पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन – 2:भारत से संबंधित अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एवं उनके इंडोनेशियाई समकक्ष ने नई दिल्ली में भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग (जेसीएम) की 8वीं बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के समग्र दायरे की समीक्षा की गई तथा भारत-इंडोनेशिया व्यापक सामरिक साझेदारी के अंतर्गत सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई।
अन्य संबंधित जानकारी

- मंत्रियों ने राजनीतिक, रक्षा, समुद्री, आर्थिक, डिजिटल, स्वास्थ्य, ऊर्जा तथा जन-से-जन संपर्क सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की।
- दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत, म्यांमार एवं अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा आसियान की केंद्रीयता एवं नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपने समर्थन की पुनर्पुष्टि की।
संयुक्त आयोग की 8वीं बैठक के प्रमुख परिणाम
- राजनीतिक एवं सामरिक सहयोग
- दोनों पक्ष उच्च-स्तरीय राजनीतिक सहभागिता को और सुदृढ़ करने तथा आसियान-नेतृत्व वाले तंत्रों, संयुक्त राष्ट्र एवं जी-20 सहित क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।
- दोनों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत के प्रति अपना समर्थन दोहराया तथा उभरती क्षेत्रीय संरचना में आसियान की केंद्रीय भूमिका के महत्त्व पर बल दिया।
- आर्थिक एवं उभरती प्रौद्योगिकी सहयोग
- मंत्रियों ने व्यापार, निवेश, विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की।
- दोनों पक्षों ने महत्त्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति शृंखला लचीलापन एवं सतत आर्थिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं की भी पहचान की।
- रक्षा एवं समुद्री सहयोग
- भारत एवं इंडोनेशिया ने रक्षा आदान-प्रदान, सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग तथा समुद्री सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
- बैठक में हिंद-प्रशांत में भारत-इंडोनेशिया समुद्री सहयोग की साझा दृष्टि (2018) के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा की गई तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता, नीली अर्थव्यवस्था पहलों एवं क्षेत्रीय समुद्री स्थिरता में सहयोग पर बल दिया गया।
- क्षेत्रीय एवं विकासात्मक सहयोग
- दोनों देशों ने स्वास्थ्य सेवा, औषधि उद्योग, पारंपरिक चिकित्सा, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा एवं अंतरिक्ष सहयोग में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
- भारत ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं क्षमता निर्माण पहलों के माध्यम से सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत के लिए इंडोनेशिया का महत्त्व
- भारत की एक्ट ईस्ट नीति का प्रमुख स्तंभ: दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था एवं आसियान के प्रमुख सदस्य के रूप में इंडोनेशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत की सहभागिता के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- सामरिक समुद्री साझेदार: मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित होने के कारण इंडोनेशिया भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक संपर्क, ऊर्जा आपूर्ति एवं हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए महत्त्वपूर्ण है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदार: दोनों देश स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत का समर्थन करते हैं तथा नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री सुरक्षा एवं क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर समान दृष्टिकोण रखते हैं।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज: विकासशील देशों एवं जी-20 के सदस्य के रूप में भारत एवं इंडोनेशिया समावेशी, विकासोन्मुख एवं प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक शासन को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- आसियान का प्रवेश द्वार: इंडोनेशिया के साथ मजबूत सहभागिता, आसियान के प्रति भारत की सामरिक, आर्थिक एवं कूटनीतिक पहुँच को सुदृढ़ करती है तथा एशिया की उभरती क्षेत्रीय संरचना में उसकी भूमिका को मजबूत बनाती है।
- महत्त्वपूर्ण खनिज एवं आपूर्ति शृंखलाएँ: निकेल एवं अन्य महत्त्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडारों के कारण इंडोनेशिया, भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण साझेदार है।

