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सामान्य अध्ययन-3: संरक्षण, पर्यावरणीय प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।

संदर्भ: भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना (IFWCS) के तहत नई दिल्ली में पहली बार PRAMAAN प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। यह भारत में वन प्रमाणन व्यवस्था के नीति-निर्माण से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के चरण में प्रवेश का संकेत है।

अन्य संबंधित जानकारी

• पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने PRAMAAN प्रमाण-पत्र प्रदान किए। यह कार्यक्रम भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल द्वारा आयोजित किया गया था, जो IFWCS की संचालन एजेंसी है।

• प्रमाण-पत्र आंध्र प्रदेश वन विकास निगम (APFDC) को 33,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले वृक्षारोपणों के लिए तथा ओडिशा बाँस विकास एजेंसी (OBDA) से जुड़े बाँस किसान गोविंद महापात्र को प्रदान किए गए।

• प्रमाणन से पहले प्रमाणित वृक्षारोपणों और कृषि गतिविधियों का क्षेत्रीय एवं प्रबंधन ऑडिट किया गया। यह दिसंबर 2023 में शुरू किए गए प्रमाणन ढाँचे के व्यावहारिक कार्यान्वयन को दर्शाता है।

भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना (IFWCS) के बारे में

• भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना (IFWCS) को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा दिसंबर 2023 में शुरू किया गया। यह एक स्वैच्छिक, तृतीय-पक्ष प्रमाणन योजना है, जिसका उद्देश्य वनों, कृषि वानिकी तथा काष्ठ-आधारित क्षेत्र में जिम्मेदार प्रथाओं को बढ़ावा देना है।

• यह योजना जिम्मेदार वन एवं कृषि वानिकी प्रथाओं को अपनाने वाली संस्थाओं को बाजार-आधारित प्रोत्साहन प्रदान करती है। इनमें राज्य वन विभाग, वन विकास निगम, किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO) तथा काष्ठ-आधारित उद्योग शामिल हैं।

• इस योजना के अंतर्गत प्रमाणन के तीन प्रमुख घटक हैं:

  • वन प्रबंधन प्रमाणन – दर्ज वन क्षेत्रों और वन वृक्षारोपणों के लिए।
  • वनों के बाहर स्थित वृक्ष (TOF) प्रबंधन प्रमाणन – कृषि वानिकी प्रणालियों और निजी वृक्षारोपणों के लिए।
  • अभिरक्षा श्रृंखला प्रमाणन (CoC Certification) – आपूर्ति श्रृंखला के दौरान इमारती लकड़ी और गैर-काष्ठ वन उत्पादों की उत्पत्ति एवं आवागमन को ट्रेस करने योग्य व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए।

• भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन परिषद इस योजना के लिए बहु-हितधारक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करती है।

• भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल इस योजना की संचालन एजेंसी है, जबकि स्वतंत्र ऑडिट करने वाले प्रमाणन निकायों को भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के अंतर्गत प्रमाणन निकायों के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NABCB) द्वारा प्रत्यायन प्रदान किया जाता है।

PRAMAAN प्रमाण-पत्र के बारे में

• PRAMAAN का पूर्ण रूप प्रोग्राम फॉर रिकग्निशन एंड एक्रेडिटेशन ऑफ सस्टेनेबल मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज फॉर एग्रोफॉरेस्ट्री एंड नेचुरल फॉरेस्ट्री रिसोर्सेज है।

• यह IFWCS के अंतर्गत प्रमाणन ढाँचा है, जो वनों, काष्ठ और गैर-काष्ठ वन उत्पादों के लिए लागू होता है तथा इसका उद्देश्य इन्हें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बेहतर रूप से जोड़ना है।

• प्रमाणन केवल स्व-घोषणा पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके लिए स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट आवश्यक है।

• भारतीय वन प्रबंधन मानक में 8 मानदंड, 69 संकेतक और 254 सत्यापनकर्ता शामिल हैं।

• प्रमाणन 5 वर्षों के लिए वैध होता है। निर्धारित मानकों के निरंतर अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए वार्षिक निगरानी ऑडिट किए जाते हैं।

• PRAMAAN की प्रत्यायन व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन ढाँचों के अनुरूप विकसित किया गया है, जिससे घरेलू एवं वैश्विक खरीदारों तथा नियामकों के बीच इसकी मान्यता को समर्थन मिलता है।

• IFWCS दिशानिर्देश पात्र पर्यावरणीय गतिविधियों को ग्रीन क्रेडिट ढाँचे से जोड़ने का प्रावधान करते हैं। हालांकि, PRAMAAN प्रमाणन प्राप्त करना अपने-आप ग्रीन क्रेडिट प्राप्त करने का आधार नहीं है।

PRAMAAN प्रमाणन का महत्व

• वैश्विक बाजार तक पहुँच: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरती उचित परिश्रम (Due Diligence) और वनोन्मूलन-मुक्त काष्ठ संबंधी आवश्यकताओं के बीच भारतीय उत्पादकों एवं निर्यातकों को सतत और पता लगाने योग्य स्रोत से प्राप्त उत्पादों को प्रमाणित करने में सहायता करता है।

• विश्वसनीय सततता सत्यापन: स्वतंत्र ऑडिट स्वैच्छिक स्व-घोषणा की तुलना में अधिक विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।

• किसानों और आजीविका के अवसर: प्रमाणन लघु एवं सीमांत किसानों, ग्रामीण एवं जनजातीय समुदायों, वन-निर्भर समुदायों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा सीमांत भूमि धारकों को संगठित और संभावित रूप से प्रीमियम बाजारों से जोड़ सकता है।

• पता लगाने योग्य आपूर्ति श्रृंखला: अभिरक्षा श्रृंखला (CoC) प्रमाणन स्रोत से ग्राहक तक काष्ठ और गैर-काष्ठ वन उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला में ट्रेस करने की क्षमता को बढ़ाता है।

• सतत वन-आधारित अर्थव्यवस्था: PRAMAAN पारिस्थितिक संरक्षण, जिम्मेदार उत्पादन और बाजार के अवसरों को आपस में जोड़ता है, जिससे भारत के वनों, कृषि वानिकी प्रणालियों और काष्ठ-आधारित उद्योगों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है।

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