट के सह-विकास हेतु कार्यान्वयन ज्ञापन (MoI) पर हस्ताक्षर किए।
  • यह भारत और जापान के बीच पहला रक्षा उपकरण सह-विकास/सह-उत्पादन परियोजना है।
  • जापान डिजाइन विशेषज्ञता और प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएगा, जबकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) भारत में इसके विनिर्माण और सिस्टम इंटीग्रेशन का कार्य करेगा।
  • यह परियोजना मेक इन इंडिया को बढ़ावा देती है, क्योंकि इससे घरेलू विनिर्माण, प्रौद्योगिकी का अवशोषण और भारत की रक्षा-औद्योगिक क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण होगा।
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